सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर (25 जून) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 25 जून 2015

सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर (25 जून)

पीजी काॅलेज में जनभागीदारी समिति की बैठक सम्पन्न

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चन्द्रशेखर आजाद शासकीय स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय में जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष कलेक्टर डाॅ. सुदाम खाड़े एवं विधायक श्री सुदेश राय की उपस्थिति में आज बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में समिति के सदस्य, श्री मायाराम गौर, श्री शैलेष तिवारी, श्री रविन्द्र बांगरे, कु. कविता जायसवाल, श्री पारस उइके, श्री रामप्रसाद बामनिया, श्री हरिकिशन कीर सदस्य उपस्थित थे। बैठक से पूर्व कलेक्टर डाॅ. खाडे, विधायक श्री राय एवं समिति के सदस्यों ने महाविद्यालय का निरीक्षण कर महाविद्यालय के अद्योसंरचना और अन्य विकास कार्य व अतिथि विद्धानों को पुनः रखने संबंधी कार्य सम्पन्न करने हेतु निर्णय लिए।  उपरोक्त सभी कार्य राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (छ।।ब्द्ध द्वारा निरीक्षण के पूर्व किया जाना है।  

बच्चों को कुपोषण से बचाने विटामिन “ए” एवं आयरन की खुराक निशुल्क दिलाएँ

सरकार की पहल पर कुपोषण पर नियंत्रण के मकसद से बाल सुरक्षा माह मनाया जा रहा है। आम-जन से अपील की गई है कि वे बाल सुरक्षा माह के दौरान 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को निर्धारित मात्रा में विटामिन “ए” का घोल पिलवाएँ। साथ ही 6 माह से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को आयरन सीरप की खुराक भी अवश्य दिलवाएँ। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में यह खुराक बाल सुरक्षा माह के दौरान निशुल्क दी जा रही हैं। टीकाकरण से किसी कारणवश वंचित रह गए बच्चों का टीकाकरण भी बाल सुरक्षा माह के दौरान स्वास्थ्य अमले द्वारा किया जा रहा है। गत 16 जून से शुरू हुआ बाल सुरक्षा माह अगले माह 16 जुलाई तक जारी रहेगा। बाल सुरक्षा माह में विटामिन “ए” एवं आयरन की पूर्ति के लिये जो खुराक दी जा रही है वह बच्चों के लिये संजीवनी से कम नहीं है। विटामिन “ए” एवं आयरन की खुराकों से बाल मृत्यु दर के मुख्य कारक डायरिया से होने वाली मृत्यु में 40 प्रतिशत, मीजल्स से होने वाली मृत्यु में 50 प्रतिशत और बाल एवं अन्य कारणों से होने वाली मृत्यु दर में 20 फीसदी तक कमी लाई जा सकती है। बाल मृत्यु दर का प्रमुख कारण कुपोषण है। पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी कुपोषण को बढावा देती है। कुपोषण की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और बच्चे बार-बार संक्रमण से ग्रसित हो जाते हैं। विटामिन “ए” की खुराक, आयरन सीरप और नियमित टीकाकरण से कुपोषण से निजात पाई जा सकती है।

सोयाबीन बोवनी के लिए किसानों को सलाह

सोयाबीन की बौवनी होना प्रारम्भ हो चुकी है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि सोयाबीन की बौवनी हेतु सामान्यतः 15 जून से 7 जुलाई तक उपयुक्त समय होता है। सोयाबीन की बौवनी भूमि मे पर्याप्त नमी होने की स्थिति में ही करें तथा बौवनी से पूर्व सोयाबीन के बीज की अंकुरण क्षमता की जांच करें जो कि न्यूनतम 70 प्रतिशत होना चाहिये। किसानों को सलाह दी गई है कि बीज का अंकुरण 70 प्रतिषत से कम होने पर उसी अनुपात से बीज दर बढ़ाकर बौवनी करें। बौवनी करने से पहले सोयाबीन के बीज को अनुषंसित फफूंदनाशक (2 ग्राम थायरम एवं का 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम या ट्रायकोडर्मा 5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से) के साथ बीजोपचार अवश्य करें। जहां पर यलो मोजाइक वायरस का प्रकोप होना पाया गया है वहां पर सोयाबीन बीज को कीटनाषक थायोमिथाक्सम 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें। इसके पश्चात् ब्रेडी राइजोबियम एवं पी.एस.बी. जीवाणु खाद से बीज को उपचारित करें। साथ ही वर्षा की अनिश्चितता एवं सूखे या अतिवृष्टि की स्थिति में सोयाबीन की फसल में होने वाली सम्भावित उत्पादन में कमी को देखते हुये बी.बी.एफ. सीड डीय्लए फब्र्स सीड ड्रील का उपयोग कर सोयावीन की बौवनी करें। इन मशीनों की उपलब्धता न होने पर सुविधा अनुसार 6 से 9 कतारों के पश्चात् देशी हल चलाकर नालियां बनायें। बौवनी करते समय बीज की गहराई का उचित ध्यान रखने के लिए कहा गया है जिससे  अंकुरण प्रभावित न हो इसलिये पंजी लगे सीड ड्रील का प्रयोग करें। सोयाबीन की उचित समय पर बौवनी करने पर कतार से कतार की दूरी 45 से.मी. रखें। जहां पर अंकुरण हो चुका है वहां पर यदि उचित पौध संख्या 4.5 से 5 लाख प्रतिहेक्टर नहीं है तो रिक्त स्थान को पुनः बौवनी कर उचित पौध संख्या का प्रबंधन करने के लिए कहा गया है। 

अजमेर की तीर्थ यात्रा 14 जुलाई को

मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत 14 जुलाई,2015 को अजमेर की तीर्थ यात्रा आयोजित की गई है। इस यात्रा के लिए सीहोर जिले से 72 तीर्थ यात्रियों का कोटा निर्धारित किया गया है। इच्छुक व्यक्ति पूर्ण रूप से भरे हुए अपने आवेदन पत्र 03 जुलाई,2015 तक संबंधित जनपद पंचायत, नगरपालिका अथवा नगर पंचायत के कार्यालय में जमा कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में एक बार ही तीर्थ यात्रा कर सकता है। 

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