सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर ने यहां कहा कि 40 फीसदी से अधिक भारतीय बुनियादी अधिकारों और अवसरों से वंचित हैं। न्यायमूर्ति ठाकुर राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा, "1.25 अरब भारतीयों में 40 फीसदी बुनियादी अधिकारों और अवसरों से वंचित हैं।" यहां शनिवार को विचार-गोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "40 फीसदी से अधिक भारतीय गरीबी रेखा के नीचे रह रहे हैं। वे बिना साक्षरता, बिना बुनियादी अवसरों और धनाभाव में रह रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि एनएएलएसए और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण वंचित, कबायलियों और जनजातीयों को लाभान्वित करने के लिए विभिन्न कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने और जागरूकता फैलाने की दिशा में काम कर रहा है। न्यायमूर्ति ने कहा, "कानून के तहत न्यायाधीश न्याय और कानूनी मामले देखते हैं, लेकिन एक पिता को भी अपने बच्चे के साथ न्याय करना चाहिए और पति-पत्नी को एक-दूसरे के साथ न्याय करना चाहिए, एक सांसद या विधायक को अपने क्षेत्र के लोगों के साथ न्याय करना चाहिए और एक मंत्री को अपने से संबंधित विषयों के साथ न्याय करना चाहिए।"
न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा, "हमारा लक्ष्य उपेक्षित लोगों को सहयोग देना होना चाहिए। हमारी व्यवस्था में अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।" एनएएलएसएस के कार्यकारी अध्यक्ष ने बताया कि सुविधाविहीनों और अशिक्षित लोगों को उनके अधिकार को लेकर जागरूक करना एक चुनौती है, जहां लोगों में कानून संबंधी जानकारी उम्मीद से कम है। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार, राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष तथा त्रिपुरा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश उत्पलेन्दु बिकास साह ने भी विचार-गोष्ठी को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्याíथयों, युवाओं तथा अन्य में जागरूकता फैलाना था।

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