महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे का नाम बुधवार को दो सौ करोड़ रुपये के एक घोटाले में सामने आया है। यह मामला 204 करोड़ रुपये के ठेके देने में की गई अनियमितता से संबंधित है। कांग्रेस ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। दिवंगत केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा एक ही दिन (13 फरवरी) में कई सरकारी प्रस्तावों के जरिए करोड़ों रुपये के ठेके देने की आरोपी हैं। उन्होंने इसके लिए न तो ई-टेंडर का रास्ता अपनाया और न टेंडर जारी करने का ही।
मुंडे के खिलाफ लगे आरोपों में विद्यार्थियों के लिए वर्कबुक्स, पानी के फिल्टर, कुपोषित बच्चों के लिए ग्रोथ मॉनिटरिंग मशीन, दवाइयां और चिक्की के लिए ठेके जारी करने में की गई अनियमितताएं शामिल हैं। पंकजा इस समय अमेरिका में हैं और उन्होंने ईमेल के जरिए भेजे एक बयान में इन सभी आरोपों को हास्यास्पद बताया है और कहा है कि भ्रष्टाचार मिटाने के लिए उनके द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों के कारण कुछ धन लोभी उनसे खिन्न हो गए हैं।
मुंडे ने कहा, "जहां तक मेरा मामला है, मैंने कोई नियम नहीं तोड़ा है। मुझे किसी आरोप का भय भी नहीं है। मैं बच्चों और महिलाओं के लिए यथासंभव सर्वश्रेष्ठ करने के लिए हूं।" मुंडे के इस बयान से असंतुष्ट महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने राज्य भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और मुंडे के खिलाफ आरोपों की जांच की मांग की है।
पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने इस मामले को गंभीर बताया है और सरकार से आग्रह किया है कि इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया जाए। दिसंबर 2014 में निर्धारित राज्य सरकार के नियमानुसार, तीन लाख रुपये से अधिक के सभी ठेकों के लिए ई-टेंडर जारी करना जरूरी है। और दर तय होने की सूरत में इस वर्ष अप्रैल से एक करोड़ रुपये कीमत के ठेकों के लिए ई-टेंडर अनिवार्य है। पंकजा के विभाग की ओर से जारी एक स्पष्टीकरण के अनुसार, केंद्र सरकार के आपूर्ति एवं निपटान महानिदेशक द्वारा स्वीकृत दरों के तहत खरीददारियां की गई।

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