निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक एनजीओ की याचिका पर ये फैसला सुनाया है। कोली की दया याचिका पिछले साल 27 जुलाई को राष्ट्रपति ने खारिज कर दी थी। इसके बाद उसे किसी भी समय फांसी दे दी जानी थी लेकिन कोली ने ऊपरी अदालत में गुहार लगाई और कोर्ट ने उसकी जान बख्श दी।
कोली की फांसी को उम्रकैद में तब्दील करने की मांग में दाखिल याचिकाओं पर मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई थी। मंगलवार को सुनवाई के बाद मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड एवं न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने फैसला लिखाना शुरू कर दिया था। आज वो फैसला सुनाया गया।
सुरेंद्र कोली व पीपुल्स यूनियन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स की जनहित याचिका में सुरेंद्र कोली की दया याचिका के निस्तारण में हुई देरी के आधार पर फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की गई थी। कहा गया था कि सुरेंद्र कोली की दया याचिका को निस्तारित करने में काफी समय लगा, वह असंवैधानिक है।
प्रदेश के महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह व शासकीय अधिवक्ता अखिलेश सिंह ने याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि सुरेंद्र कोली सीरियल किलर है ऐसे में तकनीकी आधारों पर या दया याचिका को तय करने में हुए विलंब के आधार पर उसे मिली फांसी की सजा को उम्रकैद में नहीं बदलना चाहिए। इसी तरह की दलील केंद्र सरकार के एडिशनल सॉलीसिटर जनरल अशोक मेहता ने भी दी थी।
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