आपदा प्रबंधन विभाग फिर फेल, मौसम विभाग को भी नहीं लगी बर्फीले तूफान की खबर
देहरादून,9 जनवरी। सूबे के आपदा प्रबंधन विभाग ने केदारनाथ आपदा के बाद भी कोई सबक नहीं लिया है। यही वजह है कि उच्च पर्वतीय क्षेत्र में इस तूफान की चपेट में आए लोगों की वक्त पर कोई मदद नहीं की जा सकी। लगभग आठ घंटे बाद सूचना राजधानी पहुंची तो सीएम की पहल पर अलर्ट जारी किया गया। इस मामले में आपदा प्रबंधन और मौसम विभाग दोनों ही पूरी तरह से फेल साबित हुए है। 16 जून 2013 को केदारनाथ में कुदरत ने कहर ढाया है। उस वक्त दो रोज तक इसकी सूचना ही सरकार को नहीं मिल सकी थी। मीडिया ने अपने तंत्र के आधार पर इसका खुलासा किया तो सरकार की ओर से बचाव और राहत कार्य शुरु किया था। उसी वक्त से कहा जा रहा है कि आपदा प्रबंधन विभाग को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। ताकि इस तरह की आपदा के वक्त लोगों को वक्त पर राहत दी जा सके। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया। विगत दिवस चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिलों के ऊंचाई वाले इलाकों में इस बर्फीले तूफान ने अपना कहर ढाया। इससे कोई जनहानि होने की खबर तो अब तक नहीं है, लेकिन लोगों का काफी नुकसान हुआ है। सैकड़ों मकानों के क्षतिग्रस्त होने की खबर है। अहम बात यह है कि इस तूफान के बारे में सरकार को लगभग आठ घंटे बाद ही जानकारी हो सकी। इन जिलों का आपदा प्रबंधन विभाग सोता रहा। किसी भी जिले से राज्य मुख्यालय को इस बारे में कोई इनपुट वक्त पर नहीं मिला। प्रभावित लोगों ने खुद ही किसी तरह से फोन करके इस बारे में सूचना दी तो सरकारी मशीनरी हरकत में आई। इसके बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश पर सात जिलों को अलर्ट जारी किया गया। प्रबंधन प्राधिकरण ने चार और पांच जनवरी को इस तरह के तूफान के आने की आशंका जाहिर की थी। इस पर राज्य मौसम विभाग ने इस तरह के किसी तूफान के आने की आशंका से ही इंकार कर दिया। नतीजा यह रहा है कि प्राधिकरण की चेतावनी को नजर अंदाज कर दिया गया। सवाल यह भी उठ रहा है कि राज्य मौसम विभाग क्या करता रहा। उसने प्राधिकरण की चेतावनी को तो गलत बताने में देरी नहीं की ,लेकिन सटीक अनुमान खुद भी नहीं लगा सका। माना जा रहा है कि अगर प्राधिकरण की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए ही कोई तैयारी कर ली गई होती तो लोगों को इस तूफान का सामना नहीं करना होता। सौभाग्य से कोई जनहानि नहीं हुई अगर दुर्भाग्यवश ऐसा कुछ हो जाता तो इसकी जिम्मेदारी किसके सर आती। बहरहाल, एक बार फिर साबित हुआ है कि राज्य में आपदा प्रबंधन विभाग ने न तो कोई तैयारी की है और न ही केदारनाथ आपदा से कोई सबक लिया है। इतना ही नहीं मौसम विभाग भी कारगर भूमिका नहीं निभा पा रहा है।
ग्रामीण उत्पादों को मार्केट उपलब्ध करवाना होगा तभी सुधरेगी गांवों की अर्थव्यवस्थाः मुख्यमंत्री
देहरादून 9 जनवरी,(निस)। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्रामीण उत्पादों को मार्केट उपलब्ध करवाना होगा। मशीनी प्रतियोगिता में टिके रहने के लिए हाथ के हुनर को निखारने की आवश्यकता है। शुक्रवार को एफआरआई में एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के तहत आयोजित कार्यशाला ‘‘स्वालम्बन की ओर’’ का शुभारम्भ करते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों व उत्पादक समूहों के मार्केट लिंकेज पर प्राथमिकता से काम करना होगा। आईफेड के फेज-दो को हमें अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के अंतिम अवसर की तरह लेना चाहिए। सीएम ने कहा कि एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना में योग्य व प्रतिबद्ध ऐसे लोगों को जोड़ा जाए जिनमें प्रबंधन की क्षमता हो। ग्रामीण व पर्वतीय क्षेत्रों में काम कर रहे स्वयं सहायता समूहों को इतना क्षमतावान बनाना होगा कि वे ना केवल स्वावलम्बी बन सकें बल्कि भविष्य में परियोजना के समाप्त होने पर विपरीत परिस्थितियों में भी अपना अस्तित्व बना कर रख सकें। सीएम ने कहा कि पूर्व में भी अनेक परियोजनाएं संचालित की गई हैं। हमें अतीत के अनुभवों से लाभ उठाकर सुनिश्चित करना होगा कि पहले की गई गलतियां फिर से ना हों। सरकारी स्तर पर ऐसी संस्थाओं के मार्केट लिंक बनाने में सहयोग किया जाएगा। पर्वतीय उत्पादों को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुसार विकसित करना होगा। केदारनाथ, बदरीनाथ, प्रमुख तीर्थ स्थलों व स्थान-स्थान पर लगने वाले मेलों में स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों के विपणन के अवसर उपलब्ध करवाए जाएं। सीएम ने कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य सचिव को निर्देशित किया कि ग्रामीण व पर्वतीय उत्पादों के समुचित विपणन के लिए कार्ययोजना बनाएं। उन्होंने कहा कि राज्य के हैंडीक्राफ्ट को संगठित रूप देना होगा। जलागम, आईफेड, जायका आदि परियोजनाओं में धन की कमी नहीं है। परंतु इन योजनाओं का औचत्यि तभी है जब इनके माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था व ग्रामीणों की आजीविका में सुधार ला सकें। स्थानीय लोगों के हाथ के हुनर पर ध्यान देने की जरूरत है। जायका, जलागम व आईफेड के लिए अलग-अलग क्षेत्र निर्धारित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया। साथ ही तीन प्रशिक्षण माॅड्यूलों का विमोचन व परियोजना की वेबसाईट को लांच किया। कार्यक्रम में विधायक हरबंस कपूर, विधायक गणेश गोदियाल, मुख्य परियोजना निदेशक विजय कुमार सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
गांधीजी के आदर्शों व सिद्धांतों का अनुसरण करना चाहिए: हरीष रावत
देहरादून 9 जनवरी,(निस)। महात्मा गांधी के आदर्शों पर चलकर ही मानव सभ्यता को बचाया जा सकता है। हमें गांधीजी के आदर्शों व सिद्धांतों का अनुसरण करना चाहिए। हर रोज व हर पल ऐसा आचरण करना है जिससे गांधीजी के दिखाए गए रास्ते पर चल सकें। शुक्रवार को गांधी पार्क में महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से भारत वापसी के शताब्दी समारोह में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि बीसवीं सदी के महानायक गांधीजी ने हमारे स्वतंत्रता संघर्ष से गरीबों, किसानों को जोड़ा। उन्होंने इसे सभी वर्गों, धर्मों, क्षेत्रों व जातियों का आंदोलन बना दिया। गांधीजी ने गरीबों, दलितों के साथ ही सभी धर्मों के लोगों को विश्वास दिलाया कि उनका अपना स्वराज होगा, अपनी सरकार होगी जो कि गरीबों के लिए काम करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका से भारत वापिस आने के बाद पूरे देश का दौरा किया। वे गरीबों, किसानों, दलितों के साथ रहे और पढ़े लिखे लोगों तक सीमित रहे आजादी के आंदोलन को जनसामान्य का आंदोलन बना दिया। गांधीजी के सिद्धांतों की प्रासंगिकता वर्तमान वैश्विक परिदृश्यों में और भी अधिक हो गई है। इस अवसर पर सर्वधर्म सभा का आयोजन हुआ और रामधुन सहित विभिन्न भजनों की प्रस्तुति की गई। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
गंाधी दर्षन से बेरोजगारी हो सकती है दूर: विधानसभा अध्यक्ष
देहरादून 9 जनवरी,(निस)। महात्मा गांधी के दर्शनों व विचारों पर यदि हम चलने का प्रयास करें तो समाज में शान्ति, अहिंसा अमन चैन से रह सकते हैं। गांधी ने शिक्षा के साथ-साथ समाज के लिए जो काम किया तथा देश की आजादी में जो भूमिका निभाई उसे हमेशा याद रखा जायेगा। यह बात जिला सर्वोदय मण्डल देहरादून द्वारा डीबीएस काॅलेज में महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रिका से लौटने के 100 वर्षों पर युद्ध, शान्ति व अहिंसा विषय पर आयोजित गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि रूप में संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल ने कही। श्री कुंजवाल ने कहा कि आज जहाॅं विदेशों में गांधी के जीवन पर चिन्तन व शोध चल रहे हैं वही अपने देश में युवा पीढ़ी का गांधी को भुलना चिन्ता जनक है। उन्होंने कहा कि गांधी के विचार व चिन्तन को अपने जीवन में उतारना होगा तभी हम आगे बढ़ पाऐंगे। उन्होंने कहा की गांधी दर्शन एक ऐसा दर्शन है। यदि गांधी के दर्शन व सिद्धान्त को देश अपनाना शुरू कर दे तो इससे बेरोजगारी दूर हो पाएगी। उन्होंने कहा की जो परेशानियाॅ आज पैदा हो रही हैं वह व्यक्ति की स्वयं पैदा किये और मनुष्य ने प्रकृति के साथ जिस तरीके से छेड़ छाड़ कि है उसका खामियाजा आज लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश और दुनियाॅं को सोचना पढ़ेगा कि वे गांधी के सिद्धान्तों पर चलें यदि ऐसा नहीं हुआ तो देश और दुनियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा इससे पूर्व सर्वोदय मण्डल के जिला अध्यक्ष सर्वोदय मण्डल द्वारा महात्मा गांधी की विचार व चिन्तन के लिए किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी। गोष्ठि में शिक्षा विद् नन्द नन्दन पाण्डे, योगेश बहुगुणा, विजय जड़धरी, त्रिपेन सिंह चैहान, चिनमय व्यास, डाॅ. विजय शंकर शुक्ल, डाॅ. अशोक नारंग, कमला पन्त, प्रत्युसवत्तसला आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये। गांष्ठी की अध्यक्षता कुमाऊ विश्व विद्यालय डाॅ. जोशी व संचालन धीरेन्द्र नाथ तिवरी ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा गांधी जी की जीवनी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया।

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