उत्तराखंड की विस्तृत खबर (09 फ़रवरी) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

सोमवार, 9 फ़रवरी 2015

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (09 फ़रवरी)

जीएमवीएन पर चहेती कम्पनी को टेन्डर देने का आरोप

देहरादून, 09 फरवरी(निस)। जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रधुनाथ सिंह नेगी ने जीएमबीएन पर गलत तरीके से बिना किसी टैंडर के कोटेशन के आधार पर काम शुरू किये जाने का आरोप लगाया है। ओल्ड सर्वे रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2012-13 में गढ़वाल मंडल विकास निगम ने 79 खनन पट्टो की ईआईए इत्यादि कराने के लिए बगैर टैण्डर प्रक्रिया अपनाये सजिशन मात्र 07 दिन का समय देकर अपनी चहेती कंपनी ग्रास रूट्स रिसर्च एंड क्रिएशन कंपनी को लगभग 03 करोड़ का काम मात्र कोटेशन के आधार पर दे दिया। खनन पट्टो को ईआईए हेतु चार जनपदों देहरादून, हरिद्वार पौड़ी, एवं टिहरी को चुना गया, जिसमें 5 हैक्टेयर तक के 29 लॉट, 5 है तक 41 लॉट एंव 50 से अधिक के 9 लॉट शामिल किये गये। उन्होने कहा हैरानी की बात यह है कि लगभग 70 लॉटो की ईआईए देहरादून स्थित राज्य स्तरीय पर्यावरणीय प्रभाव विशेषज्ञ प्राधिकरण से होनी थी तो इतने छोटे काम के लिये क्यों ठेका दिया गया तथा क्यों दलालों का सहारा लिया गया। उन्होंने कहा कि उक्त ठेका बगैर टैण्डर एवं समाचार पत्रों में विज्ञापित कराये बगैर मात्र कोटेशन के आधार पर दिया गया एंव इसमें मात्र दूरभाष पर सारा खेल खेला गया तथा इस खेल में जीएमवीएन शासन ग्रास रूट्स कंपनी की तिगडी ने प्रदेश की गाढ़ी कमाई को लूटकर अपने जेंबे भरने का काम कर रहे है। उन्होंने कहा कि इस पूरे खेल में अधिकारियों ने जनहित एवं अवैध खनन का बहाना बनाकर ये कारनामा किया गया। उन्होंने कहा कि वे उचित कार्यवाही न होने पर वे राज्यपाल से मुलाकात कर उच्च स्तरीय जांच की मांग करेगे। पत्रकार वार्ता के दौरान अमरदीप जायसवाल, महानदन प्रसाद, अशोक गुप्ता, हाजी असद, धनराज क्षेत्री, समर गुप्ता आदि मौजूद थे। 

पति और परिजनों पर दहेज उत्पीडन मुकदमा

देहरादून, 09 फरवरी(निस)। दून में दहेज उत्पीडन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कैंट थाने में दहेज उत्पीडन के एक मामले में विवाहिता की ओर से पति समेत अन्य ससुरालियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। महिला ने आरोप लगाए है कि ससुरालियों द्वारा न केवल उसका दहेज को लेकर उत्पीडन किया गया है बल्कि उसके मारपीट करते हुए दहेज में नगदी व सामान लाने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। कैंट पुलिस को दी गयी शिकायत में विवाहिता ने बताया कि उसका विवाह सैय्यद मौहल्ला निवासी हिमांशु के साथ हुआ था। आरोप है कि शादी के बाद से ही उसके ससुराली उसे दहेज के लिए परेशान करने लगे थे और दहेज लाने के लिए उस पर दबाव डालने लगे थे। महिला ने इस बारे मेें अपने परिजनों केा बताया तो उन्होंने भी दहेज की इस मांग को पूरा करने में अपनी असमर्थता जाहिर कर दी। इंकार मिलने के बाद ससुराली उस पर अत्याचार करने लगे जिस पर वह अपने पति का घर छोड़ कर अपने पिता के पास घर आने के लिए विवश हो गयी। विवाहिता की शिकायत पर पति सहित सास-ससुर एवं ननद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

उम्मीदें बंधा रही शीतकालीन यात्रा 

देहरादून, 09 फरवरी(निस)। बीते वर्ष 14 दिसंबर से उत्तरकाशी  के खरसाली में शुरू हुई शीतकालीन यात्रा व पर्यटन विकास की कवायद उम्मीदें बंधा रही है। बीते डेढ़ माह में खरसाली गांव में 3000 से अधिक यात्री व पर्यटक पहुंच गए। जिन्होंने खरसाली में यमुना की पूजा अर्चना के साथ ही बर्फबारी का भी लुत्फ लिया।

वर्ष 2013 की आपदा के बाद तीर्थ पुरोहित खाली हाथ हैं।
आपदा की मार झेल रहे यात्रा मार्ग के डंडी, कंडी, घोड़े-खच्चर मालिक, दुकानदार भी निराश बैठे थे। पर बीते 14 दिसंबर को यमुनोत्री मंदिर समिति की पहल पर खरसाली में शुरू हुई शीतकालीन यात्रा सफल साबित हो रही है। सुविधाओं की कमी और मौसम लगातार खराब रहने के बावजूद डेढ़ माह में खरसाली गांव में 3000 से अधिक यात्री और पर्यटक पहुंच गए। मंदिर समिति व स्थानीय पुलिस इन यात्रियों और पर्यटकों का रेकार्ड रख रही है। इससे आने वाले ग्रीष्मकालीन यात्रा सीजन को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव पुरुषोत्तम उनियाल के मुताबिक आगामी 21 अप्रैल को अक्षय तृतीया को खुलने वाले यमुनोत्री धाम के कपाट के दौरान से तीर्थयात्रियों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है, इस बारे में लोग अभी से पूछताछ कर रहे हैं। प्रभारी पर्यटन अधिकारी केएस नेगी का कहना है कि इस बार महज एक प्रयास था अगले वर्ष से विभाग सभी संसाधनों के साथ शीतकालीन पर्यटन के क्षेत्र में काम करने की योजना बना रहा है।

उत्तरपूर्वी राज्यों की तर्ज पर उत्तराखण्ड के लिए भी नीति बनाये केन्द्र सरकारः हरीष रावत
  • राज्य की खनन नीति तैयार, खनन कार्य होगा पारदर्षी, योजना आयोग जल्दबाजी में किया समाप्त 

harish rawat
देहरादून, 09 फरवरी,(निस)। मध्य हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र सरकार की नीति उŸारपूर्वी राज्यों के समान हो। विशेष रूप से उŸाराखण्ड द्वारा देश के पर्यावरण संतुलन में किए जा रहे योगदान को भी संज्ञान में लिया जाना चाहिए। इसके एवज में राज्य को ग्रीन बोनस दिया जाए। वहीं हाइड्रो पावर को क्लीन व ग्रीन एनर्जी मानते हुए हाइड्रो पावर प्रोजेक्टोें पर लगी रोक हटाई जाए ताकि उत्तराखण्ड जैसा राज्य ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सके। सोमवार को बीजापुर अतिथि गृह में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बीेते दिन नई दिल्ली में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की प्रथम बैठक में उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों की जानकारी दी। उन्होने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा में उŸाराखण्ड की महत्वपूर्ण सामरिक स्थिति को देखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी से मुक्त रखा जाए। अपनी विशेष परिस्थितियों के कारण पिछड़े रह गए राज्यों पर ध्यान देकर विकास के असंतुलन को दूर करने को प्राथमिकताओं में लिया जाए। उŸाराखण्ड में रेलवे, नेशनल हाईवे, एयरपोर्ट के विकास के लिए काफी कुछ किया जाना है। राज्य के सीमित संसाधनों को देखते हुए नई रेल लाईनों के निर्माण में साझेदारी की अनिवार्यता से राज्य को मुक्त रखा जाए। इसके लिए केंद्र सरकार संसाधन उपलब्ध करवाए। उŸाराखण्ड में स्थित शिक्षण संस्थानों को सेंटर आॅफ एक्सीलेंस बनाने, आगामी अर्धकुम्भ के आयोजन में केंद्र से सहयोग की अपेक्षा है। गंगा का उद्गम स्थल होने के कारण नमामि गंगा में उŸाराखण्ड को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।  मुख्यमंत्री ने बताया कि  उन्होंने केंद्र सरकार से भौगोलिक व ऐतिहासिक रूप से विकास में पीछे रह गए राज्यों को विशेष सहयोग दिए जाने का अनुरोध किया है। साथ ही उŸाराखण्ड के विशेष राज्य के स्तर को बरकरार रखते हुए केंद्रीय योजनाओं में आर्थिक सहायता पूर्ववत पैटर्न पर ही दी जाए। 
  मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक वर्ष में राज्य सरकार ने अनेक योजनाओं की पहल की है। इन योजनाओं से राज्य को विकास की नई दिशा मिलेगी। यद्यपि परिणाम आने में कुछ समय लगना स्वाभाविक है। शीतकालीन चारधाम यात्रा को केवल पर्यटकों की संख्या से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए। हालांकि हमें इस वर्ष अच्छा रेस्पांस मिला है। हिमालय दर्शन की योजना के लिए भी हम धीरे धीरे मार्केट बना रहे हैं। 500 गांवों को चिन्हित कर इको टूरिज्म में आगे बढ़ रहे हैं। इसका परिणाम भी आने वाले समय में देखने को मिलेगा। प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने व चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए हर सम्भव प्रयास किया जा रहा है। हाइड्रो पावर को नीतिगत दायरे में लाया गया है। उन्होने कहा कि राज्य की अपनी कोई खनन नीति नहीं है अब इस पर काम किया जा रहा है। इसके बाद खनन को भी जल्द ही नीलामी पर लाया जाएगा जिससे इसमें स्वतः ही पारदर्षिता आ जायेगी। सरकार भूमि स्वामित्व को लेकर सभी तरह के मामलों चाहे वह वर्ग 3 हो या वर्ग 4 सुलझाने के लिए पूरी तरह से गंभीर है। मलिन बस्तियों को विनियमित किया जाएगा। प्रदेश में आवासविहीन परिवारों का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि हर व्यक्ति को छत उपलब्ध कराई जा सके। योजना आयोग पर उन्होने कहा कि इसे केन्द्र सरकार ने जल्दबाजी में समाप्त किया है, उससे संस्थागत अनिश्चितता आ गई है। उŸाराखण्ड सहित सभी राज्यों में वार्षिक योजना के निर्धारण, क्रियान्वयन में कठिनाई आ रही है। केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में केंद्रांश मिलने में विलम्ब हो रहा है। राज्य अपनेे विकास का आगे का रोड़मैप भी नहीं बना पा रहे हैं। 

कोई टिप्पणी नहीं: