आलू की अच्छी पैदावार के कारण इसकी कीमतों में आई कमी ने जहां आम लोगों को राहत प्रदान की है वहीं लगभग अन्य सभी हरी सब्जियों की कीमतों में हुई भारी वृद्धि से लोग त्रस्त हैं. आवश्यक वस्तुों की कीमतों में नियंत्रण के लिये सरकार ने 500 करोड रूपये की लागत से मूल्य स्थिरीकरण कोष के गठन करने तथा इसके दायरे में आलू.प्याज को लाने के फैसले के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मटर. गोभी. टमाटर और कुछ अन्य सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही है । नया आलू 10 से 12 रूपये प्रति किलो मिल रहा है । राजधानी क्षेत्र में मांस की कीमत में अचानक साठ रूपये प्रतिकिलों तक की वृद्धि हो गयी है ।खुदरा बाजार में मटर 70 रूपये प्रति किलो. गोभी 45 रूपये. टमाटर 40 से 45 रूपये तथा प्याज 30 से 35 रूपये प्रति किलों मिल रही है । राजधानी में बडे पैमाने पर संगठित रूप से कारोबार करने वाली मदर डेयरी की दुकानों में भी हरा चना 150 रूपये किलो तथा बैगन 40 रूपये किलो मिल रहा है । लौकी भी आम तौर पर 40 रूपये किलो तथा बीन्स 40 से 60 रूपये प्रति किलो मिल रही है ।
खुदरा बाजार में चने का साग 80 रूपये तथा बथुआ का साग 35 रूपये प्रति किलो मिल रहा है ।सरसों का साग कुछ सस्ता है ।बाजार सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों हुई बारिश के कारण बाजार में सब्जियों की आपूर्ति कम हुई है जिसके कारण इनका मूल्य बढना स्वभाविक है । भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार हाल में हुई वर्षा से सब्जियों समेत सभी फसलों को भारी फायदा होगा तथा इससे उत्पादन बढेगा 1 इसके अलावा फसलों पर पाला के प्रकोप का खतरा कम हो गया है । बाजार में न केवल बकरे की मांस के मूल्य बढे हैं बल्कि चिकन की कीमत भी बढ गयी है । सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण कोष में तत्काल आलू और प्याज को शामिल किया है ।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें