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भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार पर बीजेपी पर 'यू-टर्न' लेने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने कई मुद्दों पर अपने पुराने रख से पलटी मारी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान बीजेपी नेताओं ने भारत-अमेरिका परमाणु करार से जुड़े विधेयक को भारतीय हितों के खिलाफ बताया था।
उन्होंने कहा कि बीजेपी के सुझावों के मुताबिक इस विधेयक में संशोधन भी किया गया था। इसके बावजूद बीजेपी ने इसका विरोध किया और यूपीए सरकार को गिराने का पूरा प्रयास किया था। कांग्रेस नेता ने कहा, 'अब बीजेपी की बहुमत वाली मौजूदा केंद्र सरकार ने परमाणु करार के जवाबदेही से जुड़े उसी उपबंध को लागू करने के लिए अमेरिका के साथ सहमति बना ली है, जिस उपबंध को यूपीए सरकार ने बीजेपी के सुझाव पर ही शिथिल किया था।'
दिग्विजय ने कहा, 'मौजूदा केंद्र सरकार ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार के जवाबदेही से जुडे उपबंध में क्या परिवर्तन किया है, जिससे हमें सुरक्षित परमाणु तकनीकी मिल सके। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस मसले पर भारत की अमेरिका से क्या बातचीत हुई है। इस सिलसिले में खुलासा किया जाना चाहिए।' उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में कांग्रेस केंद्र सरकार से यह अपेक्षा रखती है कि वह भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार के जवाबदेही से जुडे उपबंध को लागू करने के मामले में भारतीय संप्रभुता और हितों का पूरा ध्यान रखे।
कांग्रेस महासचिव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'मई 2014 से केंद्र की सत्ता की अगुवा की भूमिका में आने के बाद बीजेपी लगातार पलटी मार रही है। यूपीए के कार्यकाल के दौरान बीजेपी ने आधार कार्ड योजना और डायरेक्ट कैश ट्रांसफर योजना जैसे सरकारी कार्यक्रमों का विरोध किया। अब बीजेपी की अगुवाई वाली मौजूदा केंद्र सरकार इन्हीं योजनाओं को लागू कर श्रेय लूटना चाहती है।'
दिग्विजय ने कहा कि बीजेपी नीत सरकार ने विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने का चुनावी वादा भी पूरा नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले महीनों में कच्चे तेल की कीमत काफी कम होने के बाद भी पेट्रोल और डीजल के मूल्यों में अपेक्षित गिरावट नहीं आई है और सरकार आम ग्राहकों को राहत देने के बजाय इन ईंधनों पर करों की दरें बढ़ाकर अपना खजाना भर रही है।
दिग्विजय ने यह दावा भी किया कि 'मेक इन इंडिया' की महत्वाकांक्षी परिकल्पना को लेकर नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की नीतियों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा में बुनियादी विरोधाभास है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, 'मोदी मेक इन इंडिया के जरिए विदेशी कम्पनियों को भारत में उत्पादन इकाइयां लगाने का न्योता दे रहे हैं, जबकि संघ परिवार से जुडा स्वदेशी जागरण मंच कहता है कि विदेशी कम्पनियां भारत में अपने उत्पाद न बेचें।'
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