नरकटियागंज (बिहार) की खबर (14 जनवरी) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 15 जनवरी 2015

नरकटियागंज (बिहार) की खबर (14 जनवरी)

सीमा पर गैर कानूनी गतिविधियों को रोकने में सक्षम है एसएसबी: राकेश
  • सीमा पर जागते हैं जवान, तो सोती है चैन की नींद आवाम: पलाण्डे
  • एसएसबी 27 वीं वाहिनी का 9 वाँ स्थापना दिवस सम्पन्न

narkatiaganj news
नरकटियागंज(अवधेश कुमार शर्मा) भारत नेपाल की खुली सीमा पर 27 वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल की तैनाती के 8 वर्ष पूरा होने तथा 9 वें स्थापना दिवस पर एक वृहद् समारोह का आयोजन किया गया। जिसके मुख्य अतिथि बाबासाहेब भीम राव अम्बेदकर बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति पण्डित प्रभाकर पलाण्डे ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब सीमा पर जवान जागते है तो देश की आवाम चैन की नींद सोती है। इसलिए जवानों का शिक्षित होना बहुत ज्यादा आवश्यक है। इसलिए नरकटियागंज के टी.पी. वर्मा काॅलेज में जवानों के लिए दूरस्थ शिक्षा केन्द्र की एक इकाई का गठन शीघ्र कर दिया जाएगा। श्री पलाण्डे ने कहा कि सशस्त्र सीमा बल के जवानों की शिष्टता और अनुशासन अनुकरणीय हैै। उनके सम्मान में गार्ड आॅफ आॅनर पेश किया गया तत्पश्चात परेड में जवानों ने अपनी धैर्य कला का परिचय दिया। इसके पूर्व प्रभाकर पलांडे, सेनानायक राकेश कुमार, संजय कुमार, डाॅ. समीत सुपाकर और सहायक सेनानायक दीपक कुमार ने विधिवत स्थापना दिवस का शुभारंभ किया। सेनानायक राकेश कुमार ने अपने प्रतिवेदन में कहा कि सशस्त्र सीमा बल का उद्देश्य सेवा, सुरक्षा और बन्धुत्व है। राकेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि एसएसबी की स्थापना नार्थ फ्रण्टियर एरिया(नेफा) के इलाकों को देश की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए की गयी। 1962 के चीन युद्ध के उपरान्त सीमावर्ती लोगो में राष्ट्रीय सुरक्षा की भावना विकसीत करने और किसी बाहरी आक्रमण का सामना करने के लिए एसएसबी को तैयार किया गया। भारत सरकार ने एसएसबी के कार्याे को देखते हुए, उसकी भूमिका में 2001 में काफी बदलाव किया और नाम भी बदल सशस्त्र सीमा बल कर दिया, जिस नाम से आज हमें जाना जाता है। भारत नेपाल की खुली सीमा की जवाबदेही एसएसबी को सौंपते हुए रक्षा मंत्रालय से गृहमंत्रालय के अन्तर्गत कर दिया गया। एसएसबी के कार्याें को देखते हुए गृहमंत्रालय ने भारत-भूटान की सीमा पर भी तैनाती कर दी। सीमा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार 20 अतिरिक्त वाहिनी की स्थापना की जिसके कारण 27 वीं वाहिनी की स्थापना 14 जनवरी 2006 को हुई। उसके बाद से एसएसबी निरंतर आगे बढता रहा हैं। भारत-नेपाल सीमा पर तैनाती के बाद से बटालियन ने 490 करोड़ से अधिक मूल्य की नारकोटिक्स, एफआईसीएन और काॅन्ट्राबैण्ड आइटम्स जिसमें गाँजा और चरस मुख्य रूप से शामिल है, जब्त करते हुए 469 व्यक्तियों को हिरासत में लेकर संबंधित विभाग को सौंपा है। इस उल्लेखनीय कार्य के लिए बटालियन 27 वीं को वर्ष 2009-2010 के सर्वश्रेष्ठ बटालियन संचालन का पुरस्कार गृहमंत्रालय ने दिया। इसी कड़ी में वर्ष 2014 में 27 वीं बटालियन के जवानों ने करीब 6 करोड़ 80 लाख रूपये मूल्य के नारकोटिक्स, एफआईसीएन और काॅन्ट्राबैण्ड आइटम्स बरामद करते हुए 56 लोगों को हिरासत में लिया। इन कार्याें के अलावे सभी बाॅर्डर पर एसएसबी की तैनाती से तस्कर क्षेत्र से फरार हो गये है, फिर भी जिन्होने हिमाकत की उन्हें हिरासत में हमारे जवानों ने लिया। सरकार के निर्देशों पर एसएसबी ने लोकसभा, विधानसभा के अलावे उपचुनाव को कराने में सफलता पाई हैं। असम के कोकड़ाझार में उत्पन्न उग्रवादी घटना के बाद एसएसबी ने वहाँ 5 माह काम कर उसपर काबू पाया। बन्धुत्व के क्षेत्र में काम करते हुए एसएसबी जवानों ने निःशुल्क मानव चिकित्सा, पशु चिकित्सा, शैक्षिक भ्रमण और सामुदायिक कल्याण के कार्य को अंजाम दिया। 27 वीं बटालियन के एनजीओ स्माईल ट्रेन ने कट-होट व तालु वाले बच्चों का निःशुल्क इलाज कराया। प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत एसएसबी की 27 बटालियन ने अपने सहयोग से 5522 खाता खोलवा चुकी है। उसके बाद स्थापना दिवस पर एसएसबी के जवानों ने असम का बिहू, पंजाब का भांगडा और बिहार के भोजपुरी गीतों पर अपने नृत्य प्रस्तुति से उपस्थित जवानो व अतिथियों को मन्त्रमुग्ध कर दिया। बच्चों का जिलेबी दौड़, महिलाओं की चेयर रेस के अलावे विभिन्न प्रकार के व्यंजन और अन्य स्टाॅल का उद्घाटन मुख्य अतितिथ बीआरए बिहार विश्व विद्यालय के कुलपति पण्डित प्रभाकर पलांडे ने किया। मौके पर एसएसबी के सेनानायक राकेश कुमार, सहायक सेनानायक संजय कुमार, दीपक कुमार, डाॅ समीत सुपाकर और टीपी वर्मा काॅलेज के प्राचार्य प्रो विनोद वर्मा विशेष तौर पर दिखे।

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