विशेष आलेख : दीवानगी शराब की । - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 7 जनवरी 2015

विशेष आलेख : दीवानगी शराब की ।

अम्रत का जिक्र आते ही लोग सोचने लगते है कि काश मुझे मिल जाता तो अच्छा होता। इसे थोड़ा सा ग्रहण कर लूं। बदलते समय के साथ समाज में शराब ही मनुष्य के लिये सबसे बड़ा अम्रत बन गया है। ये अम्रत आयु रेखा बढ़ाने का नही कम करने का काम करता है। इस अम्रत को अधिक ग्रहण करने के बाद इस दुनिया और मोह माया से दूर हो जाता है। कभी-कभी तो कुछ लोगों की रात फुटपाथों पर गुजरती देखी जाती है। उनको न घर की चिंता होती है। न बीबी और बच्चों की याद आती है । सब कुछ पता चलता है नशा उतरने के बाद। सच में मनुष्यों के लिए अम्रत बने इस शराब ने तो दुनिया में अपनी धूम मचा ली है। लोग इसके दीवाने बनते जा रहे हैं। अमीर हो या गरीब इसका सुरूर तो सब पर बराबर चढ़ता है। शाम होते ही इनके दीवाने, दुकानों पर पहुंचने लगते हैँ। कही पर तो बकायदा नियम कानून से लाइन लगाकर खरीदते हैं। और कही बहुत सारी दुकानों पर इतनी भीड़ दिखती है कि इसे देख कर ऐसा लगता है कि जल्दी से खरीद लो वरना खत्म हो जाएगी। लोग एक के ऊपर एक चढ़ते नज़र आते है। सबके मन में यही बात होती है कि पहले मुझे मिले और जल्दी से ग्रहण कर लूं। इस अम्रत के बारे में इक बात कही गई है। जो लोगों के मुहं से इसके बखान में सुना है। एक बूंद करो अंदर और फिर बन जाओ सिकंदर। इस मानव अम्रत ने पता नही कितनों की जिंदगी बर्बाद कर दी है। कितने घरों में ये कलह का विषय बना हुआ है। इसको लेकर बहुतों के घर पर तो रोज महाभारत का युद्ध होता है। वो गालियां वो मार-पीट ऐसा लगता है कि खून के प्यासे बन गए हों एक दूसरे के लिए। इसकी लत हो तो जेब में हल्का सा भी भारीपन आने पर,घर परिवार के पेट भरने से पहले इसका इंतजाम जरूरी होता है। बहुत सारे तो इसके गुलाम होकर उधारी में जीने का काम शुरू कर देते हैं। कुछ भी हो मदिरा मिल जाए। उन्हें अगर ये अम्रत मिले तो चेहरे पर बारह बज जाते हैं। फिर क्या देशी क्या अंग्रेजी तलाश रहती है सिर्फ मैखाने की। एक अच्छी बात और है कि इसमें बड़े प्यार से ये लिखा होता है कि मदिरा पीना स्वास्थ के लिए हानिकारक है। अपनी ये खूबी पीने वालों को काफी प्यार से बता देती है। लेकिन  दीवानों को कौन समझाए। दीवाने तो दीवाने होते हैं। बहानों का तो भण्डार लगा देते हैं। कोई कहता है ग़म को भुलाने के लिए तो कोई कहता है कि आज इस खुशी में तो पार्टी होनी चाहिए। पीने वालों लोगों के लिए पसंदीदा पेय पद्वार्थ बना हुआ है। दोस्ती से लेकर दुश्मनी कराने की खूबी भी इसमे है। हर शुभ अवसर पर इसके बिना काम नही चलता है। सबसे बड़ी बात बूढों से लेकर युवाओं तक सभी इसके दीवाने हैं। यहां तक कि इस अम्रत को ग्रहण करने में लड़कियां भी पीछे नही हैं। बार हो या पार्टी हर तरफ ज़ाम छलकता मिलता है। चेयर्स करते वो गिलासों की खनक लोगों में इक नया सुरूर डाल देती है। इस सुरूर में खोये लोगों को दीन दुनियां से कोई मतलब होता है। खैर ये ख़तरनाक अम्रत शौक़ और ज़रूरत दोनों बनता जा रहा है। टीवी पर इसकी विज्ञापन की बात करे तो ऐसा लगता है कि सच में विज्ञापन कर रहे स्टार्स ने अपनी सफलता इसी को पीने के बाद प्राप्त की है। फिल्मों की दुनिया की बात करे तो बिना शराब के सब कुछ अधूरा सा लगता है। इस शराब पर तो फिल्में भी बन चुकी हैं। शराब पर बहुत सारे गाने भी आ चुके हैं। पर वो तो एक रील लाईफ है जिसमें नायक को अगर ऐसा दिखा दिया गया तो कोई हर्ज नही है पर रियल लाईफ में अगर ऐसा हो तो कलह की शुरूआत तो बनती है। इसकी शौक़ ने जाने कितनों लोगों से उनकी जिंदगी छीन ली है। इसके नशे में क्या गंदग़ी क्या सफाई सब बराबर है । पीने के बाद तो मखमल गद्दे का सुख फुटपाथ पर उठा लेते हैं। देखो कैसे बोतल में बंद रहकर भी दबसरे को नची देती है। जाहिर है इस अम्रत की लत जिसे लग जाये, वो जिंदगी भर पछताये।






liveaaryaavart dot comरवि श्रीवास्तव
Email-ravi21dec1987@gmail.com
लेखक, कवि, व्यंगकार, कहानीकार, 
फिलहाल एक टीवी न्यूज ऐजेंसी से जुड़े हुए है।

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