भारतीय जनता पार्टी.भाजपा. की दिल्ली इकाई के पूर्व अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता के साथ चल रहे मानहानि के मामले में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को आज दिल्ली उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली। न्यायालय ने श्रीमती दीक्षित के निचली अदालत में हाजिर नहीं होने पर लगाये गए तीन लाख रुपये के जुर्माने को खत्म कर दिया. न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने इस मामले की सुनवाई करते हुए निचली अदालत के 30 अगस्त 2014 को श्रीमती दीक्षित पर लगाये गए तीन लाख रुपए के जुर्माने को निरस्त करते हुए कहा कि अदालत ने जुर्माना लगाने का कारण नहीं बताया। न्यायमूर्ति सिंह ने कहा.. मेरा मानना है कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए जुर्माना ठहरता नहीं है और इसलिए इसे खत्म किया जाता है ।..
दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह आदेश श्रीमती दीक्षित की उस याचिका पर दिया. जिसमें उन्होंने दलील दी थी कि यह आदेश उस समय दिया गया जब वह केरल की राज्यपाल थीं। पूर्व मुख्यमंत्री की तरफ से पेश वकील महमूद प्राचा ने दलील दी कि उनकी मुवक्किल ने जानबूझकर अदालत के आदेश की अवहेलना नहीं की थी। श्रीमती दीक्षित को राज्यपाल के पद से इस्तीफा देने के लिए कहा गया था और वह अपना काम पूरा करने में जुटी हुई थीं. जिसके कारण वह नहीं पेश हो सकीं। निचली अदालत ने तीन लाख रुपए की जुर्माना राशि में से दो लाख रुपया दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और एक लाख रुपए श्री गुप्ता को देने का आदेश दिया था।
श्रीमती दीक्षित ने श्री गुप्ता के खिलाफ मानहानि का मामला र्दज किया था जिसमें दिल्ली नगर निगम 2012 के दौरान भाजपा नेता पर पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ .असभ्य. भाषा का इस्तेमाल किये जाने का उल्लेख था। श्री गुप्ता ने श्रीमती दीक्षित पर आरोप लगाया था कि पूर्व मुख्यमंत्री की बिजली कंपनियों के साथ सांठगांठ है और वह उनकी मदद कर रही हैं।

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