वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा है कि रेलवे या कोल इंडिया का निजीकरण करने की सरकार की कोई मंशा नहीं है और मोदी सरकार अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने के साथ ही कामगारो के हितों की रक्षा कर आम लोगों को बेहतर जीवनशैली देने पर अपना ध्यान केन्दि्रत कर रही है। श्री जेटली ने देश के प्रमुख श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व चर्चा के दौरान उन्हें आश्वासत किया कि सरकार रेलवे और कोल इंडिया का निजीकरण नहीं करने जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान अभी अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने और कामगारो के हितों की रक्षा करना है। इसके साथ ही आम लोगों की जीवनशैली को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश कर रोजगार के अवसर सृजित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि हो सकता है हमारा काम करने का तरीका अलग हो लेकिन लक्ष्य सिर्फ एक ही है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगारो के लिए बेहतर सामाजिक सुरक्षा तंत्र बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि देश की 63 प्रतिशत से अधिक आबादी 15 वर्ष से 59 वर्ष आयु वर्ग की है और यही हमारी सबसे बडी ताकत है। देश के समक्ष अभी सबसे बडी चुनौती लोगों को कौशल बनाकर विकास को गति देने में लगाना है।
श्री जेटली ने कहा कि भारतीय श्रम रिपोर्ट 2007 के अनुसार वर्ष 2025 तक 30 करोड लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि अभी सिर्फ रोजगार बढाना ही मुख्य लक्ष्य नहीं है बल्कि देश में श्रमिकों को रोजगार के लायक बनाना भी उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास नहीं होने की वजह से श्रमिकों को बेहतर वेतन नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास और मेक इन इंडिया के माध्यम से सरकार रोजगार के योग्य लोगों की संख्या बढाने और अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृृजित करना चाहती है। वित्त मंत्री ने श्रम सुधार की दिशा में किये गये उपायो का उल्लेख करते हुये कहा कि उनकी सरकार से प्रशिक्षु अधिनियम 1961 को संशोधित कर उद्योग और युवा को अधिक जिम्मेदार बनाया है। इसके साथ ही सरकार सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम में एकरूपता लाने की दिशा में काम कर रही है। इस दौरान श्रमिक प्रतिनिधियों ने कामगारों के लिए बेहतर सामाजिक कल्याण की योजनायें बनाने का सुझाव भी दिया 1 इसके साथ ही एक ही तरह का वेतन भत्ता ठेका और नियमति र्कमचारियों को दिये जाने की व्यवस्था करने की भी मांग की गयी है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों से श्रम कानूनों का कडाई से पालन कराने की सिफारिश भी की गयी।

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