मित्तल, रुईया को तलब करने संबंधी आदेश खारिज - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 9 जनवरी 2015

मित्तल, रुईया को तलब करने संबंधी आदेश खारिज

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भारती सेल्यूलर लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) सुनील भारती मित्तल और एस्सार समूह के प्रवर्तक रवि रुईया को आज उस वक्त बड़ी राहत मिली जब उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के शासन काल में अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आरवंटन से संबंधित मामले में उनके आरोपी के तौर पर पेश होने के निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया। मुख्य न्यायाधीश एच एल दत्तू और न्यायमूर्ति ए के सिकरी की खंडपीठ ने निचली अदालत के समन आदेश के खिलाफ श्री मित्तल और श्री रुईया की अपील मंजूर कर ली और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि निचली अदालत का समन तय अदालती प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। हालांकि उसने स्पष्ट कर दिया कि आरोप से संबंधित पुख्ता तथ्य और दस्तावेज जब कभी सामने आएंगे. दोनों को तलब किया जा सकेगा। न्यायालय ने गत वर्ष चार दिसम्बर को इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। श्री मित्तल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता फली. एस. नरीमन ने दलील दी थी कि विशेष अदालत ने उनके मुवक्किल को सम्मन जारी करके गलती की है क्योंकि आरोप पत्र में उन्हें आरोपी के रू प में नामित नहीं किया गया था।

 श्री नरीमन ने दलील दी थी कि सीबीआई के सहायक विधिक सलाहकार ने कहा था कि सिर् लोकसेवकों को ही आरोपी बनाया जायेगा। उस समय सीबीआई के तत्कालीन निदेशक एपी सिंह ने कहा था कि कंपनियों को भी आरोपी बनाया जा सकता है. पर विशेष न्यायाधीश ने एक कदम आगे बढकर श्री मित्तल को आरोपी के रू प में तलब कर लिया। उन्होंने कहा था कि प्रबंध निदेशक को कंपनी के किसी आपराधिक कृत्य के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता जब तक कि उसके खिलाफ साक्ष्य न. न हो। उन्होंने कहा कि तत्कालीन संचार मंत्री प्रमोद महाजन और तत्कालीन संचार सचिव श्यामल घोष के साथ श्री मित्तल की बैठकों को लेकर कथित दावे में कुछ भी अनोखा नहीं है। हालांकि सीबीआई के वकील के.के. वेणुगोपाल ने दलील दी थी कि आरोप पत्र में नाम न.न होने के बावजूद दोनों को आरोपी बनाया जा सकता है. क्योंकि उनकी कंपनी उनके इशारे पर ही काम कर रही थी। श्री वेणुगोपाल ने यह भी कहा था कि किसी कंपनी में हो रहे भ्रष्टाचार को उसके मालिक से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा था कि श्री रुईया के खिलाफ बहुत अधिक साक्ष्य तो नहीं हैं. लेकिन जांच एजेंसी सबूत इकट्ठा कर लेगी। निचली अदालत ने 19 मार्च 2013 को श्री मित्तल और श्री रुईया को पेश होने के लिए तलब किया था।

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