जेएनयू के छात्रों ने जाना गांवों का हाल - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

सोमवार, 12 जनवरी 2015

जेएनयू के छात्रों ने जाना गांवों का हाल

  • परम्पराओं और लोक रीति से लेकर महिला शिक्षा और कृषि के तौर-तरीको तक पर की खुली बहस 
  • 45 छात्रों का अध्ययन दल देश के 17 राज्यों का कर चुका है प्रतिनिधित्व 
  • बनारस के तीन गावों का अब तक एकत्र कर चुके है ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विकास के कारण व हो रहे बदलाव पर सार्थक आंकड़े 


वाराणसी (सुरेश गांधी )। काशी के चैबेपुर-कैथी स्थित आशा ट्रस्ट के प्रशिक्षण केंद्र पर दो साप्ताहिक अध्ययन प्रवास के दौरान रविवार को दिल्ली से आएं जवाहर लाल विश्व विद्यालय के अध्ययन दल के छात्र-छात्राओं ने ग्राम भंदहाकला प्राथमिक विद्यालय परिसर में जुटे ग्रामीणों की समस्याओं से रु-ब-रु होते हुए गांव की बारीकिया भी जानी कि किस तरह गांव की समस्याओं को दूर कर विकसित किया जा सकता है। इस दौरान ग्रामीणों ने भी उनका पूरा साथ दिया। ग्रामीणों ने सामूहिक खुली बैठक में गाँव की विशेषताओं और समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान परम्पराओं और लोक रीति से लेकर महिला शिक्षा और कृषि के तौर-तरीको तक पर बहस की गयी। 

jnu-student-visit-varanasi-villege
बताया गया कि पिछली पीढ़ी के लोगों  ने गाँव की आपसी सामंजस्य और मेल मिलाप की परम्परा को किस तरह कायम रखते रहे। हरित क्रांति के प्रभाव और कृषि के बदले तरीको के कारण तथा बेतहाशा रासायनिक उर्वरको एवं हाइब्रिड बीज के प्रयोग से घटती उपज की भी बात हुयी। पशुपालन में दिनोदिन कमी के कारण कम्पोस्ट खाद की उपलब्धता कम हुयी है। शिक्षा के स्तर में वृद्धि और भौतिकता के प्रभाव से परिवारों का टूटन और संयुक्त परिवारों का लगातार एकल परिवारों में बदलने के कारण सामजिक सुरक्षा में होती कमी भी महसूस की गयी। भंदहाकला गाँव की प्रमुख समस्याओं पर चर्चा के दौरान गाँव में उचित मार्ग की कमी, स्ट्रीट लाईट, जल निकास की समस्या और सिंचाई के नहर की क्षमता कम होना,सरकारी स्कूल में बिजली का कनेक्शन न होना जैसे बिदु उभर कर सामने आये। 

बैठक में चर्चा के दौरान लोगों ने स्वीकार किया गाँव में लोकरीति आधारित सार्वजनिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रति क्रमशः आमजन की अरुचि के वजह से आज मेला, दंगल, रामलीला जैसे कार्यक्रम कम ही हो पाते हैं इनका स्थान टीवी, इंटरनेट, मोबाइल आदि ने ले लिया ह।ै इस कारण सामूहिकता और प्रेम परस्पर के भाव में भारी कमी हुयी है। उपस्थित लोगो ने खुल कर यह भी स्वीकार किया कि पंचायतों में धन की उपलब्धता अधिक होने के कारण पंचायती चुनाव आज अखाड़ा बन गये है जिससे आपसी वैमनस्य बढ़ा है और गाँव के लोगों में जाति, टोले के भावना के साथ बिखराव हुआ है। इसके पूर्व जेएनयू नेत्रित्वकर्ता प्रो बी के चैधरी ने बताया कि 45 छात्रों का यह अध्ययन दल देश 17 राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहा है और विभिन्न भाषाओँ तथा संस्कृति से जुड़े छात्र-छात्राए यहाँ आये हुए है। उन्होने बनारस के तीन गावों में आकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विकास के कारण हो रहे बदलाव पर काफी सार्थक आंकड़े एकत्र किये हैं जो निस्संदेश भविष्य में नीतियां बनाने वाले लोगो के लिए सहायक होगा। आशा ट्रस्ट के समन्वयक वल्लभाचार्य पाण्डेय ने क्षेत्र की भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक और  सांस्कृतिक विशेषताओं और यहाँ उपलब्ध संसाधनों के बारे में विस्तार से बताया। बैठक में प्रमुख रूप से घनश्याम सिंह, तेरसू यादव, डा रामाज्ञा शशिधर, बनवासी यादव, गजानंद पाण्डेय, नागेन्द्र सिंह, नामवर सिंह, आशीष सिंह, उदयभान सिंह, प्रवीण, रामलाल सिंह, नारायण गोस्वामी, जगत सिंह, त्रिलोकी, सुरेश यादव , प्रदीप सिंह, सूरज, कैप्टन राजीव पाण्डेय, कल्पनाथ, जीतेन्द्र तनुश्री, प्रफुल्लित, सोमदत्त , शोभिका, निवेदिता आदि मौजूद थे। 

कोई टिप्पणी नहीं: