लखनऊ, 5 फरवरी। बाल्यावस्था देखरेख एवं विकास पर सेव द चिल्डेन द्वारा उ0प्र0 फोर्सेस के साथियों का क्षमतावर्धन कार्यशाला का आयोजन होटल मैरियाड में किया गया। इस कार्यशाला में प्रदेश के 35 प्रतिभगियों ने प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर यूनीसेफ प्रतिनिधि डा0 रिचा पाण्डेय ने उत्तर प्रदेश में कुपोषण की गम्भीरता पर चर्चा करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश मे कुपोषण की दर बहुत अधिक है स्वास्थ्य एवं आई0सी0डी0एस0 के चल रहे कार्यक्रमों में कुपोषण की समस्या के समाधान का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 3 वर्ष से कम आयु के 42 प्रतिशत बच्चे कम वजन के हैं। वहीं 52 प्रतिशत बच्चे छोटे कद और 19.5 प्रतिशत बच्चे सूखा रोग से ग्रसित हैं। इस समस्या से निजात पाने के लिए राज्य पोषण मिशन का गठन किया गया है जिससे कुपोषण को समाप्त करने का प्रयास तेजी से किया जा रहा है। उन्होने कुपोषण के मुख्य करणों पर चर्चा करते हुए बताया कि अगर 10 मुख्य बातों पर पर हम प्रयास करें तो कुपोषण की समस्या को काफी सीमा तक कम किया जा सकता है। जिससे किशोरी बालिका एवं गर्भवती मां को सुपोषित किया जा सकता है।
इस अवसर पर पोषण मिशन के डायरेक्टर अमिताभ प्रकाश ने बताया कि मिशन बहुत तेजी के साथ कार्य करते हुए इसकी पहुंच हर जिले पर बनाते हुए जिलास्तरीय अधिकारियों के साथ इस कार्यक्रम हेतु समन्वय स्थापित करने में कामयाबी हासिल की है। उन्होंने कहा कि इस अभियान की जन भागीदारी से ही शत्-प्रतिशत सफलता हासिल की जा सकती है। इसमें स्वैच्छिक संगठनों द्वारा भी महत्वपूर्ण पूर्ण निभायी जा सकती है। उन्होंने बताया कि स्वयं सेवी संगठनों की भूमिका पोषण मिशन में हर स्तर पर सुनिश्चित की गई है। उन्होंने स्वयं संस्था के प्रतिनिधियों से वस्तु स्थिति से अवगत कराते रहने की भी अपेक्षा व्यक्त की।
प्रतिभागियों को एन0आर0एच0एम0 के महाप्रबंधक सामुदायिक सहभागिता श्री राजेश झा ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में सेवाओं व समुदाय के बीच की दूरियों को कम कर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा सकता है इसमें समाज के हर लोगों को आगे आने की आवश्यकता है इस कड़ी में गैर सरकारी संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होने बताया कि उत्तर प्रदेश में प्रसव सेवाएं बेहतर हुई है तथा मातृ मृत्यु दर में कमी आई है ।
सेव द चिल्डे्न के प्रतिनिधि सुनीलजी ने अपने बताया कि सेव दी चिल्डे्न बच्चो के स्वास्थ्य एवं विकास के लिए दृढ संकल्पित है । उन्होने कहा कि देश व प्रदेश में कुपोषण एक मुददा है इसके लिए हम सबको सरकार के साथ मिल कर काम करने की जरुरत । श्री कुमार ने बताया कि कुपोषण का चक्र बच्चे के जन्म से शुरू होता है और ध्यान न देने के कारण परिवार में कुपोषण की स्थिति निरंतर चलती रहती है। उन्होंने बताया कि देश में प्रत्येक दूसरी महिला एनीमिया की शिकार होती है। कुपोषण को दूर करने के लिए मुख्य 3 बातों पर ध्यान दे दे ंतो कुपोषण को काफी हद तक दूर करने में मदद मिल सकती है। ये हैं-बच्चे के जन्म के 1 घंटे के अंदर उसे मां का दूध पिलाया जाये, 6 माह तक केवल मां का दूध ही पिलाया जाये तथा 6 माह के बाद मां के दूध के साथ समय पर पौष्टिक आहार दिया जाये।
उ0प्र0फोर्सेस के राज्य समन्वयक रामायण यादव ने बताया कि फोर्सेस छोटे बच्चों के उपर कार्य करने वाला एक राष्टीय नेटवर्क है जिसका मुददा ही 0- 6 साल के बच्चे है। उन्होने बताया कि 6 वर्ष से कम आयु की अवस्था में एक बच्चे में 85 प्रतिशत दिमाग का विकास होता है ऐसे में इस आयु समूह पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इस अवसर पर विभिन्न जनपदों से आये प्रतिनधियों ने अपने क्षेत्र में दो आगनवाड़ी केन्द्र को माउल अगनवाड़ी बनाने का निर्ण लिया।

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