उत्तराखण्ड के कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र राकेष का लम्बी बीमारी के बाद निधन
- राज्य में तीन दिवसीय राजकीय षोक की घोशणा
देहरादून, 7 फरवरी, (निस)। उत्तराखंड सरकार में समाज कल्याण एवं परिवहन मंत्री सुरेंद्र राकेश का आज (शनिवार) निधन हो गया। सुरेंद्र लंबे समय से बीमार चल रहे थे। लंबे समय से फेफड़े के कैंसर से पीडि़त सुरेंद्र राकेश का गुड़गांव के हॉस्पिटल में आज सुबह 9ः30 बजे निधन हो गया वह 48 वर्ष के थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटा बेटी हैं। हरिद्वार जिले की भगवानपुर विधान सभा सीट पर बसपा से विधायक बने थे। मगर कुछ साल पहले बसपा सुप्रीमो ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र राकेश के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने दिवंगत आत्मा की शांति एवं दुःख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है। मुख्यमंत्री रावत ने अपने शोक संदेश में कहा है कि स्व. सुरेन्द्र राकेश ने कैबिनेट मंत्री के दायित्वों का पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से पालन किया। भगवानपुर क्षेत्र के विकास के लिए वे सदैव तत्पर रहे है। उनके निधन से राज्य को अपूरणीय क्षति हुई है। उत्तराखण्ड के राज्यपाल डा0 कृष्ण कांत पाल ने प्रदेश के समाज कल्याण एवं परिवहन मंत्री श्री सुरेन्द्र राकेश के निधन पर गहरा दुःख एवं संवेदना व्यक्त की है। वहीं राज्यपाल ने स्व0 सुरेन्द्र राकेश को एक लोकप्रिय जननेता एवं कुशल प्रशासक बताते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है और दुःख के इस कठिन समय में उनके परिजनों एवं शुभचिन्तकों को धैर्य एवं शांति प्रदान करने के लिए भी भगवान से प्रार्थना की है। राज्य सरकार द्वारा कैबिनेट मंत्री स्व. सुरेन्द्र राकेश के निधन पर राज्य में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। इस अवधि (07 फरवरी, से 09 फरवरी, 2015) में पूरे प्रदेश में राजकीय शोक रहेगा। साथ ही पूरे प्रदेश में राष्ट्रीय ध्वज झुके रहेंगे और प्रदेश सरकार के सभी कार्यालय बन्द रहेंगे। कैबिनेट मंत्री की अंत्येष्टि संस्कार पुलिस समान के साथ किया जायेगा।
हिमालय दर्षन योजना का मुख्यमंत्री ने सादगी के साथ किया उद्धाटन
देहरादून, 7 फरवरी, (निस)। मुख्यमंत्री हरीश रावत की महत्वकांक्षी योजना हिमालय दर्शन योजना का शनिवार को बिना किसी औपचारिकता के सहस्त्रधारा हैलीड्रोम में आयोजित कार्यक्रम में सादगीपूर्ण ढंग से योजना का शुभारंभ किया गया। ज्ञातव्य है कि कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र राकेश का आज प्रातः निधन हो गया। कैबिनेट मंत्री के निधन का समाचार प्राप्त होने के बाद पूर्व निर्धारित हिमालय दर्शन योजना कार्यक्रम को सादगीपूर्ण ढंग से पूरा किया गया। इस अवसर पर उत्तराखण्ड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डाॅ. गौरव चैधरी, मुख्य सचिव एन.रवि शंकर, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, अपर सचिव नागरिक उड्डयन अक्षत गुप्ता द्वारा हरी झण्डी दिखाकर हिमालय दर्शन योजना को शुरू किया गया। इस अवसर पर सरकार द्वारा राजकीय इंटर कालेज के स्कूली छात्र-छात्राओं को निःशुल्क यात्रा कराई गई। लगभग 45 मिनट की इस यात्रा में बच्चों को हिमालयन दर्शन कराया गया। बच्चे इस यात्रा से काफी उत्साहित दिखे। कार्यक्रम में उत्तराखण्ड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के नवनिर्मित अतिथिगृह का भी लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर