मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने शनिवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव से मुलाकात की। सके बाद कयासों का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष से दोनों नेताओं की इस मुलाकात के बाद पार्टी के गुटों में हल चल है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के बयानों ने कयासों को और बल दिया है। क्योंकि शरद यादव से मिलने के बाद प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने भी स्वीकारा कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसका पार्टी पर भी बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सारे घटनाक्रम से राष्ट्रीय अध्यक्ष को अवगत करा दिया गया है।
इसके कुछ देर बाद ही मुख्यमंत्री भी शरद यादव से मुलाकत करने पहुंचे। शुक्रवार को जीतन राम मांझी ने एक सभा में कहा, ' हम कब फेंका जाएंगे पता नहीं। बहुत मीटिंग और सिटिंग चल रही है। यह सब हमें उखाड़ फेंकने के लिए किया जा रहा है।' इससे पहले सरकार के एक मंत्री श्याम रजक ने मुख्यमंत्री का विरोध करते हुए अपने आवास पर नीतीश समर्थक मंत्रियों के लिए दावत दी थी। इससे मुख्यमंत्री और उनके समर्थकों को दूर रखा गया था।
जदयू के पार्टी प्रवक्ता ने भी मुख्यमंत्री और उनके कई मंत्रियों पर हमला करते हुए कहा था कि इन लोगों को पार्टी छोड़कर भाजपा में चले जाना चाहिए। इसके बाद से ही जदयू में घमासान मचा हुआ है। भाजपा ने मांझी को बिना शर्त समर्थन देने की बात कही है। शुक्रवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी बिहार की बदहाली के लिए लालू, नीतीश पर तो जमकर बरसे, लेकिन मांझी का नाम तक नहीं लिया।
इसके कुछ देर बाद ही मुख्यमंत्री भी शरद यादव से मुलाकत करने पहुंचे। शुक्रवार को जीतन राम मांझी ने एक सभा में कहा, ' हम कब फेंका जाएंगे पता नहीं। बहुत मीटिंग और सिटिंग चल रही है। यह सब हमें उखाड़ फेंकने के लिए किया जा रहा है।' इससे पहले सरकार के एक मंत्री श्याम रजक ने मुख्यमंत्री का विरोध करते हुए अपने आवास पर नीतीश समर्थक मंत्रियों के लिए दावत दी थी। इससे मुख्यमंत्री और उनके समर्थकों को दूर रखा गया था।
जदयू के पार्टी प्रवक्ता ने भी मुख्यमंत्री और उनके कई मंत्रियों पर हमला करते हुए कहा था कि इन लोगों को पार्टी छोड़कर भाजपा में चले जाना चाहिए। इसके बाद से ही जदयू में घमासान मचा हुआ है। भाजपा ने मांझी को बिना शर्त समर्थन देने की बात कही है। शुक्रवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी बिहार की बदहाली के लिए लालू, नीतीश पर तो जमकर बरसे, लेकिन मांझी का नाम तक नहीं लिया।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें