पेट्रोल.डीजल की कीमतों में वांछित कमी नहीं होने से लोग नाराज - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 18 जनवरी 2015

पेट्रोल.डीजल की कीमतों में वांछित कमी नहीं होने से लोग नाराज

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वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई अभूतपूर्व गिरावट का लोगों को पूरा फायदा नहीं मिलने से राजनीतिक दलों और आम जनता  में खासी नाराजगी है और दिल्ली विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड सकता है । अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगातार गिर रही है । इस समय यह पिछले छह साल के सबसे  निचले स्तर पर हैं. यह  गत जून के 115 डालर प्रति बैरल की तुलना में 60 प्रतिशत तक गिरकर 45 डालर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है । लेकिन इसकी तुलना में देश में पिछले एक साल के दौरान पेट्रोल के दाम में करीब 19 प्रतिशत और डीजल के दाम 11 प्रतिशत ही कम हुए हैं. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने .यूनीवार्ता. से बातचीत में कहा कि सरकार ने जब इनके दाम नियंत्रण मुक्त कर दिए हैं और इन्हें बाजार पर छोड दिया है तो विश्व बाजार में आई कमी का पूरा फायदा लोगों को क्यों नहीं मिल रहा. लोग महंगाई से पहले ही त्रस्त हैं ऐसे में उनको मिलने वाले लाभ को नहीं देकर भाजपा उनकेा छल रही है । श्री शर्मा ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दाम में सरकार बहुत मामूली कमी कर रही है और बार.बार उत्पाद शुल्क में बढोंतरी करके लोगों से उनको मिलने वाला लाभ छीन रही है । कांग्रेस इसे दिल्ली विधानसभा के चुनाव में जोर शोर से उठायेगी और यह उसका एक प्रमुख मुद्दा होगा।

 मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो ने भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का पूरा फायदा लोगों को नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर की है । पार्टी ने कहा कि सरकार बार.बार उत्पाद शुल्क बढा रही है और सरकार को राजस्व की कमी है तो उसे कारपोरेट सेक्टर को करों में दी जाने वाली छूट को बंद करना चाहिए . लेकिन सरकार उत्पाद कर बढाकर जनता पर बोझ लाद रही है । सरकार ने पिछले चार बार में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में पौने आठ रुपए और डीजल में साढे छह रुपए प्रति लीटर की बढोतरी की है । इससे सरकार को 20 हजार करोड रुपए की प्राप्ति होगी. पेट्रोल.डीजल की कीमत में विश्व बाजार के दामों के अनुरुप कमी नहीं आने से दिल्ली के लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है । रेल मंत्रालय में काम करने वाली एक महिला ने कहा कि दाम जब बढाने होते हैं तो विश्व बाजार की कीमतों का हवाला दिया जाता है तो अब वहां गिरावट आने का फायदा हमें क्यों नहीं दिया जा रहा यह हमारे साथ नाइंसफी है । योजना भवन में काम करने वाले एक र्कमचारी ने कहा कि खाद्य वस्तुों की महंगाई से हम पहले ही बुरी तरह परेशान हैं 1 पेट्रोल और डीजल के दाम घटने का जो फायदा हमें मिलना चाहिए उसे भी छीना जा रहा है । र्कमचारी ने कहा कि डीजल की कीमतों में आई गिरावट के बावजूद आवश्यक जिंसों की महंगाई से निजात नहीं मिल पाई है जबकि डीजल के दाम बढाने का असर तुरंत सभी चीजों पर देखने को मिलता है । हालांकि पिछले साल एक जनवरी से अब तक राजधानी में पेट्रोल के दाम 13.52 रुपए प्रति लीटर कम होकर 44 माह बाद 60 रुपए प्रति लीटर से नीचे आये हैं 1 डीजल के दाम पिछले 20 माह के निचले स्तर पर हैं . लेकिन लोगों का कहना है कि जब हम अंतर्राष्ट्रीय बाजार के हिसाब से महंगे दाम चुकाते हैं तो फिर वहां आई गिरावट का फायदा हमें मिलना चाहिए.

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