भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन की जरूरत नहीं: योगेन्द्र यादव - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

मंगलवार, 23 जून 2015

भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन की जरूरत नहीं: योगेन्द्र यादव

भूमि अधिग्रहण का मुद्दा कुछ समय से भले ही शांत हो गया हो और चौतरफा आलोचनाओं के कारण केंद्र सरकार ने मुद्दे पर चुप्पी साध ली हैं पर देश के विभिन्न किसान और मजदूर संघठन  भूमि अधिग्रहण बिल पर आवाज उठाते रहते हैं । योगेंद्र यादव की अगुवाई में स्वराज अभियान के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को भूमि अधिग्रहण बिल पर बनी संयुक्त संसदीय समिति के सामने अपनी आपत्तियां रखीं। अभियान की दलील थी कि 2013 का बिल किसान समर्थक बिल हैं और भूमि अधिग्रहण कानून-2013 में संशोधन के प्रस्ताव गैर-जरूरी हैं। इससे किसानों के हितों पर बुरा असर पड़ेगा। करीब चालीस मिनट तक चली बैठक में समिति के अध्यक्ष एसएस अहलूवालिया भी मौजूद थे।

स्वराज अभियान के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में योगेंद्र यादव, आनंद कुमार, राजीव गोदारा व अनुपम सिंह शामिल थे। समिति के सामने पुराने बिल का समर्थन करते हुए कहा गया कि 2013 का भूमि अधिग्रहण कानून काफी हद तक किसानों के हक में था। लेकिन मौजूदा सरकार कानून में संशोधन कर रही है।

समिति का कहना हैं कि संसद में इसके पास होने से भूमि अधिग्रहण के 80 फीसदी से ज्यादा मामलों में किसानों की अनुमति की जरूरत नहीं रहेगी। इसका सीधा असर किसानों के हित पर पड़ेगा। लिहाजा यह संशोधन मंजूर नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, अगर दूसरे केंद्रीय कानूनों को भूमि अधिग्रहण कानून के तहत लाना था तो इसके लिए एक नोटिफिकेशन ही पर्याप्त था। कानून में संशोधन की जरूरत ही नहीं थी।

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए योगेंद्र यादव ने बताया कि संयुक्त संसदीय समिति के सामने हमने उस सारे मसलों को रखा, जय किसान आंदोलन के तहत जिसे उठाया जा रहा है। सदस्यों ने हमारी बातों को गंभीरता से सुना। साथ ही इस दिशा में उपयुक्त कदम उठाने का भरोसा भी जताया।

कोई टिप्पणी नहीं: