जल्द ही आपको मोबाइल और इंटरनेट के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। क्योंकि सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के लिए फंड जुटाने का भार टेलीकॉम कंपनियों पर पड़ने वाला है। वहीं टेलीकॉम कंपनियों का भार सीधे-सीधे उसके यूजर्स पर पड़ेगा।
दरअसल सरकार स्वच्छ भारत अभियान के लिए फंड जुटाने को टेलिकॉम सर्विसेज पर उपकर लगाने पर विचार कर रही है। इस बारे में अटॉर्नी जनरल (एजी) की सलाह मांगी गई थी। एजी ने दूरसंचार विभाग को दी कानूनी सलाह में स्पेक्ट्रम पर स्वच्छ भारत उपकर नहीं लगाने की बात कही, क्योंकि यह गैरकानूनी है। लेकिन उन्होंने कहा कि वित्त अधिनियम में संशोधन कर दूरसंचार सेवाओं पर उपकर लगाया जा सकता है।
एक आधिकारिक सूत्र के मुताबिक एजी ने कहा कि दूरसंचार विभाग पर स्वच्छ भारत कोष के लिए सरकारी आदेश द्वारा उपकर लगाना संभव नहीं है। इसके लिए कानूनी समर्थन जरूरी है। दूरसंचार विभाग ने एजी से सलाह मांगी थी कि क्या भारतीय टेलिग्राफ एक्ट के तहत सरकारी आदेश के जरिए स्पेक्ट्रम प्रयोग शुल्क पर स्वच्छ भारत उपकर लगाना कानूनी रूप से तर्कसंगत है। इस पर एजी ने कहा कि बिना कानून के उपकर लगाना संविधान की धारा 265 के प्रतिकूल है। इस उपकर का दूरसंचार इंडस्ट्री की बॉडी सीओएआई ने विरोध किया है।
सीओएआई के डायरेक्टर जनरल राजन एस मैथ्यू का कहना है कि हम इसके पक्ष में नहीं है। यह उपभोक्ताओं पर भार डालेगा और सरकार के उचित मूल्यों पर सेवा देने के एजेंडे के खिलाफ होगा। विशेषकर जबकि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रांडबैंड और इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने की बात कर रही है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें