उत्तराखंड की विस्तृत खबर (12 जनवरी) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 14 जनवरी 2015

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (12 जनवरी)

भारत माता पूजन कार्यक्र्रम, गणतंत्र दिवस तक धर्म जागरण समन्वय विभाग चलायेगा 

देहरादून 13 जनवरी (निस)। धर्म जागरण समन्वय के प्रांत प्रमुख संजय ने कहा है कि मकर संक्रांति से गणतंत्र दिवस दिवस तक पूरे प्रदेश में भारत माता पूजन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों के जन्मदिन पर दीप बुझाने की बजाय जलाने की परंपरा विकसित करें। मंगलवार को विश्व संवाद केन्द्र में जानकारी देते हुए प्रांत प्रमुख संजय ने कहा कि इस संबंध में पिछले दिनों ऋषिकेश में व्यास सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में 23 बिंदुओं पर संकल्प कार्यक्रम की रूपरेखा तय की गयी। प्रसिद्ध कथा वाचक शिवप्रसाद मंमगाई द्वारा व्यास सम्मेलन में सभी प्रस्ताव पारित करवाये गये। उन्होंने बताया कि 26 जनवरी को भारत माता पूजन कार्यक्रम, नगरशः बरतीशः धर्म रक्षा बंधन कार्यक्र्रम, 23 अगस्त को स्वामी लक्ष्मणनंद सरस्वती बलिदान दिवस, 23 दिसंबर को स्वामी श्रद्धानंद बलिदान दिवस कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। इसके अलावा नवरात्रि कन्यापूजन में वंचित वर्ग की कन्याओं का पूजन, कथा कार्यक्रम में अंबेडकर, रैदास, कबीरदास के चित्रों को भी लगाना, समाज के उपेक्षित वर्ग के साथ साधु संतों से भी संपर्क एवं उनके साथ भोजन करना, हर जाति को राष्ट्र से जोड़ना, हिंदु समाज में कभी भेदभाव नहीं था इसी भाव को पुर्नजागृत करना, कथा सत्संग व धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज को जोड़ना, परिवार में अच्छे साहित्य के पठन-पाठन के लिए प्रेरित करने के लिए प्रयास किया जायेगा। उन्होंने बताया कि धार्मिक कार्यक्रमों में सपरिवार सहभाग करना, जन्मदिन पर हिंदू मान्यताओं के अनुसार मंदिर में पूजा अर्चना करना, बच्चों के हाथों से दान करवाना, अपने मोहल्ले की पूरी जानकारी रखना, घर के बाहर कुत्ते से सावधान की बजाय स्वागतम लिखने का संदेश दिया जायेगा। इस सम्मेलन में  भूपेन्द्र गिरी, रामानंद बहुगुणा, कैलास आश्रम के संत स्वामी कृष्णानंद उत्तरकाशी, कृष्णप्रणामी संप्रदाय के स्वामी सिंधु सागर जी महाराज आदि उपस्थित थे। 

मकर सक्रांति पर्व पर राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने दी राज्यवासियों को शुभकामना

देहरादून 13 जनवरी,(निस)। प्रदेश के नवनियुक्त राज्यपाल डा.कृष्ण कान्त पाॅल सहित मुख्यमंत्री हरीष रावत ने राज्य के सभी नागरिकों को मकर सक्रांति, पांेगल, बिहू तथा लोहड़ी पर्व की बधाई देते हुए उनके सुखी, समृद्ध तथा स्वस्थ जीवन की कामना की है। राज्यपाल ने अपने संदेश में कहा कि पर्व, तीज-त्यौहार हमारे जीवन की नीरसता को कम करके जीवन में एक नई उमंग, उत्साह और ऊर्जा का संचार करते हैं जिससे हमें जिन्दगी में आने वाली चुनौतियों का सामना करने की हिम्मत मिलती है। हमारी ये समृद्ध परम्पराएं सामाजिक सौहार्द्ध तथा अच्छा वातावरण बनाये रखने में मदद करती हैं। हमें अपनी इन गौरवशाली परम्पराओं को निभाते रहना चाहिए क्योंकि स्वस्थ सामाजिक वातावरण में देश-प्रदेश तथा समाज की प्रगति सुनिश्चित है।’’

ताशी-नुंग्शी का मुख्यमंत्री ने देहरादून पहुँचने पर किया  स्वागत

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देहरादून 13 जनवरी,(निस)। बेटियों को समर्पित मिशन ‘2 फॉर 7’ के तहत दुनिया की सात सबसे ऊंची चोटियों के अलावा दक्षिणी धु्रव पर तिरंगा फहराकर विश्व कीर्तिमान रचने वाली जुड़वा बहनें ताशी और नुंग्शी मंगलवार को घर लौट  आयी  हैं। मंगलवार को दोनों बहनें दिल्ली से सीधे बीजापुर गेस्ट हाउस पहुंचकर मुख्यमंत्री हरीश रावत का आशीर्वाद लिया । बीजापुर हाउस में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मिशन 2 फाॅर 7 को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद देहरादून लौटी ताशी व नुंग्शी मलिक बहनों के स्वागत में बाईकर्स रैली को रवाना किया। सीएम ने दोनों बहनों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मलिक बहनों की कामयाबी से उŸाराखण्ड का नाम पूरी दुनिया में रोशन हुआ है। सीएम ने इनके माता-पिता को भी बधाई देते हुए कहा कि ताशी व नुंग्शी की कामयाबी के पीछे उनके माता-पिता का समर्पण व त्याग है। इस अवसर पर खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल, श्रीमती गोदावरी थापली, ताशी व नुंग्शी के माता-पिता श्रीमती अंजु थापा मलिक व वीरेंद्र सिंह मलिक उपस्थित थे। ताशी, नुंग्शी की मौसी और पूर्व जिला पंचायत सदस्य गोदावरी थापली ने कहा कि दोनों बेटियों ने दुनिया में उत्तराखंड का नाम ऊंचा कर दिया है। इसलिए उनके स्वागत की तैयारी भी उसी तरह की जा गयी  हैं। मुख्यमंत्री आवास से हर्ले डेविडसन बाइकर्स ग्रुप की अगुवाई में रैली निकाली गयी । रैली गढ़ी, कौलागढ़ चैक, बल्लूपुर चैक, घंटाघर, दिलाराम चैक, हाथीबड़कला, अनारवाला होते हुए जोहड़ी गांव पहुंची । ज हां दोनों बहनों को स्थानीय लोगों ने सम्मनित किया । 

त्वरित गति से कराया जाये सड़कों का निमार्णः प्रीतम सिंह 

देहरादून 13 जनवरी,(निस)। प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, लघु सिंचाई, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, गृह एवं पिछड़ा क्षेत्र विकास मंत्री उत्तराखण्ड सरकार प्रीतम सिंह ने आज विधान सभा स्थित सभागार में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखण्ड रूरल रोड़ डेवल्पमैन्ट एजेंसी के अधिकारियों से कहा कि मार्गों का निर्माण त्वरित गति से कराया जाये तथा सड़कों की डी0पी0आर0 एक्चुअल बेस पर बनाई जायें तथा डी0पी0आर0 बनाने मे एक्सपर्ट व विशेषज्ञों का चयन ठीक प्रकार से हो मोके अनुसार सही डी0पी0आर0 बनाई जाये। जिससे जो लागत आंकी गयी है। उसी में ही निर्माण कार्य पूरे कराये जा सकें। उन्होंने कहा कि जिसका टेन्डर हो चुका है। उससे कार्य शीघ्र प्रारम्भ करवाये जाये। उन्होंने अधिकारियों से कहा जितना अच्छा कार्य आपके द्वारा किया जायेगा भारत सरकार उतना ही धन सड़क निर्माण के लिए देगी। बैठक में उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश के कई जनपदों में अभी-प्रतिकर की समस्या हैं। प्रतिकर की समस्या से भूमिधरों को निजात दिलायें तथा जिसका जो प्रतिकर बनता है। उसे शीघ्र दिलाने के निर्देश सचिव रूरल डैवल्पमैन्ट को दिये। बैठक में उन्होंने दैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों के सम्बन्ध में कहा कि क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण हेतु 61 करोड़ रू0 निर्धारित किया गया है। परन्तु अभी तक 11 करोड़ रू से क्षतिग्रस्त सड़कों को निर्माण कराया गया है। इस पर उनके द्वारा चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि किन कारणों से अभी तक दैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों का निर्माण नहीं करवाया गया है। उन्होंने इसके लिये दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के निर्देश भी दिये। बैठक में उन्हें अधिकारियों से कहा कि रूरल क्षेत्र की ऐसी सड़कों का निर्माण करवायें जहाॅं बसावटें जुड़ रही हैं। अब तक 730 बवावटें जुड़ चुकी है। बसावटें जोड़ने में अधिकारी प्राथमिकता से कार्य करें। बैठक में उन्होंने अधिकारियों द्वारा भौतिक एवं वित्तिय प्रगति से अवगत कराते हुए बताया कि अभी तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में भारत सरकार द्वारा प्रदेश के 1125 सडक निर्माण के कार्यों पर स्वीकृति दी जा चुकी है। जिसमें से अभीतक 584 निर्माण के कार्य पूर्ण कर लिये गये हैं। 416 निर्माण के कार्यों पर कार्य चल रहा है। 61 सड़क निर्माण के कार्य अनारम्भ है जो अभी प्रोसेस में हैं। जिसमें 62 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुके हैं। 36 प्रतिशत के कार्य बचे हुए हैं जो अगले तीन माह में पूर्ण हो जाने की सम्भावना हे। समीक्षा बैठक में पिछली बैठक में लिये गये निर्णयों पर भी विस्तार से चर्चा की गयी जिसमें चकराता-लाखामण्डल मार्ग से रवारसी मोटर मार्ग के विषय में अवगत कराया गया कि स्टैन्डिंग इम्पावर्ड कमेटी के द्वारा पारित आदेशों को मा0 उच्च न्यायालय को अवगत कराने के बाद ठेकेदार से वसूली की कार्यवाही की जा रही है। शासन के निर्देशानुसार सत्र्तकता जाॅचें गतिमान हैं। जाॅंच के बाद दोषी पाये गये कार्मिकों के विरूद्ध नियमानुसार कार्य वाही की जायेगी। बैठक में लाखामण्डल से भगोंली मोटर मार्ग, सावड़ा-पेनुआ-डुगरी मोटर मार्ग, रायगी मार्ग से कुल्हा मोटर मार्ग, पीपरा मीनस मार्ग, बायला मोटर मार्ग की भी समीक्षा करते हुए मंत्री जी ने निर्देश दिये कि जो मार्ग बन्द हैं। उन्हें खोलने हेतु प्रभावी कार्य वाही की जाये तथा जो ठेकेदार कार्यों को ससमय पूर्ण नहीं कर रहे हैं। उनके विरूद्ध निमानुसार कार्यवाही की जाय इसके साथ ही वनभूमि हस्तान्तरण के अवशेष प्रस्तावों को निर्धारण आॅंन लाईन किया तथा इनका प्रभावी अनुश्रवण भी किया जाये। बैठक में मंत्री जी द्वारा पिथौरागढ़ वृत्त मसूरी वृत्त, श्रीनगर वृत्त, ज्योलीकोट वृत्त, की भी समीक्षा की गयी बैठक में मा0 मंत्री जी द्वारा निर्देश दिये गये कि सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि अनुबन्ध के समय कार्य आरम्भ करने को कार्य अवश्य आरम्भ कर दें ताकि निर्धारित समय सीमा में कार्य पूर्ण किये जा सके। बैठक में सचिव रूरल डेवलपमैन्ट विनोद फोनियां, मुख्य कार्यकारी अधिकारी ए.एस.हृयांकी, मुख्य अभियन्ता ए.के.दिनकर, अधिक्षण अभियन्ता डो.डी.डालाकोटी, अधिक्षण अभियन्ता सी.एम.पाण्डे सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद थे।

तटवर्ती पारितंत्रों का संरक्षण एवं प्रबंधन का दिया जा रहा प्रशिक्षण 

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देहरादून 13 जनवरी,(निस)। भारतीय वन अनुसंधान संस्थान में भारतीय तटरक्षक के कमांडेन्टों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।  यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 जनवरी तक चलेगा। प्रशिक्षण का विषय तटवर्ती पारितंत्रों का संरक्षण एवं प्रबंधन है। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य तटरक्षक के अधिकारियों को समुद्री पारितंत्रों, समुद्री संरक्षित क्षेत्रों और भारत में उनके प्रबंधन के विषय में जागरूक बनाना है। भारतीय सुदूर संवेदी संस्थान, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रूड़की, टैªफिक कार्यालय नई दिल्ली, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग देहरादून जैसे विभिन्न संस्थानों से प्रतिष्ठित संकायों ने तटवर्ती क्षेत्र विषयों यथा तटवर्ती पारितंत्र प्रबंधन में सुदूर संवेदी के उपयोग, तटवर्ती क्षेत्रों के पारिस्थितिकीय संवेदी क्षेत्रों के साथ-साथ अनुवीक्षण एवं सतर्कता में उन्नत तकनीकों के उपयोग, कच्छवनस्पतियों की पादपीय विविधता, तटवर्ती आपदा तथा तटवर्ती संरक्षित क्षेत्रों की सुरक्षा और प्रबंधन पर सहभागियों को जानकारी उपलब्ध कराई। सम्पूर्ण भारत के पांच विभिन्न क्षेत्रों के सहभागी इस प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं। डा0 पद्म प्रकाश भोजवैद निदेशक वन अनुसंधान संस्थान ने प्रशिक्षण का उद्घाटन किया। उन्होंने प्रशिक्षण में भाग ले रहे सहभागियों को प्रतिष्ठित संस्थानों के ख्याति प्राप्त संकाय विशेषज्ञों के साथ पारस्परिक विचार-विमर्श करके तटवर्ती पारितंत्र और संरचनाओं के बारे में जानने की सलाह दी। कुणाल सत्यार्थी प्रमुख वन संवर्धन प्रभाग तथा प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम निदेशक ने तटवर्ती क्षेत्रों में निवास कर रहे गरीब लोगांे के लिए आजीविका और तटवर्ती पारितंत्र की सुरक्षा और प्रबंधन पर जोर दिया। वी0 के0 धवन, अनुसंधान अधिकारी वन अनुसंधान संस्थान प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन कर रहे हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय तटरक्षक के 12 कमांडेन्ट भाग ले रहे हैं।

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