शतप्रतिशत हितग्राहियों को मिले आवास योजना का लाभ - सीईओ
जिला पंचायत सीहोर के सभा कक्ष मे मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत डाॅ. आर.आर. भांेसले द्वारा मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, केश शिल्पी योजनाओ की समीक्षा की गई। इस मौके पर समस्त सहायक विकास विस्तार अधिकारियो के साथ परियोजना अधिकारी जिला पंचायत श्री योगेन्द्र राय एवं प्रभारी अधिकारी मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास मिशन श्री हृदेश राठौर उपस्थित थे। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के वार्षिक लक्ष्य की समीक्षा करते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने निर्देशित किया कि जिले को 4 करोड का लक्ष्य प्राप्त हुआ था जिसमें से जिले के बैेको मे 172 समूहो के 925.80 लाख के प्रकरण प्रेषित किये जा चुके है। जिसमें से 58 समूह के 340.25 लाख के प्रकरण स्वीकृत हुए है तथा 38 समहो के 77.25 लाख के प्रकरण ही वितरित हुए है। समस्त बैक शाखा प्रबंधको तथा सहायक विकास विस्तार अधिकारियो को 15 मार्च 2015 तक कार्यवाही करते हुए समूहो रिवाल्विंग फंड जारी कराते हुए शतप्रतिशत समूहो का क्रेडिट मोबिलाईजेशन कराने के निर्देश दिये गये। मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास मिशन की समीक्षा करते हुए डाॅ. भोसले ने निर्देशित किया कि 15 मार्च 2015 तक शतप्रतिशत प्रेषित प्रकरणो को स्वीकृत कराते हुए प्रकरणो का वितरण अनवार्यतः करावे। साथ ही ऐसे हितग्राही जिनके द्वारा ऋण का पुर्नभुगतान नहीं किया जा रहा है उनकी सूची तत्काल जिला पंचायत को प्रेषित करे ताकि उनके विरूद्ध आरआरसी जारी करते हुए बसूली एवं कुर्की की कार्यवाही की जावे। एनपीए खातो के लिए सहायक विकास विस्तार अधिकारी जिम्मेदार होंगे तथा वार्षिक लक्ष्य के अनुरूप कार्य न होने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी।
प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन
सी. आर. डी. ई. कृषि विज्ञान केन्द्र, सेवनियाॅ, जिला सीेहोर द्वारा ग्राम नादान, विकासखण्ड इछावर में भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर द्वारा डाले गये चना फसल अंतर्गत प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषकों से चना फसल प्रदर्षन पर चर्चा करने हेतु केन्द्र के विषेषज्ञों ने चना फसल की उन्नत उत्पादन तकनीक जैसे - उन्नत किस्म के बीज का उपयोग (जे. जी - 130) फफूंदनाषक व कल्चर से बीज उपचार, अनुसंषित मात्रा में उर्वरक का उपयोग, सिंचाई प्रबंधन व समय पर कीट - व्याधि प्रबंधन पर जानकारी दी गई। कृषक श्री रूबीलाल, दुर्गानायक ने केन्द्र द्वारा डाले गये प्रदर्षन पर अपने अनुभव से अवगत कराते हुये कहा कि केन्द्र के विषेषज्ञों के मार्गदर्षन में खडी फसल की तुलना अपनी कृषक पद्वति सें करने पर ज्ञात होता है प्रदर्षित तकनीक के अंतर्गत चना फसल सूखने (उगरने की) समस्या कम है, प्रति पौधे षाखाओं व फलियों की संख्या अधिक है। श्रीमति रेषम बाई, महिला कृषक, ग्राम - धाईखेडा ने अपने अनुभव मे बताया कि इस मे चना फसल अन्य किस्मों की तुलना 15 - 20 प्रतिषत उत्पादन की संभावना अधिक है। प्रक्षेत्र दिवस के दौरान उपस्थित कृषकों ने चना फसल में आ रही समस्याओ पर प्रष्न पूछे जिनका उपस्थित विषेषज्ञों द्वारा निदान किया गया। इसके उपरान्त कृषकों ने केन्द्र द्वारा ग्राम नादान के कृषकों के खेत में डाले गये प्रदर्षन का अवलोकन कर अपनी जिज्ञासाओ का समाधान किया। इस अवसर पर केन्द्र के वैज्ञानिक श्री जे. के. कनौजिया, डाॅ उपेष कुमार, श्री संदीप टोडवाल, श्री ए. के. साहू, एवं श्री संदीप चैहान उपस्थित थे।

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