सियासी खेलः हरीश की ढपली से मिल नहीं पा रहे हैं किशोर के राग, काश ! मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा
- सीएम के कामों पर सवालिया निशान लगा रहे किशोर, मौजूदा सियासी हालात से पसोपेश में हैं आम कांग्रेसी
देहरादून,16 मई । हालाता इशारा कर रहे हैं कि सत्तारूढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और मुख्यमंत्री हरीश रावत के सुर एक नहीं हो पा रहे हैं। किशोर की बातों को सीएम अपने अंदाज में हवा में उड़ा रहे हैं तो किशोर भी मुख्यमंत्री के कामों पर सवाल उठाने में पीछे नहीं हैं। हालात ये हैं कि आम कांग्रेसी पसोपेश में है कि संगठन प्रमुख की बात पर काम करें या फिर सत्ता के मुखिया की। लोगों को लग रहा है कि अगर इसी तरह से सीएम और कांग्रेस अध्यक्ष अपनी-अपनी ढपली पर अपना-अपना राग अलापते रहेंगे तो मिशन-2017 को कैसे फतह किया जा सकेगा। किशोर के प्रदेश कांग्रेस संगठन का मुखिया बनने के बाद से ही ये हालात पैदा हुए हैं। बताया जा रहा है कि किशोर ने दस जनपथ में अपनी पहुंच के चलते ही यह पद हासिल किया है। दूसरी तरफ सीएम हरीश भी अपने ही बलबूते पर बहुगुणा को रुखसत करने में सफल रहे हैं। ऐसे में कोई भी खुद को किसी से कमतर मानने को तैयार नहीं है। किशोर कुछ कह रहे हैं तो सीएम अपने अंदाज में उन्हें जवाब दे रहे हैं। कई मुद्दों पर दोनों की राय जुदा हैं। अहम बात यह है कि बंद कमरे में होने वाली बातों को भी खतो-किताबत के जरिए आम किया जा रहा है। ताजा मामला शिक्षा विभाग देख रहे काबीना मंत्री मत्री प्रसाद नैथानी का ही लिया जा सकता है। मंत्री जी तमाम कामकाज छोड़कर डोली लेकर निकले हुए हैं। मंत्री के पास पेयजल विभाग भी हैं। ऐसे में गर्मी के इस मौसम में मंत्री का अवकाश पर जाना किसी की समझ के परे हैं। इसके बाद भी मुख्यमत्री हरीश रावत ने काबीना मंत्री की इस डोली यात्रा को खुद ही रवाना किया। यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया तो संगठन के मुखिया किशोर उपाध्याय खुद को रोक नहीं सके। उन्होंने मीडिया के सामने आकर मंत्री की इस यात्रा पर तमाम सवालात खड़े कर दिए। एक तरफ सीएम डोली यात्रा को रवाना कर रहे हैं तो दूसरी तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष इस यात्रा पर सवाल उठा रहे हैं। दोनों के बीच सुर और ताल मिलने का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी दोनों के बीच इसी तरह के वाक्ये सामने आ चुके हैं। किशोर लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि पीडीएफ कोटे के मंत्रियों का कामकाज की समीक्षा करके कुछ लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जाए। इस पर सीएम ने साफ कहा कि सरकार कैसे चलानी है, यह उनका काम है। किशोर को संगठन के काम पर ही फोकस करना चाहिए। अब कौन सही है और कौन गलत, इसका फैसला तो कांग्रेस हाईकमान को ही करना होगा। लेकिन इतना तय है कि इसका कोई अच्छा संदेश कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं में नहीं गया। इसके बाद किशोर ने सीएम हरीश रावत की चारधाम यात्रा की तैयारियों में गहरी रुचि को देखते हुए भाजपा के हमले का जवाब देने के इरादे से कांग्रेसी विधायकों और मंत्रियों को यात्रा पर जाने का फरमान सुना दिया। किशोर का यह पैतरा सीएम की समझ में नहीं आया और उन्होंने बकायदा एक खत लिखकर किशोर को इस इस निर्देश को वापस लेने का फरमान सुना दिया। नतीजा यह रहा किशोर ने अपने आह्वान को वापस ले लिया। यह अलग बात है कि इसके कुछ रोज बाद ही सीएम ने विपक्षी विधायकों को चारधाम यात्रा पर आने का न्योता दे डाला। कुछ इसी तरह का वाक्या भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को दौरे के दौरान नजर आया। किशोर ने बकायदा प्रेस कांफ्रेस करके अमित शाह को काले झंडे दिखाने का ऐलान किया। लेकिन बाद में सीएम के कहने पर इसे तत्काल वापस भी ले लिया। बताया जा रहा है कि विरोध का आह्वान दिल्ली के निर्देश पर किया गया था। इसे इस तथ्य के प्रकाश में देखें कि युवक कांग्रेस ने किशोर के फरमान के बाद भी विरोध किया और इस काम के लिए दिल्ली से यूथ कांग्रेस के एक राष्ट्रीय महासचिव को यहां भेजा भी गया था। साफ दिख रहा है कि किशोर और हरीश के न तो सुर मिल रहे हैं और न ही ताल। दोनों अपनी-अपनी ढपली बजा रहे हैं। नतीजा यह है कि मिशन-2017 फतह करने की तैयारी में जुटी कांग्रेस के आम कार्यकर्ता पसोपेश में हैं कि सीएम की ताल में ताल मिलाई जाए या फिर संगठन के मुखिया के सुर से सुर। जाहिर है कि इन हालात को किसी भी दशा में किसी भी पार्टी के लिए हितकर नहीं माना जा सकता।
राष्ट्रपति के संबोधन तक दफ्तरों में कैद रहेंगे अफसर-कर्मचारी
देहरादून,16 मई (निस)। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के शहर आगमन और विधानसभा सत्र के संबोधन को लेकर शनिवार को स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने सर्वदलीय बैठक की। इसमें मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृद्येश शामिल रहीं। इसके बाद कार्यमंत्रणा समिति की बैठक हुई, जिसमें सीएम, नेता प्रतिपक्ष और इंदिरा के साथ विस उपाध्यक्ष अनुसुईया प्रसाद मैखुरी ने भी शिरकत की। विस अध्यक्ष की अगुवाई में तीसरी बैठक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हुई। इसमें तय किया गया कि इसमें फैसला लिया गया कि विस में महामहिम राष्ट्रपति की मौजूदगी तक कोई अफसर-कर्मचारी अपने कार्यालय से बाहर नहीं निकलेगा। विस परिसर के अंदर कोई भी नहीं घूम सकेगा। परिसर के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कर्मी तैनात रहेंगे।
फिर बढ़ी नामधारी की मुश्किलें, दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर चलेगा हत्या का मुकदमा
- शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा और भाई की हत्या का मामला, निचली अदालत ने नामधारी पर नहीं पाए थे कोई भी आरोप
- दिल्ली पुलिस ने निचली अदालत के फैसले को दी थी चुनौती
देहरादून,16 मई (निस)। उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद से बर्खास्त किए गए पूर्व भाजपा नेता सुखदेव सिंह नामधारी की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ती दिख रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले को खारिज करके नामधारी के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाने का आदेश जारी किया है। शराब व्यवसायी पोंटी चड्ढा और उसके भाई की हत्या के मामले में मौके पर मौजूद उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष सुखदेव सिंह नामधारी ने ही एफआईआर दर्ज कराई थी। बाद में पुलिस ने अपनी विवेचना में नामधारी को ही हत्या का आरोपी बनाया था। इस मामले की सुनवाई करने के बाद दिल्ली की निचली अदालत ने नामधारी पर कोई भी आरोप सही नहीं पाया था। दिल्ली पुलिस ने निचली अदालत के इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट की एकल बेंच के जस्टिस एसपी गर्ग ने इस मामले में नामधारी समेत कुल 21 आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि आरोप तय करने के स्तर पर निचली अदालत को इस बात की इजाजत नहीं दी जा सकती है कि वह सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दे। वो भी उस स्थिति में जब कि पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य हों। दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले से नामधारी की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ती दिख रही है। निचली अदालत से दोषमुक्त होने के बाद नामधारी फिर से सामान्य जिंदगी जी रहे थे
क्या था मामला
वर्ष 2012 में दक्षिणी दिल्ली स्थित एक फार्म हाउस में पोंटी चड्ढा और उसके भाई हरदीप सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात की पृष्ठभूमि में संपत्ति का विवाद बताया जा रहा है। इस मामले में नामधारी समेत 21 लोगों को आरोपी बनाया गया था। विगत 15 जनवरी 2014 को दिल्ली की एक निचली अदालत ने सभी के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाने से इंकार कर दिया था।
उत्तराखंड के एक अफसर का नाम भी था उछला
इस हत्याकांड के वक्त उत्तराखंड शासन के एक आला अफसर की भी फार्म हाउस के मौजूदगी की चर्चा खासी तेज रही थी। मामला मीडिया में उछला भी। लेकिन बाद में इसे रफा-दफा कर दिया गया और इस अफसर की वहां मौजूदगी का सच आज तक जनता के सामने नहीं आ सका।
लाल बहादुर शास्त्री आईएएस अकादमी मसूरी का मामला, रूबी को मिली जमानत
- पुलिस की लचर पैरवी बनी रूबी की जमानत का आधार
देहरादून,16 मई (निस)। लाल बहादुर शास्त्री आईएएस अकादमी मसूरी में फर्जी ढंग से दाखिल होने की आरोपी रूबी चैधरी को जिला एवं सत्र न्यायालय ने 30 हजार रूपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है। मामले में रूबी के खिलाफ पुलिस की लचर पैरवी रूबी की जमानत का आधार बनी। इससे पहले शुक्रवार को सीएम हरीश रावत ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश ठुकरा दी थी। करीब डेढ़ महीने की जांच के बावजूद एसआइटी मामले में रूबी के खिलाफ पुख्ता सुबूत नहीं जुटा पाई। पुलिस अदालत में साबित नहीं कर पाई कि फर्जी आईएएस बनने के पीछे रूबी चैधरी का असल मकसद क्या था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान जिला जज आरडी पालीपाल की अदालत ने मामले की विवेचक एएसपी ममता बोरा को तलब कर पूछा था कि वह रूबी के फर्जी आईएएस मामले में गिरफ्तार किया गया है तो पुलिस साबित करें कि रूबी का आखिर मकसद क्या था। ममता बोरा ने मामले में किसी नतीजे तक पहुंचने के लिए तीन दिन का वक्त मांगा था, लेकिन शनिवार तक वह अदालत में कुछ पुख्ता दलील नहीं रख पाई, लिहाजा जिला जज आरडी पालीवाल ने रूबी को 30 हजार रूपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। मामले में रूबी की ओर से अधिवक्ता राजीव रतूड़ी ,विवेक गुप्ता और अंबरीश अग्रवाल ने बहस की।
फड़-फेरी व अस्थाई बाजार वालों को हटाना अब प्रशासन के बस में नहीं
देहरादून,16 मई (निस)। भारत सरकार द्वारा नगरीय फेरी व्यवसायी (आजीविका सुरक्षा तथा व्यवसाय विनियम) अधिनियम 2014 लागू होने के बाद फड़-फेरी वालों तथा अस्थाई बाजारों के व्यापारियों को उनके स्थान से हटाना अब पुलिस, प्रशासन, नगर निगम तथा नगर निकायों के अधिकारियों के बस में नहीं रह गया है। इस अधिनियम के अनुसार वेडिंग जोन निर्धारित करने या पथ विक्रेताओं को स्थानांतरित करने पर निर्णय लेने व कार्यवाही करने का अधिकार अब केवल धारा 22 के अन्तर्गत गठित 40 प्रतिशत फेरी व्यवसासियोें के प्रतिनिधित्व वाली ”नगर फेरी समिति” को है। राष्ट्रीय स्तरीय सूचना अधिकार कार्यकर्ता तथा कानून विशेषज्ञ नदीम उद्दीन एडवोकेट को सूचना अधिकार के अन्तर्गत नगरीय फेरी व्यसायी (अजीविका सुरक्षा तथा फेरी व्यवसाय विनियम) अधिनियम 2014 के अन्तर्गत उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाई गयी नियमावली की प्रति शहरी विकास निदेशालय के लोेक सूचना अधिकारी ने उपलब्ध करायी है। उसके नियम 6(2) के अनुसार भी नगर फेरी समिति द्वारा वर्तमान फेरी वालों तथा अस्थाई व्यापरियों का सर्वेक्षण तथा नगर फेरी समिति द्वारा उन्हें लाइसंेस जारी होने तक न तो हटाया जायेगा और न ही विस्थापित किया जायेगा। श्री नदीम को शहरी विकास निदेशालय द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना के अनुसार उत्तराखंड नगरीय फेरी व्यवसायी (अजीविका सुरक्षा तथा फेरी व्यवसाय विनियम) नियमावली 2015 के नियम 12 तथा अधिनियम की धारा 22 के अनुसार नगरीय फेरी समिति में न्यूनतम 40 प्रतिशत सदस्य फेरी संगठनों से हांेगे जो उनके द्वारा स्वयं चयनित किये जायेंगेे जिसमें न्यूनतम एक तिहाई महिला प्रतिनिधि होनी अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त न्यूनतम 10 प्रतिशत सदस्य स्वयं सेवी संस्था तथा समुदाय आधारित संगठनों से हांेगे। इसके अतिरिक्त इस समिति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक तथा अपंग व्यक्तियों को नगर फेरी समिति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जायेगा। श्री नदीम को उपलब्ध करायी गयी नियमावली के नियम 16 तथा फेरी अधिनियम की धारा 27 के अन्तर्गत फेरी वालों तथा अस्थाई व्यापारियों के पुलिस तथा अन्य अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न किये जाने पर भी रोक लगायी गयी है। श्री नदीम ने बताया कि अगर किसी अधिकारी द्वारा भारत सरकार द्वारा 01 मई 2014 से लागू फेरी व्यवसायी अधिनियम के उल्लंघन में किसी अस्थाई व्यापारी, फेरी, फड़ वाले या अस्थाई बाजार को स्थानांरित करने तथा हटाने की कार्यवाही की जाती है तो वह गैर कानूनी है तथा संबंधित अधिकारियों के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 166, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारास 13(1) (डी) तथा 13(1) (सी) तथा एस.सी.एस.टी. एक्ट के अपराधों के मुकदमें दर्ज कराये जा सकते है। इसके अतिरिक्त लोकायुक्त, पिछड़ा, अल्पसंख्यक, अ.जाति, अ.ज.जा. महिला, मानवाधिकार तथा बाल अधिकार आयोग की शरण लेने के साथ सम्बन्धित सेवा नियमों के अन्तर्गत भी ऐसे अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही करायी जा सकती है तथा नुकसान का मुआवजा न्यायालयों के माध्यम से वसूला जा सकता है।
कांग्रेस ने चुनाव के मद्देनजर संगठनात्मक व्यवस्था की सुदृढ़
- प्रदेष महामंत्रियों को जनपद प्रभारी तथा प्रदेष सचिवों को सह प्रभारी बनाया गया
देहरादून,16 मई (निस)। प्रदेष कांग्रेस अध्यक्ष किषोर उपाध्याय ने प्रदेष में कांग्रेस संगठन को सुदृढ करने एवं पार्टी सदस्यता अभियान कार्यक्रम को गति देते हुए प्रत्येक मतदान केन्द्र तक सदस्यता अभियान सम्पन्न करवाने के उद्देष्य से प्रदेष महामंत्रियों को जनपद प्रभारी तथा प्रदेष सचिवों को सह प्रभारी नियुक्त किया है। प्रदेष कांग्रेस उपाध्यक्ष जोत ंिसह बिश्ट ने उपरोक्त जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेष अध्यक्ष किषोर उपाध्याय द्वारा पार्टी के सभी 28 संगठनात्मक जिलों में पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों के सफल संचालन हेतु प्रदेष महामंत्रियों को जनपद का प्रभारी तथा प्रदेष सचिवों को सह प्रभारी का दायित्व सौंपा गया है। इसके तहत जनपद अल्मोड़ा में प्रदेश महामंत्री श्री जगत सिंह खाती प्रभारी तथा प्रदेश सचिव श्री दीप सती सह प्रभारी, रानीखेत में प्रदेश महामंत्री श्री खजान पाण्डे तथा प्रदेश सचिव श्री मोहन गोस्वामी सह प्रभारी, बागेश्वर में प्रदेश महामंत्री श्री विजय सिजवाली तथा प्रदेश सचिव श्री राम पाण्डे सह प्रभारी, चम्पावत में प्रदेश महामंत्री श्री रामंिसह कैडा तथा प्रदेश सचिव श्री ललित जोशी सह प्रभारी, चमोली में प्रदेश महामंत्री श्री प्रदीप बगवाडी तथा प्रदेश सचिव श्री मनोज धनगर सह प्रभारी, देहरादून ग्रामीण में प्रदेश महामंत्री श्री इरशाद तथा प्रदेश सचिव श्री कुमुद शर्मा सह प्रभारी, महानगर देहरादून में प्रदेश उपाध्यक्ष श्री एस0पी0 सिंह इन्जीनियर तथा प्रदेश सचिव श्री जयप्रकाश नौटियाल सह प्रभारी, ऋषिकेश में प्रदेश महामंत्री श्री जोत ंिसह नेगी तथा प्रदेश सचिव श्रीमती ममता गुरूंग सह प्रभारी, हरिद्वार महानगर में प्रदेश महामंत्री श्री दिनेश व्यास तथा प्रदेश सचिव श्रीमती सुनीता प्रकाश सह प्रभारी, हरिद्वार ग्रामीण में प्रदेश महामंत्री श्रीमती गोदावरी थापली तथा प्रदेश सचिव श्री सूरज राणा सह प्रभारी, रूड़की ग्रामीण में प्रदेश महामंत्री श्री घनानन्द नौटियाल तथा प्रदेश सचिव श्री संजय किशोर सह प्रभारी, रूड़की महानगर में प्रदेश महामंत्री श्री यामीन अंसारी तथा प्रदेश सचिव श्री विवेक शर्मा सह प्रभारी, नैनीताल में प्रदेश महामंत्री श्रीमती शिल्पी अरोड़ा तथा प्रदेश सचिव श्री महेश जोशी सह प्रभारी, कालाढूंगी में प्रदेश महामंत्री श्री सतपाल ब्रहमचारी तथा प्रदेश सचिव श्री तारक बसाल सह प्रभारी, हल्द्वानी महानगर में प्रदेश महामंत्री श्री करण महरा तथा प्रदेश सचिव श्री गणेश उपाध्याय सह प्रभारी, पौडी गढ़वाल में प्रदेश महामंत्री श्री राजेश जुवांठा तथा प्रदेश सचिव श्री मूर्ति ंिसह नेगी सह प्रभारी, कोटद्वार में प्रदेश महामंत्री मास्टर सतपाल तथा प्रदेश सचिव श्री गोपाल चमोली सह प्रभारी, पिथौरागढ में प्रदेश महामंत्री श्री मोहन पाठक तथा प्रदेश सचिव श्रीमती बिमला सजवाण सह प्रभारी, डीडीहाॅट में प्रदेश महामंत्री श्री हरीश पनेरू तथा प्रदेश सचिव श्री राजेन्द्र खववाल सह प्रभारी, रूद्रप्रयाग में प्रदेश महामंत्री श्री नवीन जोशी तथा प्रदेश सचिव श्री सुशील रावत सह प्रभारी, टिहरी में प्रदेश महामंत्री श्री जयपाल जाटव तथा प्रदेश सचिव श्री ताहिर अली सह प्रभारी, देवप्रयाग में प्रदेश महामंत्री श्री ओ0पी0 चैहान तथा प्रदेश सचिव श्रीमती आशा टम्टा सह प्रभारी, बाजपुर में प्रदेश महामंत्री श्री अर्येन्द्र शर्मा तथा प्रदेश सचिव श्री अरूण चैहान सह प्रभारी काशीपुर में प्रदेश महामंत्री श्री के0एस0 राणा तथा प्रदेश सचिव श्री महेश शर्मा सह प्रभारी, रूद्रपुर में प्रदेश महामंत्री श्री आननन्द रावत तथा प्रदेश सचिव श्रीमती पुष्पा गोस्वामी सह प्रभारी, उधमसिंह नगर में प्रदेश महामंत्री श्री राजपाल खरोला तथा प्रदेश सचिव श्री मनीषी तिवारी सह प्रभारी, जिला उत्तरकाशी गंगाघाटी में प्रदेश महामंत्री श्री राजपाल बिष्ट तथा प्रदेश सचिव श्री अशोक धींगान सह प्रभारी, जिला उत्तरकाशी यमुनाघाटी में प्रदेश महामंत्री श्री सुबोध राकेश तथा प्रदेश सचिव श्री दीप बोरा सह प्रभारी होंगे। मा0 प्रदेष अध्यक्ष जी द्वारा सभी प्रभारीगणों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने दायित्वों का निश्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए वरिश्ठ कांग्रेसजनों के सहयोग से जनपद में कांग्रेस संगठन को मजबूती प्रदान करने का कार्य करेंगे। प्रभारीगणों से यह भी अपेक्षा है कि अविलम्ब अपने प्रभार के जिले में अपना कार्य प्रारम्भ करेंगे।
किसाऊ परियोजना पर उत्तराखण्ड व हिमाचल के बीच चर्चा, मुख्यमंत्री से की हिमाचल के मुख्यसचिव ने मुलाकात
- दोनों राज्य असहमतियों को करें दूर: हरीष रावत
देहरादून,16 मई (निस)। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि किसाऊ परियोजना उŸाराखण्ड व हिमाचल प्रदेश दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है। इसको लेकर दोनों राज्यों में जो भी असहमतियां हैं,उन्हें दूर किया जाना चाहिए। शनिवार अपराह्न में हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव पी मित्रा ने मुख्यमंत्री हरीश रावत से मुलाकात कर किसाऊ परियोजना पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे जब केंद्र में जल संसाधन मंत्री थे तब किसाऊ व हिमाचल की रेणुका परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के तौर पर लिया गया था। इन परियोजनाओं की लागत के लिए 90ः10 के अनुपात का प्राविधान किया गया था। किसाऊ परियोजना में 90 प्रतिशत धनराशि केंद्र द्वारा जबकि 5-5 प्रतिशत धनराशि हिमाचल व उŸाराखण्ड द्वारा दी जानी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना आयोग को समाप्त करने से उŸाराखण्ड व हिमाचल प्रदेश को नुकसान हुआ है। अपने विशेष राज्य के स्तर को बरकरार रखने के लिए दोनों राज्यों को सम्मिलित प्रयास करने होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसाऊ परियोजना को प्राथमिकता देते हुए इस पर जल्द से जल्द दोनों राज्यों में सहमति बनाई जाए। वहीं दूसरी ओर किसाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना निर्माण के लिए संयुक्त उपक्रम बनाने के बारे में हिमाचल प्रदेश के साथ शनिवार को सचिवालय में हुई वार्ता सफल रही। इस परियोजना से मिलने वाले सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभों के हिस्सेदार दोनों राज्य बराबर-बराबर होंगे। हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव पी. मित्रा और उत्तराखंड के मुख्य सचिव एन. रविशंकर के साथ हुई बैठक में दोनो राज्यों में सहमति बन गई है। किसाऊ परियोजना हेतु संयुक्त उपक्रम (जेवी) (660 मेगावाट) के बनाने के लिये एमओयू ड्राफ्ट पर दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा हुई। ड्राफ्ट पर आम सहमति बन गई है। इसे दोनों राज्यों की कैबिनेट से मंजूरी के लिए रखा जायेगा। कैबिनेट से अनुमोदन के बाद उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मुख्य मंत्रियों की उपस्थिति में एमओयू पर हस्ताक्षर किया जायेगा। बैठक में अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, सचिव ऊर्जा उमाकांत पवांर, सचिव सिंचाई आनन्द वर्द्धन, हिमाचल प्रदेश के प्रमुख सचिव ऊर्जा एसकेबीएस नेगी, एमडी हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन डीके शर्मा, निदेशक सिविल एके गुप्ता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
