कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने देश में विभिन्न क्षेत्रों में सावर्जनिक निजी भागीदारी .पीपीपी. माडल को निजीकरण का ही एक रूप बताते हुए इसे खत्म करने की जरूरत बतायी है और कहा है कि भूमि अधिग्रहण अध्यादेश भी निजीकरण की दिशा में एक कदम है। श्री द्विवेदी ने आज यहां संवाददाताों से बातचीत में कहा कि निजीकरण. विनिवेश तथा पीपीपी एक ही सिक्के के अलग-अलग पहलू हैं। उन्होंने कहा अंदाज अलग अलग है लेकिन तत्व एक है और भूमि अधिग्रहण अध्यादेश भी उसी दिशा में जाता है। कांग्रेस महासचिव ने पीपीपी को पिछले दरवाजे से निजीकरण करार देते हुये इसे खत्म करने की जरूरत बतायी लेकिन साथ ही कहा कि यह उनका निजी विचार है। उनका कहना था कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच उचित संतुलन होना चाहिये और दोनों के बीच स्वस्थ स्पद्र्धा होनी चाहिये।
इस बारे में पूछे जाने पर कि 2004 से 2014 तक केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने पीपीपी को विभिन्न क्षेत्रों में बढावा दिया और इस समय कई परियोजनाएं इसी आधार पर चल रही हैं. श्री द्विवेदी ने कहा कि इनके लिये जो भी उचित सुधारात्मक उपाय किये जा सकते हैं. किये जाने चाहिये। उल्लेखनीय है कि श्री द्विवेदी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर पहले भी पार्टी से अलग विचार व्यक्त करते रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पूर्व सरकारी नौकरियों में आरक्षण आर्थिक आधार पर दिए जाने की वकालत कर उन्होंने एक नयी बहस छेड दी थी। उन्होंने कहा था कि अनुसूचित जाति और जनजाति के अमीर लोगों को भी आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिये। उस समय पार्टी को उनके विचार से असहमति व्यक्त करते हुए स्पष्टीकरण देना पडा था।
भूमि अधिग्रहण अध्यादेश का कांग्रेस आधिकारिक रूप से विरोध कर रही है। उसका कहना है कि इस अध्यादेश के जरिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम का पूरा स्वरूप ही बदल दिया गया है और यह पूरी तरह किसान विरोधी है। पार्टी के महासचिवों की कल यहां इस अध्यादेश के संबंध में एक बैठक भी हुयी थी जिसमें इसके खिलाफ देशभर में विरोध करने का निर्णय लिया गया था। इसके तहत पार्टी चेतना अभियान चलायेगी जिसमें राज्य और जिला स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। इसके लिये सभी राज्यों में संचालन समिति गठित की जायेगी। इस अभियान में तेल की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी कमी के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल के दाम उस अनुपात में नहीं घटाये जाने और आम आदमी तथा किसानों तक उसका फायदा नहीं पहुंचाये जाने का मुद्दा भी उठाया जायेगा। इसके अलावा किसानों को उनकी उपज की उचित कीमत नहीं मिलने को भी मुद्दा बनाया जायेगा।

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