राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने नियंत्रण रेखा पर सीमा पार से संघर्ष विराम उल्लंघन की लगातार हो रही घटनाों और भारत के तटीय इलाके में घुसपैठ की हालिया कोशिश पर चिंता जताते हुए आज कहा कि सीमा की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाये जाने चाहिएं।श्री मुखर्जी ने यहां कहा भारत शांति और अहिंसा के प्रति वचनबद्ध है. लेकिन सीमा को लेकर हम लापरवाह नहीं हो सकते। नियंत्रण रेखा पर लगातार हिंसा और तटीय इलाके में घुसपैठ की हालिया घटनाएं गम्भीर चिंता का विषय हैं। हमें देश की आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा तथा सीमाई अखंडता अक्षुण्ण रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के वास्ते तैयार रहना होगा। वह विभिन्न राज्यों के राज्यपालों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये नववर्ष का संदेश दे रहे थे। राष्ट्रपति ने शांति और सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के खिलाफ चौकसी रखने की राज्य सरकारों से अपील भी की। राष्ट्रपति ने कहा संविधान की प्रस्तावना में देश के नागरिकों की विचारों की अभिव्यक्ति. मान्यताों. विश्वास और पूजा के अधिकार सुरक्षित रखने की घोषणा की गई है। संविधान के अनुच्छेदों (19 से 28) में इन अधिकारों की गारंटी सुनिश्चित की गई है।
विकास के मामले में राज्यपालों की भूमिका को लेकर संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची में किये गए उल्लेख का हवाला देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वाम अतिवाद के खात्मे के लिए न.न केवल विकास की रणनीति पर अमल किया जाना चाहिए. बल्कि इसका प्रतिकार भी किया जाना चाहिए। श्री मुखर्जी ने शिक्षा को विकास का आवश्यक अंग तथा दुरुस्त शिक्षा प्रणाली को प्रबुद्ध समाज का आधार स्तम्भ करार देते हुए राज्यपालों से अपील की कि वे शिक्षण संस्थानों की ओर विशेष ध्यान दें ताकि विद्यार्थी गुणवत्ता युक्त शिक्षा के साथ..साथ देशभक्ति. करुणा. ईमानदारी. सहनशीलता. र्कतव्यपरायणता एवं महिलाों के प्रति सम्मान के सांस्कृतिक मूल्य भी सीख सकें। पिछले वर्ष हुए आम चुनावों में एक पार्टी को बहुमत मिलने और केंद्र में स्थायी सरकार बनने का जिक्र करते हुए उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से देशवासियों की अपेक्षाों पर खरा उतरने के लिए एकजुट प्रयास करने की आवश्यकता भी जताई. उन्होंने कहा ..आइए हम 2015 को शांति. उन्नति और सौहार्द का वर्ष बनाएं।.. उन्होंने 2014 में नयी सरकार द्वारा शुरू किये गए स्वच्छ भारत अभियान. सांसद आर्दश ग्राम योजना. प्रधानमंत्री जनधन योजना. मेक इन इंडिया अभियान और डिजिटल इंडिया कार्यक्रम कर जिक्र करते हुए कहा कि इसका सफल क्रियान्वयन. बुद्धिमता और राज्यपालों के विशेष प्रयास जरूरी हैं।

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