अब तीन दिन जनता से नहीं मिल पायेंगे मुख्यमंत्री
देहरादून,16 मई (निस)। मुख्यमंत्री के मीडिया समन्वयक राजीव जैन ने बताया है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत से 17, 18 व 19 मई, 2015 को सामान्य मुलाकात नहीं हो पायेंगी। मा. राष्ट्रपति के प्रस्तावित कार्यक्रम व शासकीय व्यस्तताओं के कारण मुख्यमंत्री श्री रावत से सामान्य तौर पर होने वाली मुलाकाते नही हो पायेंगी, जबकि अन्य पूर्व निर्धारित कार्यक्रम यथावत रहेंगे।
ब्रीपिफंग में दिए पुलिसकर्मियांे को दिशा-निर्देश, राष्ट्रपति के दौरे को लेकर हर तैयारी पूर्ण
देहरादून। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के दून दौरे की सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। शनिवार को ड्यूटी पर लगाए गए पुलिसकर्मियों को अपर पुलिस महानिदेशक ;सुरक्षा एवं कानून व्यवस्थाद्ध अनिल रतूड़ी ने दिशा निर्देश दिए। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे जनपद को कड़े सुरक्षा के दायरे में रखा गया है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी सोमवार को उत्तराखंड विधानसभा में संबोधन करना है। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। राष्ट्रपति के दून में रहने के दौरान जहां सुरक्षा व्यवस्था चाक चैबंद रहेगी वहीं इस दौरान दून के कई रास्तों को जीरो जोन घोषित कर दिया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से 14 एसपी, 18 डीएसपी, तीस निरीक्षक, 100 उपनिरीक्षक सहित भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके अलावा दिल्ली से आए विशेष सुरक्षा दस्ते भी सुरक्षा तैयारियों का जायजा ले रहे है। शनिवार को पुलिस लाईन मंें राष्ट्रपति ड्यूटी में लगाए गए पुलिसकर्मियांे को दिशा-निर्देश दिए गए। कल तैयारियों को लेकर सुरक्षा अध्किारी रिहर्सल करेंगे। पुलिसकर्मियांे को ब्रीपफ करते हुए एडीजी लाॅ एंड आर्डर अनिल रतूड़ी ने कहा कि ड्यूटी के दौरान हर तरफ से सुरक्षाकर्मी सतर्कता बरतें और अपने ड्यूटी स्थान पर तय समय पर पहुंचे। सभी वाहनों को दुरस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं एवं संदिग्धें से निपटने के लिए त्वरित कार्रवाई के लिए कहा गया है। हालांकि राष्ट्रपति दौरे के दौरान कुछ मार्गोे को पूरी तरह से बंद रखा जाएगा लेकिन इसके बावजूद भी यातायात डायवर्ट की इस व्यवस्था को सख्ती के साथ अमल में लाने के आदेश दिए गए हैं। जहां एक तरफ पुलिस ने अपनी सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं वहीं स्वास्थ्य, लोनिवि एवं दूसरे विभागों को भी इस दौरान किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रपति 18 मई को दून आऐंगे और 19 मई को वापस दिल्ली जाऐंगे। इस दौरान वे राजभवन में ही रहेंगे। राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से हाईटैक प्रबंध किए गए हैं।

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