धर्मांतरण पर चल रही बहस के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि देश में एक ऐसा कानून होना चाहिए जो स्वेच्छा से धर्मांतरण को स्पष्ट करे। श्री जेटली ने एक न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में यह बात कही। उन्होंनें कहा कि इस कानून का संविधान में उल्लेखित मूलभूत अधिकारों के साथ टकराव नहीं होना चाहिए और धर्मांतरण तथा पुनर्धर्मांतरण को एक ही कसौटी पर आंका जाना चाहिए। उन्होंने कहा ..क्या पुनर्धर्मांतरण धर्मांतरण से बेहतर है। क्या ये दोनों एक ही चीज नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के .घर वापसी. कार्यक्रम को लेकर संसद में जमकर हंगामा हुआ था और विपक्षी दलों ने खासकर राज्य सभा में कई दिनों तक सदन की कार्यवाही बाधित रखी। विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कट्टरपंथी हिन्दू संगठनों पर लगाम कसने पर नाकाम रहे हैं।
इस मामले में प्रधानमंत्री की चुप्पी के बारे में पूछे जाने पर श्री जेटली ने कहा ..श्री मोदी ने भाजपा सांसदों की बैठक में साफ शब्दों में अपनी असहमति व्यक्त की थी। यह कोई गुप्त बैठक नहीं थी। प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष साफ कर दिया था। मुझे इस बात की चिंता है कि जहां हमारा पूरा ध्यान विकास पर है वहीं इस तरह की खबरें मीडिया में सुर्खियां बनकर ध्यान बंटाने का काम कर रही हैं। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के इस बयान के बारे में पूछने पर कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है. श्री जेटली ने कहा कि वह पहले भी ऐसा कह चुके हैं लेकिन मीडिया और विपक्षी दल इस समय ढूंढ ढूंढकर विवादास्पद मुद्दे निकाल रहे हैं।
आमिर खान अभिनीत फिल्म .पीके. के खिलाफ हिंदू संगठनों के हिंसक प्रर्दशनों के बारे में वित्त मंत्री ने साफ किया कि भाजपा इसमें शामिल नहीं है और हम हिंसा के खिलाफ हैं। अगर कोई हिंसक प्रर्दशन करता है तो राज्य सरकारों को कार्रवाई करनी चाहिए। जिन लोगों की भावनाएं इस फिल्म से आहत हुई हैं वे शांतिपूर्ण प्रर्दशन कर सकते हैं।

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