अपने बयानो के कारण अक्सर विवादो में घिरने वाले बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने आज अपने आलोचकों पर कटाक्ष करते हुये कहा कि सबकुछ सीखा हमने ना सीखी होशियारी सच है दुनिया वालो कि हम है अनाड़ी. श्री मांझी ने यहां श्रीकृष्ण स्मारक भवन में एस.के मंडल गु्रप ॉपं इंस्टीच्यूसंस के स्थापना दिवस समारोह मे कहा कि वह कोई विद्वान नहीं है । उन्होंने अपने जीवन में जो कुछ देखा है उसी के आधार पर बोलते है । उन्होंने कहा कि उसी पर लोगों में चर्चा होने लगती है और वही चर्चा उन्हें चर्चित बना देती है । मुख्यमंत्री ने समारोह में मौजूद पारा मेडिकल छात्रश छात्राों से कहा कि एसी करनी कर चलो तू हंस जग रोये. उन्होंने कहा कि सेवा को अपना धर्म बनाना चाहिए. वह भी सबकी सेवा करने की इच्छा रखते है । सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म कहा जाता है । दूसरों की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है दूसरों को दुख देने से बड़ा कोई पाप नहीं है ।
श्री मांझी ने कहा कि निजी क्षेत्र में बेहतर काम हो रहा है लेकिन दुख की बात है कि सरकारी क्षेत्र में वही काम चौपट हो जाता है । उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारी शिक्षक को 40 हजार रूपया वेतन मिलता है जबकि निजी स्कूल के शिक्षक को मात्र 10 हजार रूपया ही मिलता है । बावजूद इसके सरकारी स्कूल के शिक्षक समय पर स्कूल नहीं आते और न ही पढ़ाई पर ध्यान देते है । इसी का नतीजा है कि सरकारी स्कूल से बच्चे ठीक से क ख ग भी नहींजानते जबकि निजी स्कूल के बच्चे तीसरी कक्षा में ही अंग्रेजी बोलने लगते है । मुख्यमंत्री ने बातशबात पर आंदोलन करने वाले सरकारी र्कमियों को सरकार की मजबूरी और राज्य की आर्थिक स्थिति को समझने की नसीहत देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार ने बिहार का 20 हजार करोड़ रूपया काट लिया है । उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का र्दजा मिल जाता तो किसी को नारा.प्रर्दशन और जुलूस निकालने की जरूरत नहीं होती .सरकार सबकी मांगे पूरी कर देती. श्री मांझी कहा कि बिहार में जितनी तकनीकी शिक्षण संस्थान होनी चाहिए थी उतनी नहीं है । राज्य सरकार इस कमी को दूर करने में लगी है । उन्होंने कहा कि निजी और सरकारी क्षेत्र के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना जगनी चाहिए तभी दोनोंतरफ अच्छे माहौल बनेंगे और अच्छी प्रतिभाऐं निकल कर सामने आयेंगी 1 शिवा राम 2040 वार्ता
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