मिल्लत पब्लिक स्कूल का उद्घाटन सम्पन्न
नरकटियागंज(पच) नरकटियागंज शहर के शिवगंज मुहल्ला में मिल्लत पब्लिक स्कूल का उद्घाटन अनुमण्डल पदाधिकारी कौशल कुमार ने किया। उनके साथ भूमि सुधार उपसमाहत्र्ता इस्तेयाक अली अंसारी और अन्य शामिल हुए। कटहरी लाॅजिंग के पूर्व प्रधान शिक्षक इफ्तेखार अहमद ने अधिकारियो व अतिथियों का स्वागत किया। क्षेत्र के मारूफ शायर सैयद आरिफ लखनवी ने स्वागत में शेर पेश किया। प्रधान शिक्षक शकील अहमद ने कहा कि सीबीएसई के पैटर्न पर ढेर सारे स्कूल है अलबत्ता मिल्लत पब्लिक स्कूल एक अलग मुकाम कायम करने के लिए अपनी एक अलग मुहिम चलाने को तैयार हैं। कार्यक्रम का संचालन उच्च विद्यालय के शिक्षक मुकुन्द मुरारी राम ने किया।
नरकटियागंज के दो परीक्षा केन्द्रो पर ओस्तानियाँ की परीक्षा में 429 हुए शामिल
नरकटियागंज(पच) नरकटियागंज के दो परीक्षा केन्द्र पर मदरसा बोर्ड के ओस्तानियाँ की परीक्षा शनिवार से प्रारम्भ हो गयी है। हमारे सूत्रों ने बताया कि मदरसा असर्फिया शाहिदी मल्दहिया व मदरसा इस्लामियाँ धूमनगर में मदरसा बोर्ड ने ओस्तानियाँ की परीक्षा का केन्द्र बनाया। जहाँ 489 छात्र-छात्राएँ परीक्षा में शामिल होने थे। परीक्षा केन्द्र के संचालक प्रधान शिक्षक मेराज अली ने बताया कि 70 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे, जिनमें 25 छात्र और 45 छात्राएँ परीक्षा में शामिल नहीं हुई। दूसरी ओर मदरसा इस्लामियाँ धूमनगर में भी ओस्तानिया की परीक्षा का केन्द्र बनाया गया। जिसमें कुल 155 परीक्षार्थी शामिल होने थे। धूमनगर के प्रधान शिक्षक मोबिन हुसैन के अनुसार ओस्तानिया की परीक्षा के दौरान दो अनुपस्थित रहे है।
उर्दू को अपनो ने ही ठुकराया, पुलिस वालों ने तो भला बोर्ड से नाम हटाया है
नरकटियागंज(पच) बिहार में उर्दू पहले अपने घर में उपेक्षित रही, उसे अपने घर के लोगों ने भुला दिया। अब हालात् ये हो गये है कि राजभाषा विभाग के कर्मियों के अलावे अन्य विभाग के अधिकारी व कर्मी भी उर्दू की उपेक्षा करने से नहीं हिचक रहे है। उल्लेखनीय है कि बिहार राज्य की दूसरी राजभाषा उर्दू है, जिसके अनुसार कोई सरकारी बोर्ड या प्रचार हिन्दी के साथ उर्दू में होना अनिवार्य है। अब भारतीय रेल के राजभाषा को लें जिसने नरकटियागंज को नरकटियाँग्ंज़ उर्दू में लिखा लेकिन उसपर किसी का ध्यान नहीं गया। प्रखण्ड कार्यालय में नरकटियागंज को उर्दू में नरकटियागंह लिखा है। ताजा ख़बर यह कि शिकारपुर थाना का बोर्ड पहले हिन्दी उर्दू और अंग्रेजी में था, अलबत्ता नये लिखे गये बोर्ड से उर्दू ऐसे गायब है मानों गधे के सिर से सिंग। नरकटियागंज के उर्दू साहित्य के अदबी संस्था बज्म ए कहकशाँ के सचिव एम एस कासमी, डाॅ.आफताब आलम खाँ और बसपा नेता सह शहर के प्रबुद्ध चिकित्सक डाॅ.नौशाद आलम ने कहा कि सरकारीकर्मी और राजभाषा के अधिकारी व कर्मचारियों की लापरवाही व उपेक्षा के कारण पुलिस महकमा ही नही बल्कि अन्य विभाग में भी उर्दू की उपेक्षा हो रही हैं।

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