उत्तराखण्ड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डाॅ. गौरव चैधरी ने कहा कि हिमालय दर्शन योजना सरकार की महत्वकांक्षी योजना है। इस योजना से प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। डाॅ. चैधरी ने कैबिनेट मंत्री के निधन पर दुःख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज यह कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था। कैबिनेट मंत्री के निधन का समाचार प्राप्त होने के बाद इस योजना को सांकेतिक तौर पर शुरू किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने बताया है कि हिमालय दर्शन योजना के माध्यम से हमारा प्रयास है कि आम नागरिक को भी कम खर्च पर हिमालय के दर्शन कराये जाय। इससे प्रदेश में पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा। श्री शर्मा ने कहा कि इस योजना में 5 हजार से 10 हजार रुपये तक किराया रखा गया है। सरकार के प्रयास से हवाई पट्टियों का विकास किया गया है। भविष्य में हवाई जहाज के माध्यम से भी हिमालय दर्शन योजना शुरू की जायेगी। इस अवसर पर कांग्रेस नेता राजेन्द्र शाह, राजकुमार वालिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम में राजकीय इंटर कालेज सहसपुर, राजकीय इंटर कालेज गुजराड़ा, रायपुर, नालापानी, डोभालवाला, खुडबुड़ा, राजकीय कन्य इंटर कालेज राजपुर रोड़ आदि स्कूलों के बच्चों ने यात्रा की।
केदारनाथ आपदा में मरी घोषित महिला डेढ़ साल बाद मिली जीवित
देहरादून, 7 फरवरी, (निस)। उत्तराखंड में जून 2013 में आई प्राकृतिक विपदा में लापता राजस्थान की एक महिला को उसके पति ने 18 महीने माह आखिरकार खोज ही निकाला। कुदरत की लीला है कि बिछुड़ी लीला को एक बार फिर उसने परिवार से मिला दिया है। राजस्थान के अलवर जिले के भीकमपुरा का रहनें वाला बस ड्राइवर बिजेंद्र 12 जून 2013 को पत्नी लीला और 30 यात्रियों को लेकर उत्तराखंड के पवित्र धामों की यात्रा पर गया था। ये सभी लोग केदारनाथ में थे और 16 जून 2013 को आई भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए थे। उस हादसे में लीला समेत 17 लोगों को लापता मानते हुए सरकार ने उनके परिजनों को 10-10 लाख रुपये की सहायता दी थी। लेकिन बिजेंद्र का दिल नहीं माना और गुम पत्नी को 18 माह तक पहाड़ों पर हर गांव में खोजता रहा। वह सब लोगों को पत्नी का फोटो दिखाकर पूछताछ करता रहता था। मंगलवार को उत्तरकाशी जिले के गंगोरी गांव के लोगों ने तस्वीर देखकर बताया कि ऐसी कोई महिला विक्षिप्त अवस्था में गंगोली गांव में है। बिजेंद्र ने तुंरत वहां जाकर सारा गांव छान मारा और आखिरकार अपनी पत्नी लीला को ढूंढ़ ही लिया। उसकी मानसिक हालत फिलहाल ठीक नहीं है और वह उसे अपने साथ अलवर ले आया है। बिजेंद्र ने उत्तराखंड सरकार और प्रशासन पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वहां भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। एक जानकारी के अनुसार सरकार के सामने इस तरह के 14 मामले सामने आये हैं। इनको लापता की सूची में दर्ज कराया गया था पर बाद में खोजबीन में से मिल गए थे। इनमें से किसी को मुआवजा नहीं दिया गया था। यह पहला मामला है जब मुआवजा राशि जारी होने के बाद मृत मान ली गई महिला मिली है। कुछ मामले ऐसे भी आए जो पूरी तरह से जांच के बाद फर्जी पाये गये थे। एक अधिकारी ने बताया कि जारी की गई मुआवजे की राशि में इलाज का खर्च भी शामिल किया जा सकता है। शासन के एक अधिकारी के मुताबिक इलाज अगर लंबा और महंगा हो तो पूरी राशि को उसमें समाहित किया जा सकता है।
