संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने आज विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर महत्वपूर्ण विधेयकों को संसदीय समितियों में भेजने पर अड़ा रहा और इस तरह उसने देश की प्रगति और विकास के सरकार के प्रयासों में रोड़ा अटकाने का काम किया।
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के समापन पर यहां संवाददाता सम्मेलन में श्री नायडू ने हर विधेयक को संसद की स्थायी या किसी अन्य समिति को भेजने तथा लगभग हर रोज प्रश्नकाल स्थगित करने का नोटिस देने की विपक्ष की प्रवृति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि उसे अपनी इस भूमिका के बारे में विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी पारदर्शिता तथा लोकतांत्रिक तरीके के साथ काम करना चाहती है लेकिन उसके प्रगति से जुडे प्रयासों पर ब्रेक लगाने के लिए प्रक्रिया के नाम पर विधेयकों को एक या दूसरी समिति को भेजने की मांग निश्चित रूप से ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक बार संसदीय समिति में भेजे गये विधेयक को दोबारा उसी समिति में भेजने की मांग की जाती है। भूमि अधिग्रहण, वस्तु एवं सेवा कर तथा रियल एस्टेट विधेयक के मामले में ऐसा ही हुआ। इन विधेयकों पर विभिन्न समितियों में विस्तार से चर्चा हो चुकी है। इन्हें फिर से संसदीय समिति में भेजने से कानून बनने में देरी ही होगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में सभी दलों को दलगत राजनीति से उपर उठकर निर्णय लेने चाहिए। प्रकियाओंं का उद्देश्य समीक्षा करना होता है और इनके कारण कानून बनाने में देरी नहीं होनी चाहिए। श्री नायडू ने कहा कि सत्ता और विपक्ष दोनों को मिलकर संसद के माध्यम से लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने का मंच बनना चाहिए।
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