उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड .बीसीसीआई. सेवा प्रदाता है और उसे क्रिकेट मैच रिकार्ड करने के लिए सर्विस टैक्स का भुगतान करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सर्विस टैक्स भुगतान करने के खिलाफ बीसीसीआई की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया। केन्द्रीय उत्पाद एवं सेवा कर अपीलीय प्राधिकरण .सीईएसटीएटी. ने 2006..10 की अवधि के दौरान मेचों को रिकार्ड करने के लिए बीसीसीआई. को 18 करोड का भुगतान करने का निर्देश दिया था। बीसीसीआई ने इस निर्देश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि उसने सिपर् मेचों को रिकार्ड करने के लिए स्टेडियम में कैमरे लगाए थे और कैमरा मैन तैनात किये थे। बोर्ड के वकील का कहना था कि बीसीसीआई कार्यक्रम निर्माता नहीं है इसलिए उस पर सर्विस टैक्स नहीं लगाया जा सकता।
बोर्ड के वकील ने जिरह में कहा ..एक शादी में माता.पिता शादी की रिकार्डिंग के लिए कैमरामैन लगाते हैं लेकिन उन पर सर्विस टैक्स नहीं लगाया जाता। इस पर दो सदस्यीय बेंच की अध्यक्षता कर रहे मुख्य न्यायाधीश एच एल दत्तू ने कहा बीसीसीआई सेवा प्रदाता है। यदि यह सर्विस नहीं हे तो और क्या है। बीसीसीआई जो करती है वह सेवा है।

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