श्रीलंका में राष्ट्रपति पद के लिए कल हुए चुनाव के बाद मतगणना में काफी पीछे चल रहे निवर्तमान राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने आज अपनी पराजय स्वीकार कर ली। श्री राजपक्षे के एक करीबी सहयोगी तथा वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा हमारे पास कोई अच्छी खबर नहीं है। मुझे लगता है कि जनता बदलाव चाहती है और यही लोकतंत्र है। राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया कि श्री राजपक्षे ने विपक्ष के एक नेता से मुलाकात करके अपने विपक्षी मैथरीपाल सीरीसेना की विजय स्वीकार कर ली है। यह खबर फैलते ही राजधानी कोलंबो में आतिशबाजी होने लगी तथा पटाखे चलने की तेज आवाजे सुनाई देने लगी। निर्वाचन आयोग ने बताया है कि अभी तक 32 लाख 60 हजार मतों की गणना हो चुकी है जिसमें सीरीसेना को 51.3 प्रतिशत तथा राजपक्षे को 46.9 प्रतिशत मत प्राप्त हुए है।
श्री राजपक्षे की सरकार में शामिल रहे पूर्व मंत्री सिरीसेना नवंबर में सरकार से बाहर हो गए थे और उसके बाद से यह विपक्ष की ओर से एक मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। सिरीसेना.63. ने देश में भ्रष्टाचार समाप्त करने तथा।00 दिनों के भीतर राष्ट्रपति के विशेष अधिकारों को समाप्त करके देश में संसदीय लोकतंत्र बहाल करने की बात की है जिसके तहत न्यायपालिका. पुलिस तथा कार्यपालिका एक स्वतंत्र संस्थान होंगे। सिरीसेना ने राष्ट्रपति को असीमित अधिकार देने वाले संविधान के 18वें संशोधन को हटाने में भी रूचि दिखाई है। राष्ट्रपति के संयोजक विजयानंदा हिराथ ने बताया कि श्री राजपक्षे ने रानिल विक्रमसिंघे से मुलाकात कर सत्ता के निर्विध्न हस्तांतरण की बात की है। सिरीसेना की ताजपोशी आज की जा सकती है। एक दशक तक राष्ट्रपति के पद पर आसीन रहे श्री राजपक्षे ने तय समय से दो वर्ष पूर्व ही चुनाव करा दिए थे लेकिन उनकी गिरती लोकप्रियता का पूरा फायदा सिरीसेना को मिला।

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