श्रीलंका की नयी सरकार इस बात की जांच करायेगी कि क्या लंबे समय तक राष्ट्रपति रहे महिंदा राजपक्षे ने हार का एहसास होने पर सत्ता में बने रहने के लिए सेना की मदद मांगी थी। श्रीलंका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरीसेना के प्रवक्ता मंगला समरवीरा ने कल कहा ..नयी कैबिनेट जिस पहली चीज की जांच करायेगी वह है पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे द्वारा तख्तापलट की कोशिश की साजिश एवं इस बात की भी जांच कराई जायेगी की क्या अन्य देश के नेताओं ने भी उन्हें बरगलाया था. श्री समरवीरा ने कहा..लोग सोचते हैं कि यह शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन था लेकिन यह कुछ और ही मामला था।कुछ वैश्विक नेताओं ने भी श्री राजपक्षे को शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण से बरगलाने की कोशिश की लेकिन यह कहना मुश्किल है कि किन.किन नेताओं ने उनसे बात की. इससे पहले नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के मुख्य प्रवक्ता राजीत सेनारत्ने ने कहा था कि श्री राजपक्षे ने चुनाव हारने के बाद सेना प्रमुख लेफि्टनेंट दया रत्नायके पर सैनिकों को तैनात करने का दबाव डाला था। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख पर सैनिकों की तैनाती का गहरा दबाव था लेकिन वह नहीं झूके.
श्री रत्नायके ने कहा कि सेना प्रमुख ने कुछ भी गैरकानूनी कार्य करने सं इन्कार कर दिया।श्री राजपक्ष्ो ने अंतिम क्षण तक अपने पद में बने रहने का प्रयास किया लेकिन जब उन्हें यह एहसास हो गया कि उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है तब उन्होंने हटने का फैसला किया। श्री रत्नायके ने कहा ..हम सेना प्रमुख .पुलिस महानिरीक्षक और चुनाव आयुक्तों के सही बात पर अडिग रहने के लिए प्रशंसा करते हैं 1वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखने के लिए अडे रहेंं। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रमुख इस सैन्य हस्तक्षेप में हिस्सेदार नहीं बनना चाहते थे और सेना प्रमुख भी उनके साथ थे 1अटार्नी जनरल ने भी चेताया था कि इसके खतरनाक दुष्परिणाम होंगे. इस पूरे मामले पर श्रीलंकाई सेना ने अभी तक कोई बयान नहीं दिया है वहीं श्री राजपक्षे के प्रवक्ता ने इस दावे को बेबुनियाद करार दिया है ।

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