गर्भ में बच्चे की मौत, महिला चिकित्सालय में हंगामा
देहरादून, 7 फरवरी (निस)। प्रदेश का सबसे बड़ा महिला चिकित्सालय सुर्खियों में है। यहां डाक्टरों पर एक बार फिर लापरवाही का आरोप लगाया है। बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो जाने पर परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और नर्स के साथ मारपीट की। परिजनों ने आरोप लगाया कि पहले चिकित्सकों ने बच्चे को स्वस्थ बताया और कुछ देर बाद ही उसे मृत बता दिया। राजधानी की महिला अस्पताल हमेशा सुर्खियों में बना रहता है। पूर्व में भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जिनमें प्रसव से पहले या फिर प्रसव के बाद बच्चों की संदिग्ध हालातों में मौत हो गयी। हाल ही में एक हफ्ते में चार बच्चों की मौत ने भी काफी तूल पकड़ा था लेकिन जांच का आश्वासन देकर अस्पताल प्रबंधन ने भी इन मामलों पर लीपापोती कर दी। शनिवार सुबह एक बार फिर डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए महिला के परिजनंों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। मिली जानकारी के अनुसार बल्लुपुर निवासी एक महिला को चार दिन पूर्व महिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। शनिवार सुबह चिकित्सकों ने महिला का परीक्षण किया और मां एवं बच्चे को पूरी तरह से स्वस्थ बताया। साथ ही महिला का अल्ट्रासाउंड भी कराया गया। अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट आने के बाद चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों की पल-पल बदलती रिपोर्ट से परिजनों के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। महिला के पति का कहना था कि चंद मिनट पहले ही चिकित्सकों ने महिला की जांच कर बच्चे को पूरी तरह से स्वस्थ बताया और कुछ ही देर में उसे मृत भी घोषित कर दिया। महिला का पति सवाल-जवाब करने के लिए डाक्टरों के कमरे में पहुंचा जहां चिकित्सकों एवं नर्सो से उसकी नोंक-झोंक हुई। इसी दौरान पति ने मेज पर रखा रजिस्टर पटक दिया जिससे वहां हाथापाई की नौबत आ गयी। सुरक्षाकर्मियों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत किया और पति को नर्स रूम से बाहर निकाला। एक नर्स लांबा का आरोप है कि पति ने उसके साथ मारपीट की जिससे उसके हाथ में चोटें आई। मारपीट के बाद नर्स ने दून अस्पताल में अपना मेडिकल कराया और दून अस्पताल पुलिस चैकी को इस मारपीट की सूचना दी गयी। सूचना मिलने पर पुलिसकर्मी भी मौके पर पहुंचे एवं सीएमएस सहित नर्स व परिजनों से पूछताछ की। पति ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं।
पुलिस को चकमा देने में फिर कामयाब रहा भूरा
देहरादून, 7 फरवरी(निस)। दून पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर फरार हुआ कुख्यात बदमाश अमित भूरा हाथ आते-आते रह गया। इस बार भी पुलिस टीम के बेहद निकट पहुंच जाने के बाद भी अमित भूरा पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाने में कामयाब हो रहा है। इस बार भी महज चार घंटे के अंतराल पर भूरा पुलिस के हाथ आने से रह गया। पुलिस ने भूरा के नौ ऐसे साथियों को जरूर गिरफ्तार किया जो कि भूरा की फरारी में सीधे तौर पर जुड़े हुए थे। वहीं भूरा के नौ साथियों की गिरफ्तारी के पुलिस टीम के हौसले बुलंद हैं और उम्मीद लगाई जा रही है कि अब जल्द ही भूरा भी गिरफ्त में होगा। बता दें कि 13 दिसंबर को पुलिस अभिरक्षा से फरार हुए अमित उर्फ भूरा ने पुलिस को नाकों चने चबवा रखे हैं। बीते रोज ही पुलिस ने टीम ने भूरा के नौ साथियों को गिरफ्तार किया जिसमें हरियाणा और दिल्ली मेें सक्रिय नीरज बवाना गिरोह के सदस्य शामिल हैं। पुलिस के पास सूचना थाी अमित उर्फ भूरा भी इसी गिरोह के साथ है, लेकिन जब पुलिस ने इस गिरोह के ठिकाने पर छापा मारा तो गिरोह का सरगना और भूरा हाथ नहीं लग सके। हालांकि पुलिस नीरज बवाना को दबोचने के लिए ही इस अभियान में निकली थी। सूत्रों का कहना है कि अमित उर्फ भूरा एवं नीरज बवाना लगातार एक दूसरे के संपर्क में हैं। इस गिरोह के नौ सदस्यों की गिरफ्तारी से पूर्व अमित भूरा नीरज बवाना के साथ ही था और दोनों गिरोह के सदस्यों से मिलने आने वाले थे। तमाम कोशिशों के बावजूद भी भूरा एक बार फिर बेहद करीब आने के बाद भी पुलिस के हाथ से निकल गया। 13 दिसंबर को भूरा की फरारी में नीरज बवाना के गिरोह ने सक्रिय भूमिका निभाई थी और इसके बाद उसे संरक्षण भी प्रदान किया था। गिरोह के सक्रिय सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद अब भूरा पर गिरफ्तारी का दबाव भी बढ गया है जबकि पुलिस टीम के हौसले बुलंदं हैं। बता दें कि अमित भूरा पर 45 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं और १२ दिसंबर को वह पांच पुलिसकर्मियों की आंखों में धूल झोंक कर फरार हो गया था। देहरादून जेल से पांच पुलिसकर्मी उसे लेकर बागपत गए थे जहां रास्ते में भूरा को ले जा रहे विक्रम को ओवरटेक करते हुए बदमाशों ने पुलिसकर्मियों की आंखों में मिर्च स्प्रे झोंक दिया था और फायरिंग करते हुए अपने साथी भूरा को तो आजाद करा ही लग गए थे साथ ही पुलिसकर्मियों की दो एके-47 एवं एसएलआर भी लूट कर ले गए थे। इस मामले में पांचों पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका हैै। फिलहाल भूरा की फरारी दून पुलिस की गले की फांस बनी हुई है और इस मामले में दून के तत्कालीन एसएसपी अजय रौतेला पर गाज गिरने के बाद प्रदेश के पुलिस महानिदेशक पर भी कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। विपक्ष पहले ही डीजीपी को पद से हटाने को लेकर आंदोलरत हो रखा है। इन तमाम परिस्थितियों के बीच पुलिस टीमें अमित भूरा की तलाश में पूरे जी-जान से जुटी हुई हैं लेकिन हर कदम पर अमित भूरा पुलिस टीमों से चार कदम आगे ही चल रहा है। भूरा की फरारी के बाद से पुलिस टीमें दिन-रात एक कर उसकी तलाश कर रही हैं। गनीमत यही है कि पुलिस के बढ़ते दबाव एवं लगाता सर्च आपरेशन के कारण भूरा अब तक किसी भी प्रकार की कोई आपराधिक वारदात को अंजाम देने में कामयाब नहीं हो पाया है। पुलिस टीमें भी इस फिराक में हैं कि भूरा अपने कदम बाहर निकालें और उसे धर दबोचा जाए।
ग्रीन बेल्ट के स्थान पर अवैध निर्माण
देहरादून , 7 फरवरी(निस)। सिडकुल व अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में अधिकांश औद्योगिक इकाईयां हरित पट्टीका (ग्रीन बेल्ट) का विकास नहीं कर रही हैं। ग्रीन बेल्ट के स्थान पर फैक्ट्रियों ने अपनी पार्किंग व अवैध निर्माण कर दिया है। नोटिस के बाद भी औद्योगिक इकाईयों ने सिडकुल का आदेश नहीं माना है। ऐसी इकाईयों की संख्या 50 से अधिक है। सिडकुल की स्थापना के समय मास्टर प्लान में यह तय किया गया था कि हर फैक्ट्री के चारों ओर ग्रीन बेल्ट के लिए भूमि छोड़ी जाए। फैक्ट्रियों को भूमि आवंटन के समय सिडकुल ने नक्शे में ग्रीन बेल्ट के लिए भूमि आवंटित की। आवंटन में सड़क व फैक्ट्री की दीवार के बीच की भूमि चिन्हित की गई। स्थापना के समय सिडकुल ने निर्देश दिए थे कि प्रत्येक औद्योगिक इकाई पर्यावरण संरक्षण व सिडकुल की सुंदरता के लिए ग्रीन बेल्ट विकसित करेंगे। सिडकुल में कुछ फैक्ट्रियों ने सिडकुल की ओर से उपलब्ध कराई गई ग्रीन बेल्ट की भूमि तथा फैक्ट्री परिसर में भी ग्रीन बेल्ट डेलवप की। लेकिन, अभी भी करीब 50 इकाईयां ऐसी हैं। जिन्होंने अभी तक ग्रीन बेल्ट डेवलप नहीं की है। इनमें से अधिकांश फैक्ट्रियां ऐसी हैं। जिन्होंने ग्रीन बेल्ट की भूमि पर अपनी वाहन पार्किंग तथा अवैध निर्माण कर दिया है। सिडकुल प्रशासन ने इन कंपनियों को कई बार नोटिस भी दिया है। लेकिन, ये कंपनियों नोटिस का जबाव देना भी मुनासिब नहीं समझा। अब सिडकुल इन इकाईयों को अंतिम नोटिस भेज रहा है। आरएम केएन नौटियाल का कहना है कि सिडकुल की करीब 50 औद्योगिक इकाईयां ऐसी हैं जो नोटिस का भी जबाव नहीं दे रही है। एक अंतिम नोटिस दिया जा रहा है। जिसके बाद सीधे औद्योगिक इकाईयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
नोटिस तक ही सिमटी कार्रवाई
सिडकुल क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट के स्थान पर पार्किंग व अवैध निर्माण के संबंध में सिडकुल प्रशासन केवल नोटिस देने तक ही सिमटा है। किसी इकाई पर नोटिस देने के आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
ग्रीन बेल्ट का बुरा हाल
बहादराबाद औद्योगिक क्षेत्र व हरिद्वार औद्योगिक क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट के नाम पर बुरा हाल है। जहां ग्रीन बेल्ट डेवलप होनी थी वहां उद्यमियों व अन्य लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। इन औद्योगिक क्षेत्रों में ग्रीन पार्क भूमि भी अधिकांश कब्जे की भेंट चढ़ चुकी है।
शिक्षण कार्य से राजनीति में हुआ था सुरेन्द्र राकेष का पर्दापण
- सुरेन्द्र राकेष के निधन के बाद मंत्री बनने को जोड़-तोड़ षुरू
देहरादून, 7 फरवरी। बतौर शिक्षक सुरेंद्र राकेश शिक्षक राजनीति में भी खासे सक्रिय रहे। धीरे-धीरे उन्होंने इससे अलग हटकर पिछड़ों और दलितों के सरोकारों की सियासत करनी भी शुरू कर दी। लोगों में उनकी पैठ बनती चली गई। पहली बार वह 2007 में विधानसभा पहुंचे। बहुजन समाज पार्टी में उनका अच्छा दबदबा रहा और उन्होंने प्रदेश में पार्टी की मजबूती के लिए दिन-रात काम किया। बसपा के टिकट पर वह 2012 में फिर से विधानसभा पहुंचे और कांग्रेस गठबंधन सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। पिछले साल पार्टी में गुटबाजी के चलते बसपा सुप्रीमो से उनके रिश्तों में दरार आ गई और उन्हें निष्कासन की कार्रवाई का सामना भी करना पड़ा। सुरेंद्र राकेश बसपा कोटे से प्रदेश सरकार में मंत्री रहे। उनके पास समाज कल्याण व परिवहन विभाग का कामकाज था। सदन के भीतर उन्हें तेजतर्रार व दबंग सदस्य के तौर पर जाना जाता था। कैंसर की गंभीर बीमारी के कारण वे पिछले काफी समय से सक्रिय राजनीति से दूर होते चले गए। उनका जन्म पांच सितंबर 1966 को हुआ था। उनके पिता कली राम राकेश किसान थे और परिवार का मुख्य व्यवसाय खेती ही है।
फिर टली कैबिनेट बैठक और लॉचिंग
कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश के निधन के चलते मंत्रीमंडल की बहुप्रतिक्षित बैठक और हिमालय दर्शन योजना की लॉचिंग सादगी के बीच करनी पड़ी। पहले यह योजना 25 जनवरी को और फिर 31 जनवरी को लॉंच होनी थी। योजना के तहत सैलानियों को सस्ते पैकेज पर प्रदेश में हिमालय की खूबसूरत वादियों की हवाई सैर कराने की योजना है। इस बीच, षनिवार दोपहर बाद होने वाली कैबिनेट बैठक भी स्थगित हो गई है। पहले यह बैठक 31 जनवरी को होनी थी, लेकिन मुख्यमंत्री के ादल्ली प्रवास के चलते इसे टाल दिया गया है। इस बैठक में चिह्न्त आंदोलनकारियों को पेंशन, शिक्षा आचार्यों और पूर्व सीएम विजय बहुगुणा द्वारा उठाए गए वर्ग चार की भूमि के नियमतिकरण के मसले आदि कई अहम बिंदुओं पर विचार के साथ कई अहम फैसले लिए जाने थे।
एक और उपचुनाव
कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद प्रदेश में अब एक और उपचुनाव होना तय है। हरिद्वार जिले की भगवानपुर सीट उनके निधन से खाली हो गई है और अगले विधानसभा चुनाव में अभी काफी समय बाकी है। इसलिए, अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर छह माह के भीतर उपचुनाव की जंग लड़ी जानी तय है।
कैबिनेट दर्ज की एक सीट खाली
सुरेंद्र राकेश के निधन से हरीश रावत मंत्रिमंडल में भी कैबिनेट दर्ज की एक सीट खाली हो गई है। इस सीट को हथियाने के लिए कांग्रेस में जोर आजमाइश के साथ ही जोड़-तोड़ की सियासत भी परदे के पीछे से शुरू हो चुकी है। इस दौड़ में जहां पूर्व परिवहन मंत्री हीरा सिह विश्ट मजबूत दावेदार हैं वहीं बहुगुणा खेमे के सुबोध उनियाल व मुख्यमंत्री के खेमे में रहे पिथौरागढ़ के विधायक मयूख मेहर की मजबूत दावेदारी है। मुख्यमंत्री पर पहले से दबाव बनाए बैठा बहुगुणा कैंप इस मौके को भुनाने की पूरी कोशिश करेगा। उल्लेखनीय है कि मंत्रिमंडल में पीडीएफ का कोटा कम कर कांग्रेसी विधायकों को एडजस्ट करने लिए कांग्रेस संगठन और सरकार में अरसे से बवाल मचा है। कांग्रेस का एक धड़ा जोरशोर से इसकी वकालत करता आ रहा है। नाराज धड़े ने गंभीर बीमारी को देखते हुए सुरेंद्र राकेश को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग कई बार उठाई थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे खारिज कर दिया। हर बार मुख्यमंत्री सुरेंद्र राकेश और पीडीएफ के बचाव में खड़े रहे। उनका दो टूक कहना था कि पीडीएफ कोटे के मंत्री अच्छा काम कर रहे हैं और कैबिनेट मंत्री की बीमारी से उनके विभाग का कामकाज किसी भी तरह प्रभावित नहीं हो रहा है। लेकिन, अब सुरेंद्र राकेश ही नहीं रहे तो मंत्रिमंडल में एक सीट खुद-ब-खुद खाली हो गई है। समाज कल्याण और परिवहन विभाग के नए मुखिया के लिए कांग्रेसी खेमे में सियासत अभी से गर्माने के संकेत मिलने लगे हैं।
आपदा में लापता महिला के मिलने पर हरकत में आया प्रशासन
देहरादून, 7 फरवरी (निस)। केदारनाथ त्रासदी में लापता हुई महिला के गंगोरी में मिलने के बाद प्रशासन विक्षिप्त लोगों को लेकर हरकत में आ गया है। पुलिस और एलआईयू जिले भर में विक्षिप्त हालत में घूम रहे लोगों की खोज खबर में जुट गई है। हालांकि महिला की सूचना से बेखबर प्रशासन अब भी उसे लेकर असमंजस की स्थिति में है। राजस्थान के अलवर जिले के भीकमपुरा गांव के बस चालक विजेंद्र कंवर और आपदा में लापता हुई उसकी पत्नी के विक्षिप्त हालत मिलने की घटना से प्रशासन के कान खड़े हो गए हैं। अब नगर क्षेत्र समेत जिले भर में घूम रहे विक्षिप्त लोगों के बारे पता लगाने की कवायद शुरू हो गई है। एलआईयू व पुलिस की दो टीमों ने नगर क्षेत्र व गंगोत्री हाईवे से लगी बस्तियों में लोगों से इस बारे में पूछताछ की। हालांकि विजेंद्र कंवर की पत्नी लीला कंवर को लेकर प्रशासन अब भी असमंजस की स्थिति में है। शनिवार को एसपी जगतराम जोशी ने खुद गंगोरी व मनेरी में लोगों से पूछताछ की। इनमें से कुछ लोगों ने बताया कि वे महिला को पिछले तीन चार साल से यहां देख रहे हैं। जबकि कुछ लोगों के मुताबिक वह डेढ़ साल से ही इस क्षेत्र में घूम रही थी। एसपी ने बताया कि इस मामले में अभी और जांच की जा रही है और महिला केदारनाथ से यहां कैसे पहुंची इसका पता लगाया जा रहा है, लेकिन जिले में अन्य विक्षिप्त लोगों का विवरण जुटाया जा रहा है ताकि उनके बारे में भी पता लगाया जा सके।
