देश के भले-बुरे का जिम्मेदार हिंदू : मोहन भागवत - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

रविवार, 4 जनवरी 2015

देश के भले-बुरे का जिम्मेदार हिंदू : मोहन भागवत

अहमदाबाद में आरएसएस चिंतन शिविर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर दोहराया कि देश स्वयंसेवकों को संबोधित किया। भागवत ने कहा कि भारत दुनिया को सीख देता रहा है। भारत दुनिया का बड़ा भाई। देश को रूढ़ियों से मुक्त करना है। सबको देश को अपना समझना होगा। कट्टरता की वजह से आतंकवाद बढ़ा है।

भागवत ने कहा कि आरएसएस संस्कार देने वाला संगठन हैं। कार्यकर्ता हिंदू समाज को संगठित करें। मतभेदों को दूर कर देश सेवा करें। ये देश परंपरा से हिंदू देश है। देश के भले बुरे का जिम्मेदार हिंदू। हिंदू समाज खतरे में तो देश खतरे में हैं। अगर हम तैयार हैं तो कोई हमें रोक नहीं सकता। सबको स्वीकार करो, सबको साथ लेकर चलो।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समाज सरकार पर निर्भर, सरकार भरोसे ना रहे समाज। सरकार सब कुछ नहीं कर सकती। देशवासियों को संपूर्ण देश अपना लगे। विविधता में एकता हमारी पहचान है। अगर हिंदू एक हो जाए तो देश की तरक्की पक्की। दुनिया भी भारती की तरक्की चाहती है। भागवत ने कहा कि संघ को जानने के लिए इसमें आना जरूरी है। अंदर आएं और अगर संघ अच्छा लगे तो स्वयंसेवक बनें।

कोई टिप्पणी नहीं: