पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने जबरन नपुंसक बनाने के मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो .सीबीआई. से जांच कराने के एकल खंडपीठ के फैसले के खिलाफ की गई अपील पर डेरा सच्चा सौदा को आज तत्काल कोई राहत प्रदान न करते हुए इस मामले में सुनवाई 25 फरवरी तक स्थगित कर दी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.जे. वजीफदार और न्यायमूर्ति ए. जी.मसीह की खंडपीठ ने अपील सुनवाई करते हुए मामले की सीबीआई से जांच कराने के एकल खंडपीठ के पैं सले को तत्काल निरस्त करने के डेरा के अनुरोध को ठुकरा दिया। खंडपीठ ने इसके साथ ही सीबीआई और हरियाणा सरकार को भी इस सम्बंध में अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई 25 फरवरी तक स्थगित कर दी।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा में सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में 400 श्रद्धालुओं को यह कहते हुए नपुंसक बनाया गया था कि उन्हें सीधे ईश्वर की प्राप्ति होगी। इन्हीं श्रद्धालुओं में से एक हंसराज चौहान ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में मुकदमा र्दज कराया था जिसकी सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति के .कानन की एकल खंडपीठ ने गत 23 दिसम्बर को मामले की सीबीआई से जांच कराने के आदेश दिए थे। अदालत के आदेशों के बाद सीबीआई ने डेरा प्रमुख के खिलाफ कल मामला र्दज किया था। एकल खंडपीठ के इस फैसले को डेरा ने कल ही उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए इसे निरस्त करने का अनुरोध किया था। डेरा की दलील थी कि अगर कोई र्मजी से नपुंसक बनता है तो यह मानवाधिकार का हनन नहीं है।

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