गुजरात के सबसे ज़्यादा विवादास्पद पुलिस अधिकारियों में से एक डीजी वंजारा का बुधवार को अहमदाबाद की साबरमती जेल से रिहा होने पर किसी हीरो की तरह स्वागत किया गया, जिसके बाद उन्होंने कहा कि अब 'अच्छे दिन' लौट आए हैं। जेल से बाहर आते ही उन्हें समर्थकों ने घेर लिया, नारे लगाए, और उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए बेहद उत्साहित नज़र आए।
इशरत जहां मुठभेड़ समेत छह मुठभेड़ों से जुड़े मामलों में आरोपी वंजारा ने लगभग आठ साल जेल में बिताने के बाद बाहर आकर कुछ ही दूरी पर एक खुली जीप में खड़े होकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कहा, "पुलिस सरकार का हिस्सा होती है, और उसी के अनुसार काम करती है... हमने जो भी कार्रवाई की, वह आतंकवाद के खिलाफ की थी... अगर हमने आठ साल पहले कार्रवाई नहीं की होती, तो गुजरात देश में एक और कश्मीर बन जाता..."
उन्होंने यह भी दावा किया, "मैंने और मेरे साथियों ने कानून के तहत ही काम किया है... हमने जो भी किया, कानून के मुताबिक ही किया... मैं आठ साल जेल में रहा, जिसका मुझे कोई अफसोस नहीं, क्योंकि मैंने कुछ गलत नहीं किया..." इसके अलावा वंजारा ने कहा, "मैं राजनीतिज्ञ नहीं हूं, सैनिक हूं, और हमेशा राजनीति की जगह राष्ट्रनीति का हिस्सा रहा हूं, हमेशा रहूंगा..."
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