बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की कार्यशैली से उनके मंत्री खुश नहीं - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

बुधवार, 21 जनवरी 2015

बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की कार्यशैली से उनके मंत्री खुश नहीं


बिहार में मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के अपने ही कैबिनेट के कई मंत्री उनसे खुश नहीं हैं, मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में जब कुछ मंत्रियों ने तबादले की प्रक्रिया पर सवाल बुधवार शाम को उस समय उठाए जब कई मंत्री एक अपने सहयोगी श्याम रजक के घर पर भोज के लिए जुटे थे। इस भोज की खास बात यह रही कि मांझी से नजदीकी रखने वाले किसी मंत्री को न आमंत्रित किया गया, और न वे गए। फिलहाल मांझी से करीबी रखने वाले लगभग आठ मंत्री हैं, और लगभग 20 से 24 मंत्री उनसे, खासकर उनकी कार्यशैली से, खुश नहीं हैं। हालांकि भोज में सभी 24 मंत्री मौजूद नहीं थे, लेकिन भोज के इस दौर से साफ है कि अगर मांझी ने आने वाले दिनों में अपनी कार्यशैली नहीं बदली, तो शायद उनकी गद्दी बचना मुश्किल है।

सूत्रों की मानें तो मांझी अपने से मिलने वाले हर नेता से यही कहते हैं कि चाहे लालू यादव हों या नीतीश कुमार या शरद यादव, वह उनके सामने झुकने वाले नहीं। इसके पीछे उनकी राजनैतिक समझ है कि अब जनता दल यूनाइटेड से उन्हें कुछ खास राजनैतिक लाभ नहीं होने वाला और अगर वह अपने बागी तेवरों पर कायम रहे तो न केवल बिहार की राजनीति में, बल्कि बीजेपी के लिए भी बहुत बड़े 'एसेट' साबित हो सकते हैं। लेकिन फिलहाल राजनैतिक जानकारों की मानें तो जब तक राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड का विलय नहीं होता, मांझी की कुर्सी बची रहेगी।

कोई टिप्पणी नहीं: