मिस्र की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को साल 2011 के जेलब्रेक मामले में शनिवार को मौत की सजा सुनाई है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की एक रपट के मुताबिक, काहिरा अपराध अदालत ने शनिवार को वाडी अल-नाट्रन जेल ब्रेक मामले में मुर्सी तथा 105 अन्य दोषियों को मौत की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले को समीक्षा के लिए देश के ग्रैंड मुफ्ती के पास भेज दिया है। दो जून को इसपर अंतिम फैसला आएगा। दोषियों के पास सजा के खिलाफ अपील का अधिकार है। ग्रैंड मुफ्ती की राय आमतौर पर औपचारिक मानी जाती है।
मुर्सी पर तत्कालीन राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के खिलाफ विद्रोह के दौरान 25 जनवरी, 2011 को घरेलू और विदेशी आतंकवादियों की सहायता से जेल से भागने का आरोप है। मुस्लिम ब्रदरहुड, फिलिस्तीन के हमास आंदोलन तथा लेबनान के शिया हिजबुल्ला समूह के 130 अन्य दोषियों पर भी यही आरोप है। उन पर जेल तोड़कर भागने व पुलिस अधिकारियों को अगवा करने तथा उनकी हत्या करने का आरोप है। मुर्सी के खिलाफ शनिवार को आया आदेश उनके लिए दूसरा झटका है, क्योंकि बीते महीने अदालत ने साल 2012 में प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करने तथा उन्हें उत्पीड़ित करने के मामले में उन्हें 20 साल जेल की सजा सुनाई है।
वहीं, हमास जासूसी मामले में अदालत ने मुस्लिम ब्रदरहुड के नेता मोहम्मद अल-बेल्तगी व संगठन के उप प्रमुख खैरत अल-शातेर तथा अन्य 14 दोषियों को मौत की सजा सुनाई। यह फैसला भी समीक्षा के लिए ग्रैंड मुफ्ती के पास भेजने का फैसला किया गया है। दोषियों को मिस्र को अस्थिर करने के लिए हमास आंदोलन, हिजबुल्ला समूह तथा मिस्र के नेशनल गार्ड सहित विदेशी ताकतों के साथ साजिश रचने के लिए आरोपित किया गया है। मुर्सी को भी इस मामले में सजा सुनाई गई है, लेकिन उन्हें मौत की सजा नहीं दी गई है।
अल अहराम की रपट के मुताबिक, अगर अदालत दो जून को अपने फैसले में कोई बदलाव नहीं करती है या मुर्सी की अपील मंजूर नहीं होती, तो मिस्र के इतिहास में मुर्सी पहले राष्ट्रपति होंगे जिन्हें फांसी दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि देश भर में व्यापक तौर पर विरोध-प्रदर्शन के बाद जुलाई 2013 में मुर्सी को सेना ने सत्ता से बेदखल कर दिया था। बीते साल मिस्र के प्रशासन ने मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकवादी संगठन करार दिया था।इस संगठन के कई शीर्ष नेताओं को मौत की सजा सुनाई गई है, जिनमें इसके प्रमुख मोहम्मद बादी भी शामिल हैं। हालांकि सजा अभी तक दी नहीं गई है और इसके खिलाफ अपील की जा सकती है।

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