भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, ने जहानाबाद जिला अदालत द्वारा शंकरबिगहा नरसंहार के सभी 24 आरोपितों को बरी कर देने के फैसले पर गहरी चिंता व्यक्त की है और पूरे राज्य में अदालत के इस फैसले के खिलाफ 16 जनवरी को विरोध दिवस मनाने का आह्वान किया है।
आज यहां जारी एक प्रेस बयान में पार्टी के राज्य सचिव राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा है कि बिहार में पिछले दिनों बथानी टोला, नगरी, मियांपुर, लक्ष्मणपुर बाथे और शंकरबिगहा नरसंहार सहित अनेक नरसंहार हुए जिनमें जानवरों की तरह इन्सानों की हत्याये की गई। इन पर लम्बे काल तक विभिन्न अदालतों में सुनवाइयाँ हुई और निचली अदालतों ने सजाएं भी सुनाई। पर वर्षों बाद हाईकोर्ट ने 16 अप्रैल, 2012 से 3 जुलाई 2013 तक बथानी टोला, नगरी, मियांपुर और लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार के सभी सत्तर सजायाफ्ताओं में से एक को छोड़कर शेष 69 को बरी कर दिया। अब शंकरविगहा नरसंहार के सभी 24 आरोपियों को स्थानीय जहानाबाद जिला की अदालत ने बरी कर दिया। उन सभी नरसंहारों में कुल 144 लोगों की हत्यायें की गयी। आखिर किसी ने भी तोे हत्या की है। अतः हत्यारों को बरी कर देने से न्यायालयों और न्याय व्यवस्था का संदेह और अविष्वास के दायरे में आजाना स्वाभाविक है। जनतांत्रिक व्यवस्था में अदालतों के उपरोक्त निर्णय आम जनता को स्वीकार नहीं है।
श्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने आगे अपने बयान मेें कहा है कि न्यायालयों के फैसले साक्ष्य पर आधारित होते हैं जिसे जुटाने का काम पुलिस और प्रषासन का होता है। अतः भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी अदालत के उस फैसले को राज्य की पुलिस और प्रषासकीय व्यवस्था की नाकामी के रूप में देखती है और पूरे राज्य में राज्य की पुलिस और प्रषासकीय व्यवस्था के खिलाफ 16 जनवरी को विरोध दिवस मनाने का आह्वान करती है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी वाम जनवादी शक्तियों और पार्टी की शाखा, अंचल और जिला सभी स्तर की अपनी इकाइयों का आह्वान करती है कि वे 16 जनवरी को अपने-अपने क्षेत्र में आम जनता को गोलबंद कर राज्य की पुलिस और प्रषासकीय व्यवस्था के खिलाफ प्रतिरोध जुलूस, प्रदर्षन आदि को संगठित करें।

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