भारत ने आखिरकार लडाकू विमानों का निर्माण करना शुरु कर दिया है और इसी के साथ वह ऐसा करने वाले चंद देशों की पंक्ति में शामिल हो गया है। हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड.एचएएल. को देश का पहला हल्का लडाकू विमान तेजस साैंपने में 32 वर्ष का समय लगा। इस विमान को तेजस नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिया था। हल्का लडाकू विमान बनाने की परियोजना की शुरुआत वर्ष 1983 के अगस्त में हुयी जब सरकार ने 560 करोड रुपये के बजट को मंजूरी देने के साथ प्रोजेक्ट डेफिनिशन फेस.पीडीपी. की शुरुआत हुयी।
लेकिन पीडीपी दस्तावेजों को सरकार को जमा कराने में पांच वर्ष का समय लग गया और फिर इसके निर्माण के पहले चरण को मंजूरी देने में भी पांच साल का वक्त लगा। पहले चरण के निर्माण के लिए दो हजार 188 करोड रुपये की लागत को मंजूरी दी गयी। आठ वर्ष की मेहनत उस वक्त रंग लायी जब 2001 की चार जनवरी को भारत ने खुद के लडाकू विमान को आसमान में उडते देखा। इससे उत्साहित सरकार ने निर्माण के दूसरे चरण के तहत 3301.78 करोड रुपये की राशि पारित की और फिर वर्ष 2010 में 2475.78 करोड़ के अतिरिक्त राशि को मंजूरी दी गयी।
तेजस ने ऐतिहासिक उपलब्धि उस वक्त हासिल की जब वर्ष 2011 में इस विमान को पहली बार उडान भरने की मंजूरी मिली। भारतीय वायु सेना के सूत्रों के मुताबिक तेजस को मंजूरी जल्दबाजी में दी गयी। इस विमान को दूसरी मंजूरी वर्ष 2013 में 20 दिसंबर को मिली। इस विमान के संपर्क में रहे अधिकारियों ने कहा.. तेजस चौथी पीढी का लडाकू विमान है। तेजस वायु रक्षा के लिए विश्व का सबसे हल्का और सुपरसोनिक लडाकू विमान है।.. ये विमान भारतीय वायु सेना के पुराने पड चुके मिग ..21 विमानों की जगह लेंगे। तेजस विमान की परियोजना अपने निर्धारित कार्यक्रम से सात महीने पीछे चल रही है । यह परियोजना दिसम्बर 2007 में पूरी होनी थी लेकिन अब इसे पूरा करने का लक्ष्य इस वर्ष दिसम्बर में रखा गया है। तेजस के 15 विमानों ने अब तक 2700 परीक्षण उडान भरी हैं। इस विमान को अंतिम आपरेशनल मंजूरी आगामी मार्च में मिलने की संभावना है जिसके बाद यह पूरी तरह से वायु सेना में शामिल हो जायेगा। वायु सेना के अनुसार तेजस हथियारों को ले जाने और रेंज के मामले में मिग ..21 से कहीं बेहतर विमान है ।

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