कोयला क्षेत्र की दुनिया की सबसे बडी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड के र्कमचारियों के कल से पांच दिन की हडताल पर जाने से देश में बिजली संयंत्रों को कोयला आपूर्ति बाधित होने की आशंका जतायी जा रही है। कोल इंडिया वक्र्स फेडरेशन के अनुसार इस हडताल में कोयला उद्योग से जुडे करीब पांच लाख श्रमिक भाग लेने वाले है। कोयला अध्यादेश के माध्यम से इसके खनन में निजी कंपनियों को प्रवेश दिये जाने के विरोध में हडताल का आह्वान किया गया है। फेडरेशन के श्री श्यामल दत्ता ने कहा कि यह श्रमिकों के लिए करो या मरो की स्थिति है। सभी श्रमिक संघो ने कोल इंडिया और उसकी सहायक इकाइयों के साथ ही सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड के र्कमचारियों से छह जनवरी को पहली पाली से 10 जनवरी को आखिरी पाली तक हडताल पर रहने का आह्वान किया है।
देश के पांच प्रमुख श्रमिक संगठनों .. भारतीय मजूदर संघ भारतीय राष्ट्रीय श्रमिक संघ कांगेंस अखिल भारतीय श्रमिक संघ कांगें्रस सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स और हिंद मजदूर संघ ने शनिवार को बिजली एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल द्वारा बुलायी बैठक का बहिष्कार किया था। कोयला खनन में 82 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाली कोल इंडिया के नये अध्यक्ष सुतीर्थ भट्टाचार्य ने आज कार्यभार संभाल लिया और कहा कि इस कंपनी की पहली प्राथमिकता उत्पादन और आपूर्ति बढाना है ताकि अविकसित कोयला भंडारों का दोहन किया जा सके।
श्री भट्टाचार्य ने इसके तत्काल बाद कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक में भाग लिया और कहा कि कोल इंडिया को स्वच्छ भारत अभियान में सक्रियता से भाग लेना चाहिए। उन्होंने कंपनी की सहायक इकाइयों के प्रमुखों के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये चर्चा की और कोल इंडिया की प्राथमिकतायें बतायी। इस बीच सूत्रों ने कहा कि कोल इंडिया ने हडताल के मद्देनजर कोयला आपूर्ति पहले से ही बढा दी है ताकि बिजली संयंत्रों के पास पर्याप्त भंडार रहे।

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