बदलते परिवेश में किशोरवय के मनोभाव को दर्शाएगा लघु फिल्म “भ्रम“
नरकटियागंज(पच) ”भ्रम“ नामक लघु फिल्म किशोरवय और युवाआंे में बढते उम्र के साथ उभरते मनोभाव को दिखाने का प्रयास है। कथानक के अनुसार बचपन हस्कूली किताबांे की कहानियांे से अलग हटकर दिखते परिवेश को चित्रित करने का प्रयास है “भ्रम“। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादूर शास्त्री की ईमानदारी से प्रेरणा लेकर एक किशोर अपने जीवन को आगे बढाने का प्रयास करता है तो उसके सामने कौन कौन सी परेशानियां सामने आती है उससे परिचित कराने में “भ्रम“ कहा तक सफल होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। गोल्डन लाॅयन मोशन पिक्चर्स के बैनर तले बन रहीं शाॅर्ट फिल्म में ईमानदारी और क्षेत्रवाद की हकीकत को दिखाने की कसरत करते दिखते है सर्वज्ञ। कहावत है होनहार बिरवान के होत चिकने पात् इसे चरितार्थ किया है, नरकटियागंज शहर के शिक्षक किशोरी लाल जायसवाल के पुत्र सर्वज्ञ जिसने बचपन से विद्यालीय शिक्षा के साथ कला के प्रति अपनी अभिरूचि को जीवित रखा। अपने विद्यालय में अभिनय व नृत्यकला के लिए चर्चा में रहने वाले सर्वज्ञ को उसके अवधेश अंकल ने सम्पूर्ण साक्षरता अभियान में कला जत्था के संयोजक कुमार अभिनव के साथ जोड़ा, उस दौरान पटना के एनजीओ आद्री से जुड़े कलाकार का सानिध्य मिला। फिर सर्वज्ञ के दिल में कला की लहरे हिरण की भाँति कुलाचें भरने लगी। अपने स्कूली शिक्षा के दौरान उसने नृत्य व अभिनय के क्षेत्र में पहचान बनाया। तत्पश्चात उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा, वीडियों एलबम का निर्माण किया। गौरतलब है कि सर्वज्ञ ने अपने एलबम में नृत्य और अभिनय का जो जलवा बिखेरा, उससे इस क्षेत्र में कार्यरत पुराने कलाकारों की नजर में खटकने लगा गया। उसने स्वयं नृत्य निर्देशन, अभिनय कर कई एलबम बनाए जो पूर्वांचल उत्तर प्रदेश और बिहार में काफी हिट हुए। एलबम की सफलता के बाद नामचीन नृत्य निर्देशकों व अन्य क्षेत्रीय सहयोंगियों ने उसे आगे बढने को प्रोत्साहित किया। पिता के संघर्ष गाथा से प्रभावित सर्वज्ञ बाहर जाना तो चाह रहा था लेकिन माँ की ममता से दूर नहीं जाने की चाहत रखने वाले नवोदित कलाकार को अन्ततः घर छोड़ दिल्ली का रूख करना पड़ा। दिल्ली पहुँचकर उसने थियेटर, माॅडलिंग हाउस और कला के क्षेत्र के अनुभवी लोगांे से मिला और कला की बारीकियों से अवगत हुआ। उसके बाद सर्वज्ञ माॅडलिंग के लिए चुन लिया गया और उस कार्य का बखूबी निर्वहन् भी किया। दिल्ली के बाद सर्वज्ञ ने पटना की ओर रूख किया और वहाँ भी माॅडलिंग किया। अलबत्ता फिल्मी क्षेत्र की बारीकियों की अपनी जिजीविषा को शांत करने के लिए सर्वज्ञ पटना से नरकटियागंज पहुँचकर, मुम्बई की ओर कदम बढा दिया। वहाँ उसने दिन रात एक कर नामी गिरामी फिल्मी हस्तियों से मिला, जिसमें आनन्द घतराज और अरविन्द रंजन दास समेत अन्य कई नामचीन फिल्मकार शामिल है। उनसे प्रभावित होकर सर्वज्ञ ने इन्टरनेट की सहायता से फिल्म निर्देशन और अभिनय के विभिन्न पहलुओं से अवगत हुआ। विभिन्न फिल्मी निर्माता, निर्देशकों व कलाकारों के साथ देश विदेश का भ्रमण कर मुम्बई पहुंचा और गोल्डन लाॅयन मोशन पिक्चर्स नामक बैनर का निबंधन कराया। इसके साथ ही सर्वज्ञ अपना फिल्मी सफर प्रारम्भ किया। उसने कश्मीर त्रासदी को लेकर वीडियो डाॅक्युमेन्ट्री, एलबम और शाॅर्ट फिल्म का निर्माण किया। सर्वज्ञ एक सर्वगुण सम्पन्न कलाकार है जिसमें न केवल अभिनय, निर्देशन, निर्माण, पटकथा, संवाद बल्कि कहानी लेखन मे भी जबरदस्त उपस्थिति दर्ज किया है। सर्वज्ञ ने एक साक्षात्कार में बताया कि गोल्डन लाॅयन मोशन पिक्चर्स के तहत क्षेत्रीय कलाकारों को उभरने का अवसर मिलेगा। इसके अलावे हिन्दी, भोजपुरी और अंग्रेजी फिल्म निर्माण की प्रक्रिया जारी है।
चीनी मिल कर रहा मानवीय हितों का उलंघन
नरकटियागंज(पच) स्थानीय शहर स्थित न्यु स्वदेशी सुगर मिल का पेराई सत्र 2014-2015 विगत माह से प्रारंभ हो गया। इसके साथ ही नगरवासियों की अंतहीन पीड़ा प्रारंभ हो गयी है। हालाकि इस बार चीनीमिल को आपूर्ति वाले भारी वाहन शहर के मुख्य पथ थाना रोड से नहीं जा रहे है, लेकिन मानवीय दर्द का एहसास हरदिया चैक के निवासी बता सकेंगे। चीनी मिल को गन्ना आपूर्ति करने वाले ट्रकों के ओवर लोडिंग से किसी के केबल, किसी के बिजली के तार, टेलिफोन के तार व अन्य सामान्य उपयोग के सामान बर्बाद होने लगे है। विगत वर्ष शहर के गौशाला के पास स्थित बिजली के खम्भे पर ओवरलोड ट्रक ने कई घरों के तार को तोड़ उनके घर में अंधेरा कायम कर दिया। नगर के प्रबुद्धजनों का कहना है कि चीनी मिल अपना उत्पादन बढाए, इससे लोगो को कुछ लेना देना नहीं है। नगर के लोगो का मानना है कि शहर में प्रदूषण के अलावे अन्य समस्याएँ चीनी मिल अपने फायदे को लेकर उत्पन्न करता है, इसलिए मिल प्रबंधन पेराई सत्र के दौरान शहर की सफाई व्यवस्था नगर परिषद से मांग अपने हाथों में ले। जमीन के नीचे से कितना पानी का उपयोग कर कितने जल का उत्सर्जन करता है। इसकी सूची कारखाना के मुख्य दरवाजे पर लगाकर रखे जैसा कि दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र में कम्पनियाँ करती है। यदि शहर के लोगो को मिल प्रबंघन सुविधा मुहैया नहीं कराता है तो उसे शहर के लोगों को कष्ट दंेने का कोई अधिकार नहीं है। नरकटियागंज के प्रबुद्धजनांे जिसमे नेता, पत्रकार व अधिवक्ता शामिल है का कहना है कि मिल प्रबंधन मानवीय हितो का उलंघन कर व्यवसाय कर रहा है, यह उचित नही।

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