चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी .आप. के संयोजक अरविंद केजरीवाल को कडी फटकार लगाते हुए आज चेतावनी दी कि अगर उन्होंने आर्दश आचार संहिता का उल्लंघन करना तुरंत बंद नहीं किया तो उनके खिलाफ कडी कार्रवाई की जाएगी। चुनाव आयोग ने कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी .भाजपा. की शिकायत पर श्री केजरीवाल को लोगों को रिश्वत लेने के लिए उकसाने के आरोप में नोटिस जारी किया था। श्री केजरीवाल ने जवाब में कहा था कि उन्होंने मतदाताों को रिश्वत लेने के लिए कभी भी प्रोत्साहित नहीं किया बल्कि अपनी अपील से इसके खिलाफ काम किया है। आयोग ने श्री केजरीवाल के बयान को आर्दश आचारसंहिता. भारत दंड संहिता और जन प्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों का उल्लंघन माना है और उन्हें चेतावनी दी है कि वह सभी तरह के चुनाव प्रचार के दौरान ऐसे बयानों से बचें।
आयोग ने श्री केजरीवाल को चेतावनी दी कि उन्होंने यदि फिर से इस तरह के बयान दिए तो उनके खिलाफ कडी कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने कहा कि बार..बार के नोटिस और 23 जनवरी के आदेश के बाद भी वह इस तरह की बयानबाजी करते रहे हैं। आयोग ने साम्प्रदायिकता फैलाने के आरोप लगाने की भाजपा की शिकायत पर अपने पिछले आदेश में श्री केजरीवाल को फटकार लगाते हुए भविष्य में अपने चुनाव भाषणों में सावधानी बरतने को कहा था। श्री केजरीवाल ने 18 जनवरी को उत्तम नगर की एक जनसभा में कहा था ..चुनाव का टाइम है.पैसे देने भी आएंगे। दोनों पार्टियां आएंगी। बीजेपी वाले भी. कांग्रेस वाले भी। पैसे देने आएं.. मना मत करना। ले लेना। दोनों की पार्टियों से ले लेना। अपना ही पैसा लूट रखा है इन्होंने। किसी ने 2जी में लूट लिया. किसी ने कोयले में लूट लिया। कोई पार्टी न देने आए तो उनके दफतर जाकर ले लेना। कहना कि आए नहीं..इंतजार कर रहे थे आपका। दोनों पार्टियों से लेंगे पैसा लेकिन वोट आप को देंगे।..
कांग्रेस और भाजपा द्वारा उनके इस बयान की शिकायत किए जाने पर आयोग ने उन्हें नोटिस जारी किया। इसके बाद भी उन्होंने अपना बयान दोहराया था जिस पर आयोग ने उन्हें फिर एक नोटिस भेजा था। श्री केजरीवाल ने अपने जवाब में कहा कि उनके बयान का र्मम यह था कि जो पार्टियां चुनाव में पैसा दें उससे पैसा ले लो लेकिन उन्हें वोट बिल्कुल मत दो। इस तरह उन्होंने रिश्वतखोरी रोकने का काम किया है और ऐसा करके एक तरह से आयोग की ही मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि वह देश के संविधान. कानून तथा चुनाव आयोग की बहुत इज्जत करते हैं और किसी भी हालत में कोई कानून नहीं तोडेंगे। उन्होंने कहा था कि उनकी दलीलों के बावजूद यदि आयोग को उनकी अपील गलत लगती है तो वह आर्दश चुनाव आचारसंहिता लागू रहने तक इस तरह की अपील नहीं करेंगे।

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