मुआवजा राशि लौटाने को तैयार
राजस्थान के अलवर जनपद निवासी विजेंद्र ने दूरभाष पर बताया कि उसे उत्तराखंड सरकार से गुमशुदगी के साढ़े तीन लाख और राजस्थान सरकार से पांच लाख रुपये बतौर मुआवजा मिले थे। अब पत्नी के मिलने पर वह इन पैसों को वापस करने के लिए वह तैयार है। उसके मुताबिक 2013 की 15 जून की रात को वह केदारनाथ में था और 16 जून की सुबह जब आपदा आई तो वह उस वक्त गौरकुंड पहुंच चुके थे, लेकिन भगदड़ में उसकी पत्नी और बस में तीस अन्य लोग लापता हो गए। साथ बचे तेरह लोगों के साथ वह नौ दिन बाद ऋ षिकेश पहुंचा, लेकिन उसके बाद उसे वापस नहीं आने दिया गया। उसने बीते साल दिसंबर माह में गौरीकुंड में पत्नी के गुमशुदा होने के पोस्टर व पर्चे भी चिपकाए थे।
आगामी यात्रा सीजन में चहल पहल की उम्मीद
देहरादून, 7 फरवरी(निस)। केदारनाथ यात्रा का मुख्य पड़ाव रहे गौरीकुंड आगामी यात्रा सीजन में चहल पहल लौटने की उम्मीद है। गत वर्ष यह पड़ाव सड़क मार्ग से नहीं जुड़ सका था, जिससे यात्रा की सभी गतिविधियां मुख्य रूप से सोनप्रयाग से ही संचालित हुई थी। गौरीकुंड केदारनाथ यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव स्थल रहा है, जो कि सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ था। यहां यात्रा सीजन में दस हजार से अधिक मजदूरों के साथ ही पच्चीस हजार तक औसतन यात्रा रात्रि को ठहरते थे। लेकिन आपदा के बाद से स्थितियां काफी विकट हो गई हैं। वर्ष 2013 जून में आपदा के समय सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक छह किलोमीटर मोटर मार्ग पूरी तरह बह गया था, जिससे पैदल ही जैसे-तैसे यात्री यहां पहुंच रहे थे। जिला प्रशासन व पुनर्निर्माण कार्य में जुटी निम की टीम ने सोनप्रयाग से ही अपनी गतिविधियां संचालित की। इस बार सीमा सड़क संगठन व प्रशासन के प्रयास के चलते गौरीकुंड कसबा मोटर मार्ग से जुड़ गया है। ऐसे में एक बार फिर यहां के व्यापारियों में उम्मीद जगी है कि गौरीकुंड के मुख्य पड़ाव स्थल बनने से उनका कारोबार फिर से शुरू हो सकेगा। गौरीकुंड में केदारनाथ त्रासदी के दौरान भारी तबाही मची थी। जबकि ऊपर की कई दुकानें अभी भी सुरक्षित हैं। गर्म कुंड से लेकर बस अड्डा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। यहां पर सौ से अधिक दुकानें आपदा की भेंट चढ़ गई थी। एक बार फिर से सड़क मार्ग से जुड़ जाने से उम्मीद जताई जा रही है कि यह कसबा केदारनाथ यात्रा का मुख्य केंद्र बन सकेगा। व्यापार संघ महामंत्री देवी प्रसाद गोश्वामी का कहना है कि गौरीकुंड को आपदा में भारी नुकसान पहुंचा था। सड़क मार्ग से जुड़ जाने से यहां रहने वाले सैकड़ों व्यापारियों को एक बार फिर से रोजगार मिल सकेगा। जिलाधिकारी डॉ. राघव लंगर का कहना है कि गौरीकुंड को सड़क मार्ग से जोड़ दिया गया है। केदारनाथ यात्रा को लेकर प्रशासन सजग है। यात्रा मार्ग से जुड़े सभी कसबे महत्वपूर्ण हैं।
गौरीकुंड की वर्तमान स्थिति
-डेढ़ हजार लोगों के रहने की व्यवस्था।
-सौ दुकानों में व्यापारी दुकानों का संचालन कर सकते हैं।
-घोड़ा, खच्चर के संचालन का केंद्र।
-केदारनाथ की कुल दूरी यहां से चैदह किलोमीटर, जबकि सोनप्रयाग से 19 किलोमीटर है।


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