दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोयला अध्यादेश के प्रावधानों के खिलाफ पूर्व कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल की कंपनी जेएसपीएल द्वारा दायर याचिका पर केंद्र को आज नोटिस जारी कर जवाब मांगा। कंपनी ने कोयला मंत्रालय के आदेश व अध्यादेश के उन प्रावधानों को चुनौती दी है जिसके तहत छत्तीसगढ़ और ओडिशा में कोयला ब्लाकों के कोयले का अंतिम उपयोग इस्पात की जगह बिजली क्षेत्र के लिए करने की अनुमति दी गई है।
न्यायमूर्ति बदर र्दुज अहमद और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने जिंदल स्टील एंड पावर और नवीन जिंदल की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोयला मंत्रालय को नोटिस जारी कर उससे पूछा है कि अंतिम उपयोग क्यों और कहां बदला गया। सुनवाई के दौरान नवीन जिंदल अदालत में मौजूद थे।
याचिकाकर्ताओं ने मंत्रालय के 18 दिसंबर के आदेश और कोयला अध्यादेश के प्रावधानों को दरकिनार करने की मांग की है जिसमें संबंधित कोयला ब्लाक के अंतिम उपयोग को स्टील की जगह बिजली कर दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी। जेएसपीएल ने अपनी याचिका में दलील दी है कि उसे ओडिशा में इस्पात संयंत्र एवं छत्तीसगढ़ में स्पंज आयरन उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए इन दोनों राज्यों में कोयला ब्लॉक आबंटित किए गए थे।
कोयला ब्लाकों का आवंटन 25 अगस्त और 24 सितंबर 2014 को जारी आदेशों के तहत उच्चतम न्यायालय द्वारा रदद किए जाने के बाद सरकार ने कोयला खान (विशेष प्रावधान) अध्यादेश 2014 जारी किया है। इस अध्यादेश के तहत केंद्र को कोयला ब्लाकों को नीलाम करने का अधिकार है।

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