उत्तराखंड की विस्तृत खबर (04 मार्च) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 4 मार्च 2015

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (04 मार्च)

लापता सिग्नलमैन का शव भी बरामद

देहरादून, 4 मार्च (निस)। पिथौरागढ़ के छियालेख में बर्फीली चटान के गिरने से लापता हुए सिग्नलमैन सईद के शव को बर्फ से खोज कर बाहर निकाल लिया गया है। इस हादसे में मृतक जवानों की संख्या अब तीन हो गयी है। चटान गिरने के बाद राहत एंव बचाव कार्यो के लिए चलाए गए अभियान के समाप्त किए जाने की घोषणा कर दी गयी है। बीते सोमवार को सुरक्षा बलों की चैकी पर बर्फ की चट्टान गिरने के बाद राहत एंव बचाव के लिए अभियान चलाया गया था। सेना व बचाव दल ने बीते रोज हवलदार संतोष चन्द्र व प्रदीप कुमार के शव तलाश लिए थे।  सभी जवानों के पार्थिव शरीर सेना मुख्यालय लाये गए।  जहां से इन्हें इनके पैत्रिक गांवों में भेजा जा चुका है।  सभी शहीद जवान पिथौरागढ़ जनपद के ही रहने वाले हैं। इसके बाद बचाव व राहत टीम ने लापता सिग्नलमैन सईद का शव भी बर्फ से बाहर निकाल लिया है। जिससे इस हादसे  में शहीद जवानों की संख्या तीन हो गयी है।

गवर्नर्स कप गोल्फ टूर्नामेंट के आयोजन की तैयारियाँ शुरू

देहरादून, 4 मार्च (निस)। राज्यपाल डा0 कृष्ण कांत पाल द्वारा आज, ‘गवर्नर्स कप गोल्फ टूर्नामेंट-2015’ के आयोजन के सन्दर्भ में बैठक ली गई, जिसमें इस वर्ष टूर्नामेंट हेतु, मई 29, 30 तथा 31 की तिथियाँ निर्धारित की गई हैं। यह आयोजन प्रतिवर्ष राजभवन नैनीताल के लगभग 200 एकड क्षेत्रफल के सुरम्य प्राकृृतिक सौंदर्य सेे घिरे गोल्फ कोर्स में होता है। राजभवन नैनीताल का 18 होल्स का यह गोल्फ कोर्स 3,572 गज का विस्तार लिए हुए है। राज्यपाल ने कहा कि गोल्फ खिलाडि़यों में अत्यन्त लोकप्रिय हो चुके इस टूर्नांमेंट को और अधिक आकर्षक और सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने के लिए अभी से तैयारियाँ शुरू कर दी जाएं। उन्होंने कहा कि इस वार्षिक आयोजन हेतु गठित समितियों के सभी सदस्य आपस में समन्वय करके मई प्रथम सप्ताह तक तैयारियांे को अन्तिम स्वरूप देना सुनिश्चित करें।

स्कूल कमेटियों को किया जाये मजबूतः सीएस 

देहरादून, 4 मार्च (निस)। स्कूल मैनेजमंेट कमेटी (एसएमसी) को मजबूत करने के लिए सभी स्कूलों में एक साथ 2 अप्रैल 2015 को बैठक की जाय। इस बैठक में अधिकारी के साथ-साथ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, आशा, एएनएम और भोजनमाता को भी शामिल किया जाय। पेयजल, शौचालय और बिजली का इंतजाम मुकम्मल करने पर भी इसमें चर्चा हो। ये निर्देश मुख्य सचिव एन.रवि शंकर ने बुधवार को सचिवालय में सर्व शिक्षा अभियान की कार्यकरिणी बैठक में दिए। उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित जनरल बाडी की बैठक भी जल्द बुलाई जाय। मुख्य सचिव ने कहा कि ग्रीष्मावकाश मं जब स्कूल बंद हो जाते हैं, बच्चों को विभिन्न गतिविधियों से जोड़ा जाय। पर्यावरण अध्ययन, कम्प्यूटर टेªनिंग, वानिकी, फसलों की प्रकृति, समूह आधारित अध्ययन के साथ साथ खेलकूद और मनोरंजन के भी कार्यक्रम किये जायं। इस दौरान आस पास रहने वाले शिक्षक घरों में जायं। जो बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं, उन्हे स्कूल जाने के लिए प्रेरित करें। उन्होने कहा कि निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें सब को मिलती हैं। इसी तरह निःशुल्क डेªस, जूते, स्वेटर और बस्ते भी बच्चों को दिये जायं। आजीविका परियोजना में स्थानीय उत्पाद से बनाये जा रहे बस्ते उन्हे दिये जायं। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2014-15 के लिए 518 करोड़ रूपये स्वीकृत हुए थे। इसमें से 442 करोड़ रूपये की धनराशि जारी कर दी गई है। निर्माण कार्यो में थर्ड पार्टी मूल्यांकन के लिए नियोजन विभाग में सूचीबद्ध एजेंसियों की सेवाएं ली जायेंगी। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) में सामुदायिक सहभागिता के लिए ‘खुला मंच‘ शुरू किया जा रहा है। लोक सेवा आयोग और प्राविधिक शिक्षा परिषद से चयनित शिक्षकों की तैनाती रमसा स्कूलों में की जायेगी। बैठक में अपर मुख्य सचिव एस. राजू, सचिव शहरी विकास डीएस गब्र्याल, सचिव शिक्षा एमसी जोशी, महानिदेशक शिक्षा सैंथिल पांडियन, अपर सचिव नियोजन रंजीत सिन्हा, निदेशक माध्यमिक शिक्षा आर.के कुंवर, निदेश्क बेसिक शिक्षा सीमा जौनसारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

डग्री कालेजों को नेशनल नालेज नेटवर्क से जोड़ने की कवायद शुरू 

देहरादून, 4 मार्च (निस)। मुख्य सचिव एन.रवि शंकर बुधवार को सचिवालय में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के कार्यकारिणी समिति की अध्यक्षता करते हुए सभी विश्वविद्यालयों और डिग्री कालेजों को नेशनल नालेज नेटवर्क से जुड़ने पर जोर दिया। उन्होने कहा कि राज्य के सभी पालिटेक्निक और आइटीआई भी विश्वविद्यालयों से जुडे़। तकनीक आधारित शिक्षा पर ज्यादा से ज्यादा बल दिया जाना चाहिए। ई-लर्निग, ई-लाइबे्ररी, ई-क्लास को अधिक से अधिक बढ़ावा देने की जरूरत है। बैठक में रूसा के अद्यतन स्थिति परियोजना निदेशालय की स्थापना, परियोजना निदेशक को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों के प्रतिनिधायन, वित्त समिति के गठन, प्रस्तावों को प्राप्त कर डीपीआर के परीक्षण, सृजित पदो ंके लिए चयन समिति के गठन पर चर्चा की गई। बताया गया कि भारत सरकार की पीएबी (प्रोजेक्ट अपू्रवल बोर्ड) ने उत्तराखण्ड राज्य उच्च शिक्षा परिषद का गठन किया गया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा परिषद की कार्यकरिणी का गठन किया गया है। बैठक में बताया गया कि रूसा के अंतर्गत स्वायत्तशासी कालेजों का अपगे्रडेशन किया जायेगा। विश्व विद्यालयों को अवस्थापना ग्रांट दी जायेगी, नये माॅडल कालेज बनाये जायेंगे, शोध, अभिनव प्रयोग और गुणवता सुधार, समता इनीशियेटिव, फैक्लटी चयन में सपोर्ट, फैकल्टी की गुणवता में सुधार, उच्च शिक्षा की व्यवसामीकरण, संस्थागत पुनर्गठन और रिफार्म, डाटा संग्रह और नियोजन, मैनेजमंेट इंफार्मेशन सिस्टम, पालिटेक्निक को सपोर्ट, मैनेजमेंट मानिटरिंग मूल्याकंन एवं शोध सहित अन्य कार्य किये जायेंगे। बैठक में सचिव तकनीकी शिक्षा आर के सुधांशु, प्रभारी सचिव राधिका झाा, अपर सचिव उच्च शिक्षा श्रीधर बाबू अद्दांकी, निदेशक उच्च शिक्षा जगदीश प्रसाद सहित विश्वविद्यालयों के वीसी उपस्थित थे।

राज्य सभा के लिए शिल्पी अरोड़ा ने किया दावा पेश, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने का समय मांगा

देहरादून, 4 मार्च (निस)। कांग्रेस प्रवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती शिल्पी अरोड़ा ने मुख्यमंत्री हरीश रावत से भेंट कर उत्तराखण्ड से राज्य सभा सदस्य के लिए अपना दावा पेश किया है। श्रीमती अरोड़ा द्वारा इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को पत्र भेजा गया है। श्रीमती अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री रावत के नेतृत्व में राज्य विकास के नये आयाम प्राप्त कर रहा है। ऐसे में जब उनके द्वारा स्व. मनोरमा डोबरियाल शर्मा को राज्य सभा के मनोनीत किया गया, तो आम कार्यकर्ता को उम्मीद जगी है कि उन्हें भी बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। श्रीमती अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने राज्य सभा पद के लिए अपनी दावेदारी इसलिए भी की है कि वे महिला होने के साथ-साथ एक कांग्रेस पार्टी की जुझारू कार्यकर्ता भी है। उनके राज्य सभा में मनोनीत होने से राज्य की मातृ शक्ति विशेषकर युवा महिलाओं का उत्साह बढेगा। प्रदेशहित से जुड़े मुद्दों पर राज्य सभा में एक बुलंद आवाज उठ पायेगी। श्रीमती अरोड़ा ने विश्वास व्यक्त किया है कि प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी, सह प्रभारी संजय कपूर, मुख्यमंत्री श्री रावत, प्रदेश अध्यक्ष श्री उपाध्याय और पार्टी हाईकमान उनकी क्षमता और योग्यता को देखते हुए राज्य सभा के लिए उनके नाम पर गंभीरता से विचार करेंगे।

छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज

देहरादून, 4 मार्च (निस)। कैंट कोतवाली क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के जरिए एक बैंक से लाखों रूपए की धोखाधड़ी करने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। कैन्ट कोतवाली में नैनीताल बैंक की पण्डितवाड़ी शाखा प्रबन्धक अपर्णा भट्ट पुत्री शिवप्रसाद भट्ट की ओर से समुन राणा निवासी ढाकपट्टी, खेमराज भट्ट निवासी ओएनजीसी कालोनी, अजय ध्यानी निवासी व्योमप्रस्थ, ममता बिस्ट निवासी बजांरावाला, विनय सिंह व मो. नफीस के खिलाफ बैंक में फर्जी कागजातो के आधार पर अलग-अलग दो बार में 9 लाख व 6 लाख रूपये लेने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया है। बैंक के शाखा प्रबन्धक अपर्णा भट्ट का आरोप है कि उक्त 6 लोगों ने इसी वर्ष 15 जनवरी से 13 फरवरी के बीच फर्जी कागजो के आधार पर नैनीताल बैंक से दो बार में 15 लाख का लोन ले लिया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरूकर दी है।

मकान बेचने के नाम पर ठगी

देहरादून, 4 मार्च (निस)। दून में सम्पत्ति के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वालो की कमी नहीं है। ऐसे ही एक मामले में एक व्यक्ति को मकान बेचने के नाम पर लाखों रूपये की ठगी का सामना करना पड़ा। मामला कोतवाली क्षेत्रांर्तगत राजपुर रोड का है। अखाड़ा बाजार निवासी संजय कुमार गर्गपुत्र स्व. श्याम स्वरूप गर्ग ने न्यायालय के माध्यम से शहर कोतवाली में आराघर चैक निवासी सुशील कुमार वर्मा पुत्र शम्भू दयाल वर्मा के खिलाफ अपने साथ मकान बेचने के नाम पर 10 लाख रूपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया है। संजय कुमार गर्ग के अनुसार सुशील कुमार वर्मा ने उन्हे 2012 में राजपुर रोड पर स्थित एक मकान दिखाया और कहा कि यह मकान उसका है तथा वह इसे बेचना चाहता है। इस पर संजय कुमार गर्ग ने मकान पसंद आने पर सुशील को को अग्रिम राशी के तौर पर 10 लाख रूपये दे दिये। रजिस्ट्री का समय आने पर भी जब सुशील कुमार ने संजय के नाम पर रजिस्ट्री नहीं की तो उन्हे उस पर शक हो गया। बाद में छानबीन करने पर पता चला कि वह मकान तो किसी और के नाम पर है। इस पर उनके होश उड़ गये और उन्होने सुशील कुमार से अपने पैसे वापस मागें तो वह टालमटोल करने लगा। इस पर संजय ने पुलिस से सहायता लेने का प्रयास किया तो वहंा भी उनकी सुनवाई नहीं हुई यह देखते हुए उन्होने न्यायालय को सहारा लिया जिसके बाद न्यायालय के आदेश पर बीते रोज शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है

खण्डूड़ी ने दी होली की शुभकामनाऐं 

khanduri
देहरादून, 4 मार्च (निस)। उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल से सांसद एवं पार्लियामेन्ट्री समिति डीफेन्स के चैयरमैन मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी एवीएसएम (से.नि.) ने होली के शुभअवसर पर सभी प्रदेशवासियों को होली की शुभकामनाऐं दी है। गढ़वाल सांसद ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि पर्व एवं त्यौहार किसी भी राष्ट्र की जीवनी शक्ति के परिचायक होते हैं। इसी क्रम में होली का त्यौहार आनन्दोत्सव एवं हर्षोत्सव के पर्व के रूप में सर्वोपरि है। होली के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कामना की है कि सभी प्रदेशवासियों का जीवन स्वस्थ्य, इष्र्या-द्वेष से मुक्त, समता, एकता एवं भाई चारे से युक्त समाजिक व्यवस्था, आनन्द एवं उल्लास से भरपूर रहे।

पहाड़ के टेलीफोन से का सवाल संसद में उठाया 

देहरादून, 4 मार्च (निस)। उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल से सांसद एवं पार्लियामेन्ट्री समिति डीफेन्स के चैयरमैन मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी एवीएसएम (से.नि.) के द्वारा अतांरांकित प्रश्न सं0 1553 जो कि संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग से पूछे गये प्रश्न क्या उत्तराखण्ड राज्य के विशेषकर पहाड़ी जिलों में अनेक ब्लाकों एवं गाॅंवों में अभी भी टेलीफोन और इन्टरनेट सेवा उपलब्ध नहीं है और राज्य में मोबाईल सिग्नल और इन्टर कनेक्टीविटी काफी घटिया है तथा भारत सरकार द्वारा राज्य में मोबाईल व इन्टरनेट प्रसार व सिग्नल गुणवत्ता और इन्टरनेट कनेक्टीविटी सुधार के लिये क्या उपाया किये गये हैं के उत्तर में आज भारत सरकार की तरफ से लोकसभा मे रविशंकर प्रसाद मंत्री संचार एवं सूचना प्रोद्योगिकी द्वारा उत्तर दिया गया कि उत्तराखण्ड राज्य के सभी 95 ब्लाक मुख्यालयों में (बी0एच0क्यू0) में दूरसंचार और इंटरनेट सेवाये ंप्रदान की गयी हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखण्ड राज्य के 15,745 गाॅवों में से लगभग 1876 गाॅवों में मोबाईल कवरेज उपलबध नहीं है। उत्तराखण्ड राज्य मंे मोबाईल और इंटरनेट सेवाओं का विस्तार करने के लिये सर्वभौमिक सेवा दायित्व निधि से वित्तीय सहायता प्राप्त करके विभिन्न स्कीमों की योजनायें बनायी जा रही हैं और उन्हे ंलागू किया जा रहा है। इनमें शामिल हैं- राष्ट्रीय आॅप्टीकल फाइबर नैटवर्क(एनओएफएन)ः एफ0ओ0एन परियोजना सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों नामतः बी0एस0एन0एल, रेलटेक और पावर ग्रिड कारपोेरशन इंडिया लि0 के मौजूद फाइबरों का उपयोग करके आॅप्टीकल फाइबर के मध्य से उत्तराखण्ड सहित देश की सभी ग्राम पंचायतों लगभग 2.5 लाख को जोड़ने और ग्राम पंचायतों तथा ब्लाकों के मध्य कनेक्टीविटी के अन्तर को पाटने के लिये जहाॅ कहीं आवश्यक हो वृद्धिशाली फाइबर बिछाने की योजना है तािक बाॅडबेण्ड कनेक्टीविटी उपलब्ध करायी जा सके। अभिगम प्रदाता व सेवा प्रदाता जैसे मोबाईल, इंटरनेट सेवा प्रदाता, केबल टी0वी0 प्रचालक, सामग्री प्रदाता ग्रामीण क्षेत्रो ंमें विभिन्न सेवाओं की शुरूआत कर सकते हैं। ई- स्वास्थ्य, ई- शिक्षा, ई-शासन इत्यादि के लिये विभिन्न  एप्लीकेशन प्रदान किये जायेगें।

राज्य गीत को क्षेत्रीय बोलियों में कराने को लेकर किया प्रदर्शन, डीएम के जरिए सीएम को भेजा ज्ञापन

देहरादून, 4 मार्च (निस)। युवा गढ़वाल सभा ने उत्तराखंड राज्य गीत को गढ़वाली एवं कुमाऊंनी में कराये जाने की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। गढ़वाल सभा ने इस संबंध में जिलाधिकारी के जरिये मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी प्रेषित किया। युवा सभा का कहना है कि इस ओर कार्यवाही न होने पर आंदोलन किया जायेगा। युवा गढ़वाल सभा के कार्यकर्ता जिला मुख्यालय पर एकत्रित हुए और राज्य गीत क्षेत्रीय बोली-भाषा में बनाये जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। गढ़वाल सभा का कहना है कि राज्य गीत समिति द्वारा क्षेत्रीय बोली भाषा को नजरअंदाज कर राज्य गीत हिन्दी में लिखा जाना तय किया गया है। उत्तराखंड प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक रूप से एक पृथक इकाई है। मध्य हिमालय के इस भूभाग का भूगोल इसे उत्तर प्रदेश के मैदानी भागों से अलग रखता है। यहां की जनसंख्या एक करोड़ एक लाख 16 हजार 752 है जिसमें 75 प्रतिशत गढ़वाली, कुमांऊनी एवं पहाड़ी मूल के हैं, इसी कारण इस क्षेत्र की आवश्यकताओं, आशाओं और आकांक्षाओं के स्वरूप भी भिन्न है। राज्यगीत राज्य का प्रतिबिम्ब होता है, इसका क्षेत्रीय भाषा में होना इसलिए जरूरी है, क्योंकि राज्य गीत के माध्यम से ही उस राज्य की संस्कृति पहचान, इतिहास, कला, रीति-रिवाज, वेशभूषा के बारे में पूर्ण जानकारी मिल जाती है, आंचलिक पुट इसलिए इस गीत से लुप्त प्रायः होती बोली को संरक्षण मिलेगा। राज्य गीत इन बोलियों को एक माला में पिराने का कार्य करेगा। यहां पर ढोल सागर नाम के मौखिक ग्रंथ में उल्लेख है कि महेश्वर के 14 सूत्री इत्यादि का नाद ढोल के वादन से निकला था। देवी देवतााओं के लिए गीत, जागर, बसंत ऋ़तु के लिए चैती और रितुरैण धन की रूपाई और गुडाई के लिए हुड़किया बोल, नंदा देवी के लिए जागर, होली गीत, महासू के लिए सुनाक इसके अलावा गांव के आंगन में होने वाले उत्सवों के लिए झुमैलो, केदारू, हारूल, कुलदेई, पवांडा और छपैली जैसे गीत रचे गये हैं। पहाड़ी ढालों पर घास काटते महिला और पुरूष के आपसी संवाद के लिए न्योली, बाजूबंद और लामण के गीत रचे गये थे। उत्तराखंड आंदोलन के गीत आज भी जनमानस की जुबान पर है। गीत गाना या गुनगुनाना एक मानवीय प्रकृति है, यह मानव के विचारों और भावनाओं को सहज अभिव्यक्ति प्रदान करता है और सभ्यता के विकास, आंदोलन पहचान संघर्ष की कहानी को अगली पीढि़यों तक पहंुचाता है। पहाडी बोली के अलावा अन्य भाषा में बनाया गया गीत इस प्रदेश की विशिष्ट हिमालयी पहचान से हटाकर एक छम मुखौटा पहना देगा, राज्य गीत में क्षेत्रीय बोली भाषा का मिश्रण नितांत आवश्यक है अन्यथा लोग मात्र उत्तर प्रदेश का एक उपनिवेश बनकर रह जायेंगे। इस संबंध में जिलाधिकारी के जरिये मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा गया। प्रदर्शन करने वालों में शांति प्रसाद भट्ट, सुशीला ध्यानी, प्रभात ढंडरियाल, मोना काला, हरि शंकर नेगी, मोहन सिंह नेगी, एडवोकेट आरपी पंत, सुलोचना भट्ट, हेमंत बुटोला, ऊषा भट्ट, स्वराज रावत, जानकी देवी, पूनम देवी, सरिता देवी, सावित्री देवी आदि शामिल रहे। 

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