फंसे यात्रियों का हेलीकॉप्टर की मांग को लेकर बद्रीनाथ में प्रदर्शन, केदारनाथ, बदरीनाथ व हेमकुंड की यात्रा फिलहाल स्थगित
- कुछ यात्रियों ने हेलीकाॅप्टर से भोले बाबा के दर्शन किए
देहरादून, 27 जून(निस)। पूरे प्रदेश में मौसम साफ रहने से शनिवार को लोगों ने राहत की सांस ली। केदारनाथ, बदरीनाथ व हेमकुंड की यात्रा फिलहाल स्थगित है। हालांकि शनिवार सुबह कुछ यात्रियों ने हेलीकॉप्टर के जरिये केदारनाथ पहुंचकर भोले बाबा के दर्शन किए। घांघरिया में मौजूद हेमकुंड यात्रियों को हेलीकॉप्टर से जोशीमठ पहुंचाया जा रहा है। बदरीनाथ में दो दिन से फंसे यात्रियों ने हेलीकॉप्टर की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया, लेकिन प्रशासन ने इससे इन्कार करते हुए यात्रियों को पैदल ही वापस लौटने की सलाह दी। वहीं गंगोत्री व यमुनोत्री यात्रा सुचारु है। गुरुवार को हुई बारिश से चमोली में बदरीनाथ हाईवे मलबा आने से कई स्थानों पर अवरुद्ध हो गया था। लामबगड़, हनुमान चट्टी, हाथी पहाड़ आदि स्थानों पर मार्ग से मलबा हटाने के लिए बीआरओ के जवान शनिवार की सुबह से जुटे हुए हैं। हेंमकुंड साहिब यात्रा के पड़ाव घांघरिया में इस समय करीब ढाई हजार यात्री हैं। इन्हें सकुशल हेलीकॉप्टर से निकालने का काम शनिवार को भी जारी है। बदरीनाथ में गुरुवार से फंसे यात्री भी हेलीकॉप्टर का इंतजार कर रहे थे। शनिवार की सुबह यात्रियों ने हेलीपैड में पहुंचकर शासन व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। सूचना पर मंडलायुक्त सीएस नपलच्याल व जिलाधिकारी चमोली अशोक कुमार मौके पर पहुंचे और उन्होंने यात्रियों को समझाया कि वे पैदल ही यात्रा करें। इस पर यात्रियों ने पैदल ही जोशीमठ के लिए कूच करना शुरू कर दिया। बदरीनाथ से तीन बीमार यात्रियों को हेलीकॉप्टर से जोशीमठ पहुंचाया गया। सुरक्षा के मद्देनजर केदारनाथ यात्रा फिलहाल तीस जून तक स्थगित है। केदारनाथ गौरीकुंड हाईवे सोनप्रयाग तक ही खुला है। शनिवार को एक निजी कंपनी के केदारनाथ में दस यात्रियों को लेकर दो चक्कर लगाए। उधर, सुक्की में हाईवे पर आया मलबा हटाने के बाद शुक्रवार की शाम से ही गंगोत्री यात्रा सुचारु हो गई थी। यमुनोत्री यात्रा भी सुचारु है। पौड़ी जनपद के करीब आठ व टिहरी जनपद के दो संपर्क मार्ग अभी भी अवरुद्ध हैं।
टब कांग्रेस विधायक ने भी की नाम सार्वजनिक करने की मांग
देहरादून, 27 जून(निस)। प्रवर्तन निदेशालय के पास सूबे के दो मंत्रियों के नाम आने के मामले में कांग्रेस विधायक सुबोध उनियाल ने सरकार से मामले की जांच कर नाम सार्वजनिक करने की मांग की। शनिवार को ढालवाला में आयोजित प्रेस वार्ता में विधायक सुबोध उनियाल ने कहा की प्रदेश में मात्र 11 मंत्री हैं। नाम सार्वजानिक न होने तक सभी मंत्री सवाल के घेरे में रहेंगे। उन्होंने मांग कि मुख्यमंत्री जांच कर स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने बताया कि नरेंद्र नगर विधानसभा का सबसे पिछडा क्षेत्र दोगी पट्टी अब विकास की मुख्य धारा में शामिल हो गया है। दोगी में मिनी तहसील, डिग्री कॉलेज और आइटीआइ जल्द अस्तित्व में आएंगी। उन्होंने कहा कि नरेंद्रनगर विधानसभा के सभी गांव सड़क मार्ग से जुड़ गए हैं।
वाहन की चपेट में आने से दो यात्रियों की मौत
देहरादून, 27 जून(निस)। बदरीनाथ हाईवे पर तोताघाटी के समीप हेमकुंड से लौट रहे बाइक सवार दो सिख यात्रियों की अज्ञात वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई। दोनो युवक विजय नगर अमृतसर के निवासी थे। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस के अनुसार शनिवार को दो सिख यात्री हेमकुंड दर्शन कर बाइक से वापस लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि हाइवे पर तोताघाटी के समीप एक अज्ञात वाहन ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की शिनाख्त पंजाब के विजयनगर अमृतसर निवासी विक्रम जीत सिंह (22 वर्ष) पुत्र सुखदेव सिंह, वीर सिंह (21 वर्ष) पुत्र राम सिंह के रूप में की गई। इस दौरान घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जुटी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में ले लिए। पुलिस ने मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया है। वहीं टक्कर मारने वाले वाहन की भी तलाश की जा रही है।
महसूस किए गए हल्के भूंकप के झटके
पिथौरागढ, 27 जून(निस)। शनिवार की सुबह पिथौरागढ़ के मुनस्यारी व बागेश्वर में भूकंप के हलके झटके महसूस किए गए। इससे लोग दहशत में आ गए। हालांकि राज्य आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र ऐसी किसी भी सूचना से इन्कार कर रहा है। सुबह करीब साढ़े 11 बजे मुनस्यारी व बागेश्वर में भूकंप के हल्के झटके महसूस हुए। हालांकि कहीं से किसी नुकसान की सूचना नहीं है। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर तीन मापी गई है। आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र भूकंप व नुकसान की सूचना से इन्कार कर रहा है। एक सप्ताह के भीतर उत्तराखंड में भूकंप का यह दूसरा झटका महसूस किया गया। इससे पहले 24 जून को रात दो बजकर तीन मिनट पर टिहरी व उत्तरकाशी में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। इसका केंद्र टिहरी जिले के थत्यूड़ में था। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.2 मापी गई थी।
नरभक्षी गुलदार शिकारी का निशाना बना
कोटद्वार, 27 जून(निस)। एकेश्वर ब्लॉक में आतंक का पर्याय बने आदमखोर गुलदार को शिकारी ने गोली का निशाना बना दिया। जिसके बा क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है। पौड़ी जनपद के एकेश्वर ब्लॉक के सकिंडा गांव में नौ जून को गुलदार ने दस वर्षीय बच्चे रोहित को निवाला बना दिया था। तब से गांव में दहशत का माहौल था। ग्रामीणों की मांग पर गुलदार को आदमखोर घोषित कर वहां शिकारी की तैनाती कर दी गई थी। शुक्रवार की रात करीब साढ़े 11 बजे गांव के समीप लगाए गए मचान पर बैठे शिकारी जॉय हुकिल को गुलदार गांव की ओर आता दिखाई दिया। इस पर उन्होंने उसे वहीं ढेर कर दिया। करीब तीन साल के इस नर गुलदार के दांत और पंजे दोनों ही ठीक हैं। माना जा रहा है कि भोजन की कमी के चलते वह नरभक्षी बना।
डोबरा पुल को लेकर धरना
नई टिहरी, 27 जून(निस)। डोबरा पुल निर्माण की मांग को लेकर प्रतापनगर के पूर्व भाजपा विधायक विजय सिंह पंवार डोबरा पुल पर धरने पर बैठ गए है। पूर्व विधायक ने कहा कि पुल निर्माण को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। इसके कारण उन्हें मजबूरन धरने जैसा कदम उठाना पड़ा। प्रतापनगर के पूर्व विधायक विजय सिंह पंवार ने भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ डोबरा पुल पर धरना दिया। पंवार ने कहा कि पिछले कई सालों से डोबरा पुल का निर्माण लटका पड़ा है। लेकिन, सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। ऐसे में अब भाजपा धरना देकर पुल निर्माण की मांग करती है। अगर सरकार ने जल्द ही पुल निर्माण का कार्य शुरू नहीं कराया तो भाजपा उग्र आंदोलन करेगी। धरने में संजय पैन्यूली, जयेंद्र सेमवाल, रमेश रावत, रमेश रतूड़ी, परमवीर पंवार, रतन सिंह पंवार, मस्ता सिंह नेगी, राजेंद्र नेगी आदि भाजपा कार्यकर्ता शामिल रहे। दूसरी ओर, पूर्व विधायक के धरने पर भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री सलाहकार रह चुके भाजपा नेता राजेश्वर प्रसाद पैन्यूली ने सवाल उठा दिए हैं। पैन्यूली ने बयान जारी कर कहा कि पूर्व विधायक को प्रतापगर की समस्या और डोबरा पुल निर्माण की याद आठ साल बाद आ रही है। आखिर विधायक आठ साल तक कहां थे। पिछले आठ साल से प्रतापनगर की जनता समस्याएं झेल रही है। पैन्यूली ने कहा कि सरकार को डोबरा पुल घोटाले की सीबीआइ जांच करानी चाहिए तभी पुल घोटाले में शामिल जनप्रतिनिधि और अधिकारी बेनकाब हो सकेंगे।
अलकनंदा के छीना कई परिवारों का चैन
गोपेश्वर, 27 जून(निस)। चमोली कस्बे से तीन किलोमीटर दूर अलकनंदा नदी के किनारे बसे बिरही गांव के तीस परिवारों के दिन का चैन छिन चुका है और रात की नींद उड़ी हुई है। बीते दो दिन से गांव के लोग बारी-बारी से रतजगा कर अलकनंदा के उफान पर नजर रख रहे हैं। इस गांव के रहने वाले बैशाख सिंह रावत कहते हैं श्दो साल पहले नदी गांव के तीन मकान लील गई थी। तब से डर लगता है।श् लामबगड़ की कहानी भी अलग नहीं है। यहां रहने वाले आठ परिवारों ने एक किलोमीटर दूर दूसरे गांव में रिश्तेदारों के घर पनाह ले रखी है। वे दिन में यहां आकर कामकाज निपटाते हैं और शाम होते ही लौट जाते हैं। इन दिनों बदरीनाथ और गौचर के बीच १३५ किलोमीटर के बीच बसे 80 गांवों की यही व्यथा है। दिलों में अलकनंदा का खौफ इस कदर समाया हुआ है कि लोग रात-दिन नदी पर निगाह बनाए हुए हैं। इसके अलावा कई परिवारों ने घर छोड़ सुरक्षित ठिकानों में शरण ली है। हालांकि अभी अलकनंदा खतरे के निशान 957.42 मीटर से तीन मीटर नीचे बह रही है। बावजूद इसके दिलो दिमाग पर हावी दहशत कम होने का नाम नहीं ले रही। दरअसल, वर्ष 2013 के अलावा अलकनंदा वर्ष 1971 में भी कहर बरपा चुकी है। बिरही गांव के 90 वर्षीय बुजुर्ग किशन सिंह भंडारी उस दौर को याद करते हुए बताते हैं कि तब हमारे गांव से 50 किलोमीटर दूर नदी में बनी झील टूटी थी। उस वक्त चमोली से लेकर ऋषिकेश नदी किनारे बसे गांव लहरों की भेंट चढ़ गए। हम लोगों ने पहाड़ पर चढ़कर जान बचाई थी। सैकड़ों लोग मारे गए थे। वर्ष 2013 में आई तबाही में लामबगड़ में एक दर्जन दुकानें और मकान बह गए। कहते दूध का जला छाछ को भी फूक-फूक कर पीता है। अब लामबगड़ में यही स्थिति है। लामबगड़ के 50 वर्ष शेर सिंह परमार कहते हैं कि श्हम लोगों ने अपने घर छोड़ रिश्तेदारों के घर पर शरण ले रखी है। अलकनंदा में पानी कम होने पर ही लौटेंगे।श् वह कहते हैं कि बरसात के दौरान अलकनंदा के भय से भागना गांव की नियति है।
पुल की मांग को लेकर ग्रामीणों ने लगाया चक्काजाम, दो घंटे बंद रखा बद्रीनाथ हाईवे
रुद्रप्रयाग, 27 जून(निस)। आठ साल से झूलापुल का इंतजार और इंतजार में पथरा गई आंखे। विभागीय चक्कर काट-काटकर पैरांे पर पड़ गये छाले, मगर मांग तब भी रही अधूरी। आखिरकार बात मनवाने की ठानी और चक्काजाम करने की सूझी। सिन्द्रवाणी के ग्रामीणों ने अपनी बात को मनवाने के लिए चक्काजाम का रास्ता अपनाया, जिसके बाद लोक निर्माण विभाग के साथ पुलिस प्रशासन के भी पसीने छूट गये। दो घंटे हाईवे पर जाम करने के बाद अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बाद ग्रामीण राजमार्ग से उठे। यह मामला सिन्द्रवाणी-नगरासू झूलापुल का है। जिसकी मांग ग्रामीण आठ वर्षों से करते आ रहे हैं। लम्बा समय बीत जाने के बाद भी जब ग्रामीणों की नहीं सुनी गई तो उन्हांेने बद्रीनाथ हाईवे पर चक्काजाम करने का मन बनाया। शनिवार को नगरासू-सिन्द्रवाणी संघर्ष समिति के बैनर तले छः ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने बद्रीनाथ हाईवे के नगरासू में चक्काजाम लगाया। जाम लगने से राजमार्ग के दोंनो ओर सैकड़ों वाहनों की कतार लग गई, कतार इतनी लम्बी थी कि यात्रियों को खासी दिक्कतों से जूझना पड़ा। ग्रामीणों की माने तो पुल निर्माण की मांग को लेकर विभागीय चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं, मगर उनकी कोई सुध नहीं ले रहा है। पुल निर्माण की दिशा में आठ साल में सिर्फ स्तम्भ ही खड़े हो पाये हैं, वह भी एक तरफ के। ग्रामीणों की सुविधा के लिए बनाये जा रहे इस पुलिया का आज तक निर्माण न होना सरकार और अधिकारियों की उदासीनता को दर्शाता है। मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर ग्रामीणों को सिर्फ पुल की जरूरत है, जिससे वे समय पर अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा कर सकें। छः ग्राम पंचायते इस पुल से जुड़ी हुई हैं और सैकड़ों ग्रामीण पुल न बनने के कारण सात किमी की दूरी नापकर अपने गंतव्यों तक पहुंचते हैं। ऐसे में पुल की आवश्यकता अधिक है। प्रधान नाग ककोड़ाखाल राजवीर राणा, प्रधान नगरासू ऊषा देवी, संघर्ष समिति के अध्यक्ष खुशाल सिंह बिष्ट, विनोद सिंह ने कहा कि पुल निर्माण का लाभ सारी, सिन्द्रवाणी, इशाला, कोठगी, छिनका, बिजराकोट, नाशा, ककोड़ाखाल सहित छः ग्राम पंचायतों को मिलेगा, मगर आठ साल से पुल का कार्य अधर में लटका हुआ है, जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। कहा कि तीन दिन के आश्वासन के बाद भी पुल निर्माण में तेजी नहीं आई तो ग्रामीण उग्र आंदोलन को बाध्य हो जाएंगे। वहीं मौके पर पहुंचे लोनिवि के सहायक अभियंता सुरेन्द्र कुमार ने ग्रामीणों को तीन दिन का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीण शांत हुए। उन्होंने कहा कि जल्द ही पुल निर्माण में तेजी आ जाएगी। पहले जिस ठेकेदार को कार्य सौंपा गया था, उसने कार्य करने में हाथ खड़े कर दिये, जिस कारण फिर से निविदा आमंत्रित की गई। ऐसे में कार्य करने में लेट हो गई। अब दूसरे ठेकेदार को कार्य दिया गया है। जल्द ही कार्य को पूरा किया जायेगा, जिससे ग्रामीणों की समस्याएं दूर हो जायेंगी। इस मौके पर ग्रामीण दर्शन सिंह, विजयपाल सिंह, उत्तमा देवी, हरीश सिंह, कुंवरी देवी, खुशाल सिंह जग्गी, विनोद सिंह, नरेन्द्र सिंह जग्गी, चन्द्रावती देवी, तहसीलदार एमएल भेतवाल, कोतवाल डीएस पंवार सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
यात्रियों को उठानी पड़ी दिक्कत
रुद्रप्रयाग, 27 जून(निस)। हेमकुंड और बद्रीनाथ को आने-जाने वाले यात्री पहले ही दो दिन की बारिश से परेशान थे, ऊपर से बद्रीनाथ हाईवे पर जाम लगने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई। यात्रियों का कहना था कि एक तरफ उन्हें बारिश का सामना करना पड़ा, दूसरी ओर ग्रामीणों के चक्काजाम ने उन्हें मुसीबत में डाल दिया है। उनकी टेªन और फ्लाइट छूट गई तो तो उन्हें फिर एक दिन और लेट होना पड़ेगा। लुधियाना से आये यसविन्दर सिंह और जसबीर सिंह ने कहा कि बारिश से उनकी तबियत पहले ही खराब है। दो दिनों तक मुसीबत का सामना करके लौटे हैं। आईटीबीपी ने उनकी बहुत मदद की है। अब बारिश से बचने के बाद ग्रामीणों ने यहां पर चक्काजाम लगाया हुआ है। हमें नहीं पता इनकी क्या मांग है, लेकिन यात्रियों के ऐसे परेशान नहीं करना चाहिए। प्रशासन को इनकी मांगों का जल्द निराकरण करना चाहिए, जिससे इन्हें ऐसा कदम न उठाना पड़े।
जलविद्युत परियोजनाओं के लिए पूरे देश में एक से हों मानक: हरीश रावत
- बिजली की अपार सम्भावनाओं के बावजूद 1200 करोड़ प्रतिवर्ष बिजली खरीद ठीक नहीं
- ऐसा कोई सबूत नहीं कि बाधों से हुआ नुकसान, बांध के कारण आपदा की तीव्रता कम हुई
- आर्थिक विकास के लिए चार ई: मुख्य सचिव
देहरादून,27 जून। उत्तराखंड को ऊर्जा उत्पादक प्रदेश बनाने के लिया हमें यहाँ के प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करना होगा. प्रदेश के बांधों से राज्य को किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं हो रहा है बल्कि इन बांधों से जहां राज्य को बिजली मिल रही है वहीं बरसात के दौरान इन बाँधों से प्राकृतिक आपदाओं को भी नियंत्रित भी किया जा रहा है। उन्होने कहा राष्ट्रीय स्तर पर हाईड्रो पावर को लेकर नीति बनाई जानी चाहिए। जो नियम उŸाराखण्ड की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए लागू किए जाने की बात कही जाती है वही नियम अन्य प्रदेशों की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए भी होने चाहिए। राज्य की उर्जा नीति को इस तरह बनाया गया है ताकि ग्राम सभा स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक राज्य में उर्जा उत्पादकता बढाई जा सके। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उŸाराखण्ड में जलविद्युत की अपार सम्भावनाएं होते हुए भी हमें लगभग 1200 करोड़ रूपए प्रतिवर्ष बिजली खरीदनी पड़ रही है। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य के लिए यह स्थिति सही नहीं कही जा सकती है। शनिवार को राजधानी के एक होटल में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पॉवर कॉन्क्लेव 2015 के उद्घाटन सत्र के अवसर पर यह बातें बतौर मुख्य अतिथि कही। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि उŸाराखण्ड के विकास में जलविद्युत की महŸाा को नकारा नहीं जा सकता है। बिजली आज प्राथमिक आवश्यकता है। विकास के लिए आवश्यक सभी तत्वों को ध्यान में रखना होगा। हमें प्रतिवर्ष लगभग 20 प्रतिशत अतिरिक्त बिजली की आवश्यकता होगी। राज्य के पास विकल्प केवल यही है कि या तो अपने संसाधन विकसित करें या बाहर से बिजली क्रय करें। उŸाराखण्ड जैसे छोटे राज्य के लिए प्रतिवर्ष 1200 करोड़ रूपए की बिजली खरीदना महंगा है। आपदा में बांधों की भूमिका पर बोलते हुए सीएम ने कहा कि अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि बांधों के कारण वर्ष 2013 की दैवीय आपदा आई थी। तथ्य तो ये है कि टिहरी बांध के कारण आपदा की तीव्रता कम हो गई थी। आईआईटी रूड़की, वाडिया इंस्टीट्यूट, नेशनल वाटर कमीशन सहित अनेक विशेषज्ञ संस्थाओं ने इस बात को माना है। जो लोग उŸाराखण्ड में जलविद्युत परियोजनाओं का विरोध करते हैं, उन्हें इसका विकल्प भी प्रस्तुत करना चाहिए। राज्य सरकार ने अपनी नई माइक्रो हाईड्रो पावर पालिसी में ग्राम पंचायतों की भागदीारी से छोटी जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण की पहल की है। ग्राम पंचायतों को इसके लिए आगे आना चाहिए। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को हम एक दिन ऊर्जा प्रदेश बना सकेगे. ब्रह्मपुत्र का श्रोत अन्य कई प्रदेशो से है जिसका वो उर्जा उत्पादक के लिया अच्छा निवेश नहीं कर पा रहे है. उत्तराखंड हर साल 1200 करोड़ की बिजली खपत करता है जो की हमारे उत्पादक के स्तर से कई ज्यादा है. हमें प्रदेश को कुछ ऐसे ही कई पॉवर प्लांट लगवाने की जरूरत है जो प्रदेश की उर्जा खपत और उत्पादन का तालमेल बिठा सके. बिजली की योजनाओ को लेकर प्रदेश पहला चरण पार कर चूका है तथा दुसरे स्तर पर काम कर रहा है. उनका कहना है कि हाइड्रो एनर्जी का ज्यादा से ज्यादा उत्पादन करना चाहिये क्योकि यह सोलर एनर्जी के मुकाबले ज्यादा सस्ता है. बिजली हमरी पहली जरुरतो मे गिना जाता है . हर माह 100 करोड़ की बिजली खरीदने के बजाये इसे अपने ही प्रदेश मे उत्पादित करना चाहिये जो हमारी आर्थिक तंगी को बेहद कम करने मे अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देगा। वहीं पर कार्यक्रम में उपस्थित प्रदेश के मुख्यसचिव एन.रविशंकर का कहना था कि हमारे प्रदेश को सतत ऊर्जा प्रदान करने का लक्ष्य रखेगें। उन्होने कहा उत्तराखंड की ओर से राज्य के कई जिलांे के प्रमुख शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने का प्रस्ताव केंन्द्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया गया परन्तु केन्द्र ने केवल देहरादून को ही स्मार्ट सिटी बनाने स्वीकृती दी जिस पर अब हमारी सरकार इस प्रस्ताव मे कार्ययोजना शुरू करने के लिए पूर्ण रूप से तैयार है। उन्होने कहा हमें एक बात पर ध्यान देना होगा कि आर्थिक विकास ऊर्जा उत्पादन पर निर्भर करता है। आर्थिक विकास के लिए चार ई- एनवायरमेंट, एनर्जी, इकोनोमी व ई-कनेक्टीवीटी को प्राथमिकता देनी होगी। वहीं राज्य के प्रमुख सचिव ऊर्जा उमाकान्त पंवार का कहना है कि उर्जा उत्पादन के दौरान हमें पर्यावरण की सुरक्षा मे भी खास ध्यान देना होगा और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिया नई तकनीकंे अपनानी होंगी। उन्होने कहा पर्यावरण व ऊर्जा उत्पादन में सामन्जस्य बनाते हुए हमें विकास के पथ पर चलना होगा।
पुलिस कप्तान के मैनेजमेंट से रेस्क्यू आॅपरेशन हुआ सफल, विपरीत परिस्थितियों में केदारनाथ में संभाला मोर्चा
- सभी यात्रियों के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद लौटे एसपी, एसपी की केदारपुरी में मौजूदगी से यात्रियों ने ली राहत की सांस
देहरादून,27 जून। केदारनाथ में भारी बारिश के बीच बादलों की गड़गड़ाहट तीर्थयात्रियों की सांसे अटका रही थी। हर किसी के जेहन में जून 2013 का मंजर उमड़-घुमड़ रहा था। लगातार बारिश से हालात असामान्य होते जा रहे थे। मंदाकिनी-सरस्वती नदी की जलधाराएं रौद्र रूप ले चुकी थी। बुधवार रात दस बजे से शुरू हुई बारिश शुक्रवार की सुबह थमी। तब जाकर हर किसी ने राहत की सांस ली। केदारनाथ में जिस तरह से हालात पैदा हो गए थे, उससे निपटना आसान नहीं था। सबसे बड़ी समस्या तीर्थयात्रियों को सुरक्षित रेस्क्यू करने की थी। हालात को भांपते हुए पुलिस अधीक्षक बरिन्दर जीत सिंह ने पूरा मोर्चा संभाल दिया। एसपी गुरूवार को श्रद्धांजलि समारोह में शिरकत करने केदारनाथ पहुंचे हुए थे। पुलिस कप्तान के केदारनाथ में मौजूद रहने से यात्रियों ने राहत की सांस ली। अंततः रेस्क्यू आॅपरेशन सफल रहा। केदारनाथ में बीते बुधवार की रात दस बजे से बारिश शुरू हो गई थी। गुरूवार को दिनभर बारिश होने से केदारनाथ में नदियों का वेग बढ़ गया। बारिश न थमने और बेकाबू होते हालात को देखते हुए केदारनाथ में मौजूद पुलिस अधीक्षक बरिन्दर जीत सिंह ने पुलिस के जवानों, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ और निम के कर्मचारियों की आपात बैठक ली। पुलिस अधीक्षक ने चार सब इंस्पेक्टर और 130 कांस्टेबलों की अलग-अलग टीमें बनाई गई। एक टीम को मंदिर परिसर में तैनात किया गया, जबकि दूसरी टीम कैंप में तैनात की गई। एक टीम लिनचैली के लिए रिजर्व रखी गई। केदारनाथ में 70 एनडीआरएफ के जवान भी मौजूद थे। जिनमें से एक जवान को वाॅकी-टाॅकी के साथ कंट्रोल रूम में तैनात किया गया। देर रात तक पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में जवान पूरी केदारपुरी की रेकी करते रहे। एक-एक यात्री से उसका हाल-चाल जाना गया। उनकी समस्या सुनी गई। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि सुबह उन्हें केदारनाथ से सुरक्षित बाहर निकाल दिया जाएगा। जब यात्रियों को पता चला कि केदारनाथ में स्वयं पुलिस कप्तान मौजूद हैं तो उनकी जान में जान आई। किसी तरह यात्रियों ने रात काटी। शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे मौसम खुला और इसके बाद तीर्थयात्रियों को हेलीकाॅप्टर के जरिए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। सुबह से ही पुलिस अधीक्षक बीजे ंिसह के नेतृत्व में जवानों ने यात्रियों को नियंत्रित किया। सबसे पहले बुजुर्ग, चलने में असमर्थ और बच्चों को हेलीकाॅप्टर से भेजा गया। अन्य यात्रियों को एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और निम की मदद से पैदल मार्ग से सोनप्रयाग पहुंचाया गया। इस तरह रेस्क्यू आॅपरेशन पूरी तरह सफल रहा। केदारनाथ से सभी यात्रियों के सुरक्षित निकाले जाने के बाद ही पुलिस अधीक्षक वापस लौटे। पुलिस अधीक्षक बीजे सिंह ने बताया कि प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, निम और पुलिस की टीम के संयुक्त प्रयास से यह आॅपरेशन सफल रहा। उन्होंने कहा कि हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यात्रियों की सुरक्षा की थी। मौसम ने पूरा साथ दिया। ऐसे में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों में पहुंचाने में परेशानी नहीं हुई।
डीएम और कर्नल ने भी संभाला मोर्चा
रुद्रप्रयाग (एसएनबी)। भारी बारिश के चलते केदारघाटी में असामान्य होती स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी डाॅ राघव लंगर सुबह-सवेरे सोनप्रयाग के लिए रवाना हो गए। जबकि निम के प्रिंसिपल कर्नल अजय कोठियाल गुरूवार दोपहर बाद से ही सोनप्रयाग में स्थिति का जायजा लेते रहे। वहीं पुलिस उपाधीक्षक स्वतंत्र कुमार हालात पर पूरी नजर बनाए हुए थे और इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दे रहे थे। सोनप्रयाग में पुल बहने और रास्तों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना के बाद जिलाधिकारी डाॅ राघव लंगर शुक्रवार सुबह केदारघाटी के लिए चल दिए। उन्होंने सड़क मार्ग से हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देशित करते रहे। सोनप्रयाग में उन्होंने क्षतिग्रस्त पुल और रास्ते की स्थिति भी देखी। इसके बाद अधिकारियों की बैठक लेते हुए उन्हें आवश्यक निर्देश दिए। निम के प्रिंसिपल कर्नल अजय कोठियाल ने परिस्थिति को देखते हुए गुरूवार दोपहर बाद ही सोनप्रयाग में डेरा डाल दिया था। उन्होंने अपनी टीम को यात्रियों के रेस्क्यू और मार्ग को सुधारने के लिए झोंक दिया। इस तरह अधिकारियों के सामूहिक प्रयास से रेस्क्यू आॅपरेशन पूरी तरह सफल हुआ। इसे एक बड़ी उपलब्धि के रूप में माना जाए तो गलत नहीं होगा।
राज्यपाल ने दिए सेटेलाइट फोन सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश
देहरादून,27 जून (निस)। राज्यपाल डा0 कृष्ण कांत पाल ने, प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बरसात के कारण सड़कों व पुलों के क्षतिग्रस्त होने से, यातायात, संचार व अन्य व्यवस्थाओं के बाधित होने से हजारों यात्रियों व नागरिकों के फँसे होने की खबरों का संज्ञान लेकर जनपद चमोली, उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग तथा अन्य विभिन्न स्थानों पर फँसे तीर्थ यात्रियों को सेटेलाइट फोन के माध्यम से संचार व्यवस्था उपलब्ध कराने की अपेक्षा की है ताकि उनके नाते-रिश्तेदारों तथा अन्य परिजनों को समय-समय पर उनकी कुशलता के बारे में पूरी जानकारी मिल सके। राज्यपाल द्वारा, बरसात से प्रभावित क्षेत्रों में फँसे तीर्थाटकों के लिए एस.डी.आर.एफ तथा जिला प्रशासन के माध्यम से भोजन, रहने तथा सुरक्षा आदि सुविधायें प्राथमिकता पर उलबब्ध कराये जाने के निर्देश भी दिये गये हैं। राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी एवं सचिव द्वारा सचिव आपदा प्रबन्धन विभाग, मंडलायुक्त व एस.डी.आर.एफ के पुलिस महानिरीक्षक तथा सम्बन्धित जिलों के जिलाधिकारियों को इस संदर्भ में त्वरित व आवश्यक कार्यवाही हेतु अवगत कराया जा चुका है।
‘‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति-2015‘‘ से रूकेगा पलायन: मुख्यमंत्री
देहरादून,27 जून (निस)। राज्य सरकार द्वारा एमएसएमई क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए ‘‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति-2015‘‘ बनायी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्वतीय एवं सुदूर क्षेत्रों में पूंजी निवेश प्रोत्साहित कर रोजगार के अवसरों के सृजन के माध्यम से पलायन रोकने, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों की स्थापना एवं राज्य का समावशी विकास करना है। हमने यह भी प्रयास किया है कि नीति के माध्यम से प्रदेश में उपयुक्त वातावरण तैयार कर उद्यमियों को उद्योग स्थापना हेतु आधारभूत सुविधायें, वित्तीय संसाधन, प्रशिक्षण एवं विपणन सहायता एकीकृत रूप से उपलब्ध करायी जाय। यह बात मुख्यमंत्री हरीश रावत से केन्द्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री कलराज मिश्र ने भेंट के दौरान कही। भेंट के दौरान मुख्यमंत्री रावत ने केन्द्रीय मंत्री को अवगत कराया कि नीति में पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में उद्यम स्थापना हेतु प्रोत्साहन सहायता उपलब्ध करायी गई है। इस नीति को प्रभावी ढंग से प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में लागू करने के लिए केन्द्र सरकार पूरा सहयोग दंे। पर्वतीय क्षेत्रों में माईक्रो एवं स्माॅल उद्योगों की स्थापना के लिए राज्य को विशेश पैकेज दिया जाय। उत्तराखण्ड के लिए घोशित औद्योगिक पैकेज को समाप्त कर दिया गया है, जिसका राज्य को काफी नुकसान हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में औद्योगिक निवेश के लिए बेहतर वातावरण है, जिसमें केन्द्र सरकार पूरा सहयोग करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पीएमईजीपी योजना में बेहतर प्रदर्शन किया गया है। मुख्यमंत्री ने आवंटित मार्जिन मनी से अधिक लक्ष्य दिये जाने का भी अनुरोध किया। उत्तराखण्ड राज्य तथा अन्य पर्वतीय राज्यों के दृष्टिगत पीएमईजीपी योजना में शाॅल, पंखी, थुलमा आदि के उत्पादन प्रस्तावों को भी शामिल किया जाय। मुख्यमंत्री श्री रावत ने केन्द्रीय मंत्री को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। केन्द्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री द्वारा शनिवार को बीजापुर अतिथि गृह में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, एनएसआईसी व राज्य सरकार के सुक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। समीक्षा बैठक में केन्द्रीय मंत्री द्वारा राज्य में एम.एस.एम.ई. क्षेत्र की स्थिति की जानकारी ली तथा एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा इस क्षेत्र के विकास हेतु किये गये नवीन प्राविधानों से अवगत कराया गया। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि पर्वतीय क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यमों को ही प्राथमिकता पर प्रोत्साहित किया जाय। शहरी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक उद्यम स्थापित होते हैं, अतः उद्योग विभाग एवं खादी बोर्ड को दूरस्थ क्षेत्रों में इन उद्यमों की स्थापना पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। उद्योग विभाग द्वारा बताया गया कि प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी योजना (पीएमईजीपी) ने राज्य में युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। राज्य की उपलब्धि गत वर्षों में लक्ष्य से अधिक रही है। राज्य सरकार द्वारा पीएमईजीपी योजना में आवंटित मार्जिन मनी से अधिक लक्ष्य दिये जाने का अनुरोध किया गया, जिसमें केन्द्रीय मंत्री द्वारा कार्रवाही का आश्वासन दिया गया। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि यह उद्यम जहां एक ओर पर्यावरण हितैशी होते हैं, वहीं दूसरी ओर अधिक रोजगार सृजन के वाहक भी होते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखण्ड राज्य तथा अन्य पर्वतीय राज्यों के दृष्टिगत पीएमईजीपी योजना की ऋणात्मक सूची से ऊन (पशमिना) व ऊनी वस्त्र उत्पादन हटा दिया गया है। इसलिए शाॅल, पंखी, थुलमा आदि के उत्पादन प्रस्तावों को भी अब इस योजना का लाभ दिया जा सकेगा। उन्होंने यह भी बताया कि एम.एस.एम.ई. मंत्रालय द्वारा एन.एस.आई.सी. के माध्यम से आजीविका परियोजना चलाई जा रही है, जिसके तहत् इनक्यूबेश्न संेटर स्थापित कर युवाओं को हैंड्सआॅन प्रशिक्षण प्रदान करना है। इस योजना में मंत्रालय द्वारा रु. 5 लाख से रु. 25 लाख तक की मशीनरी प्रशिक्षण हेतु उपलब्ध करायी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के विभाग भी अपनी आवश्यकतानुरूप इस योजनान्तर्गत मशीनों की मांग कर सकते हैं। उद्योग निदेशालय, उत्तराखण्ड के अपर निदेशक एस.सी. नौटियाल ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य गठन से पूर्व प्रदेष में 14,163 लघु स्तरीय औद्योगिक इकाईयाॅ स्थाई रूप से पंजीकृत थी, जिनमें रू0 700.29 करोड़ का पूंजी निवेश तथा 38,509 लोगों को रोजगार उपलब्ध था। राज्य गठन के पश्चात् से माह मई, 2015 तक प्रदेश में 33,662 सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम स्थापित हुये हैं। इन उद्यमों में रू0 8,956 करोड़ का पूंजी निवेश तथा 1,84,347 लोगों को रोजगार दिया गया है। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, आॅटो मोबाइल, फार्मा, एफएमसीजी, आई.टी. एण्ड इलैक्ट्राॅनिक्स, जनरल इंजीनियरिंग, पैकेजिंग आदि ऐसे विशिष्ट क्षेत्र हैं, जिनमें उद्यमियों द्वारा सर्वाधिक निवेश किया गया है। इस अवसर पर के.वी.आई.सी. के उप निदेशक वी.के. मलिक, सहायक निदेशक गंगन तिवारी, उद्योग निदेशालय की संयुक्त निदेशक श्रीमती कौशल्या बन्धु, के.सी. चमोली व एन.एस.आई.सी. के अधिकारी भी उपस्थित थे।
मुठभेड़ के बाद उत्तर प्रदेश के दो इनामी बदमाश दबोचे
\देहरादून,27 जून (निस)। कई संगीन मामलों में फरार चले रहे बदायंू के दो बदमाशों ने दून पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। दोनों बदमाश पिता और पुत्र बताए जा रहे है। शनिवार को अपने कार्यालय में पत्रकारों को बातचीत करते हुए दून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पुष्पक ज्योति ने बताया कि बीते रोज 26 जून को एसओजी बदायूं ने देहरादून के रायपुर थाने आकर सूचना दी कि बरेली जोन के दो कुख्यात बदमाश जिन पर बदायूं कोतवाली में हत्या व हत्या के प्रयास के कई मामले दर्ज ह,ै जिनमें से कई मुकदमों में वह 2013 से फरार चल रहे है, उनके देहरादून में होने की सूचना है साथ ही यह भी जानकारी में आया है कि वह दोनो बदमाश यूपी नम्बर की काली पल्सर का इस्तेमाल कर रहे है। दून पुलिस को बदायूं एसओजी ने बताया था कि वह दोनो बदमाश इतने शातिर है कि वह दून में भी किसी गम्भीर वारदात को अंजाम दे सकते है। एसएसपी ने बताया कि इस सूचना को एसओ रायपुर अबुल कलाम द्वारा अपने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया। इस पर उच्चाधिकारियों द्वारा थाना रायपुर व बदायूं एसओजी की एक संयुक्त टीम गठित कर बदमाशों की खोज में लगाया गया। बदमाशों की खोज में लगी पुलिस टीम ने शनिवार की सुबह रायपुर स्थित सौंग नदी के पुल पर चैकिंग अभियान चलाया। अभी पुलिस ने चैकिंग शुरू ही की थी कि उसे दो व्यक्ति मोटर साइकल पर आते हुए दिखाई दिये। पुलिस द्वारा जब उन्हे रूकने का इशारा किया गया तो वह बाइक दौड़ाकर भागने का प्रयास करने लगे। इस पर पुलिस द्वारा उनका पीछा किया गया तो उन्होने पुलिस टीम पर फायर झोैंक दिया। जिसके बाद पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग करते हुए हल्की मुठभेड़ के बाद दोनो बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। थाने लाकर पुलिस द्वारा की गयी पूछताछ में बदमाशों ने अपना नाम देश दीपक बजाज पुत्र मनोहरलाल बजाज व शशांक उर्फ शैलू पुत्र देश दीपक बजाज निवासी बदायूं उत्तर प्रदेश बताया। बदमाशों का कहना है कि वह पिता पुत्र है तथा वह 2006 से हरिद्वार जनपद में निवास कर रहे है। उनका कहना था कि उनकी उनके पार्टनरों अर्जुन व सुभाष से रजिंश चल रही है। इस कारण उन्होने बदायूं में कई गम्भीर वारदातों को अंजाम दिया है। उन्होने बताया कि वह शनिवार को देहरादून में पैसे के इन्तजाम के लिये आये थे लेकिन वह पुलिस की सर्तकता के चलते दबोचे गये। पुलिस द्वारा बदमाशों से एक पिस्टल, दो मैगजीन, पांच जिंदा कारतूस व एक चाकू बरामद किया गया है।
कांग्रेस घोषणा पत्र क्रियान्वयन समिति की बैठक आयोजित
देहरादून,27 जून (निस)। प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा पार्टी विधानसभा चुनाव 2012 के घोषणापत्र के क्रियान्वयन हेतु गठित पांच सदस्यीय घोषणा पत्र क्रियान्वयन समिति की बैठक आयोजित की गयी। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय एवं समिति के अध्यक्ष रामसिंह सैनी मौजूद थे। बैठक में राज्य सरकार द्वारा पार्टी घोषणा पत्र में उल्लिखित घोषणाओ ंपर अब तक की गई कार्रवाई पर विस्तार से चर्चा एवं विचार-विमर्श किया गया। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मथुरादत्त जोशी ने बताया कि बैठक में घोषणा पत्र क्रियान्वयन समिति की बैठक आयोजित सर्वप्रथम समिति के गठन हेतु प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को धन्यवाद ज्ञापित किया गया। साथ ही समिति के सदस्यों द्वारा आश्वस्त किया गया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी,उपाध्यक्ष राहुल गांधी, मुख्यमंत्री हरीश रावत एवं प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की अपेक्षा के अनुरूप कार्य करेगी। बैठक में घोषणापत्र एवं उसके क्रियान्वयन के सम्बन्ध में विस्तार से विचार-विमर्श के उपरान्त यह निर्णय लिया गया कि घोषणा पत्र की प्रति मुख्यमंत्री एवं मंत्रीगणों को भेज कर उनसे अनुरोध किया जाय कि उनके विभागों द्वारा घोषणा पत्र के अनुरूप अब तक किये गये कार्यों की प्रगति तथा घोषणा पत्र में उल्लिखित कितनी घोषणाओं पर अमल हुआ तथा कितनी पूर्ण हो चुकी हैं उसकी जानकारी मांगी जाय। बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष उपाध्याय ने कहा कि हमारी सरकार द्वारा अपने तीन वर्ष के कार्यकाल में घोषणा पत्र में उल्लिखित अनेक योजनाओं पर कार्य किया जा चुका है। जो बाकी हैं उन पर अगले दो वर्ष के अन्दर कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है कि पार्टी घोषणा पत्र में जनता से जो वादे किये गये हैं उन्हें पूर्ण किया जायेगा।
सूचना प्रोद्यौगिकी का सरलीकरण किया जाना चाहिएः सीएम
देहरादून,27 जून (निस)। सूचना प्रोद्यौगिकी का सरलीकरण किया जाना चाहिए ताकि साधारण से साधारण व्यक्ति इसका उपयोग कर सके। उŸाराखण्ड के संदर्भ में प्राकृतिक बदलावों के अध्ययन व आपदा प्रबंधन में सूचना तकनीक की भूमिका को बढ़ाना होगा। एक स्थानीय होटल में ईलेट्स टेक्नो मीडिया लिमिटेड द्वारा उŸाराखण्ड के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से आयोजित आईटी सेमीनार में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि आईटी में बदलाव ने दुनिया को पूरी तरह से बदल दिया है। जो दुनिया पहले बहुत बड़ी व पहुंच से बाहर लगती थी, सूचना क्रांति से वह दुनिया हमारी मुट्ठी में आ गई है। परंतु आज भी आबादी का एक बड़े हिस्से की पहुंच आईटी तक नहीं है। आम व्यक्ति इससे लाभान्वित हो सके, इसके लिए सूचना प्रोद्योगिकी के उपयोग का सरलीकरण किया जाए। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि लोगों को लोक सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए देवभूमि जनसेवा केंद्र प्रारम्भ किए गए हैं। इसके अतिरिक्त शिकायतों के आॅनलाईन निवारण के लिए सुराज विभाग के तहत ‘‘समाधान‘‘ पोर्टल का संचालन किया जा रहा है। परंतु आज भी लोगों में इनके प्रयोग को लेकर कुछ संकोच है। हमारा दायित्व है कि जनसेवाएं प्राप्त करने में आईटी के प्रयोग के प्रति लोगों के संकोच को दूर किया जाए। इसके लिए सामाजिक संगठनों को भी आगे आकर लोगों को अपने कार्यों में आईटी का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि प्रदेश के लोगों को वाईफाई सुविधाए उपलब्ध करवाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसका प्रारम्भ अर्धकुम्भ के दौरान हरिद्वार से किया जाएगा। इसके बाद मसूरी, नैनीताल, अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों व जिला मुख्यालयों में वाईफाई प्रारम्भ किया जाएगा। मुख्य सचिव एन रविशंकर ने कहा कि उŸाराखण्ड की दृष्टि से सूचना प्रोद्योगिकी काफी महत्वपूर्ण है। लोक सेवाओं में जितना ज्यादा ई-सेवाएं प्रारम्भ की जाएंगी, जनता को सरल प्रक्रिया, स्वच्छ व संवेदनशील प्रशासन देने में उतनी ही सफलता मिलेगी। वर्ष 1992 केबिल टेलिविजन का्रंति, वर्ष 2004 मोबाईल का्रंति का वर्ष था। उसी प्रकार सम्भवतः वर्ष 2016 ब्राडबैंड क्रांति का वर्ष होगा। सभी ग्राम पंचायतों, तहसील मुख्यालयों व जिला मुख्यालयों को आपस में ई-कनेक्ट करने की दिशा में काम प्रारम्भ कर दिया गया है। सचिव सूचना प्रोद्योगिकी दीपक कुमार ने उŸाराखण्ड में ई-गर्वनेंस के लिए किए गए कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि जनसुविधाओं तक आसान पहुंच के लिए देवभूमि जनसेवा केंद्र प्रारम्भ किए गए हैं। इनमें 120 सरकारी व 1100 ग्रामीण युवाओं द्वारा संचालित हैं। पूरे उŸाराखण्ड को वाईफाई से जोड़ने की शुरूआत हरिद्वार से की जाएगी। हरिद्वार की पंजनहेड़ी ग्राम पंचायत उŸार भारत की पहली ग्राम पंचायत है जो कि वाईफाई की सुविधा से युक्त है। प्रदेश में लगभग 70 प्रतिशत आधारकार्ड बना दिए गए हैं। प्रदेश के स्टाम्प एंड रजिस्ट्रेशन, वाणिज्य कर, कोषागार सेवाएं, सुराज, लोनिवि, आदि विभागों में भी आईटी के प्रयोग को बढ़ाया गया है। कार्यक्रम में सचिव मोहम्मद शाहिद, ईलेट्स के सीईओ रवि गुप्ता सहित विभिन्न प्रदेशों से प्रतिभाग कर रहे सरकारी व निजी क्षेत्र के प्रतिनिध मौजूद थे।
आपदा प्रभावित जिलों के निवासियों को सेवाकर एवं ऋण ब्याज माफ किया जायेः सीएम
देहरादून,27 जून (निस)। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली से अनुरोध किया है कि वर्ष 2013 की आपदा से प्रभावित जनपदों के लोगो को राहत प्रदान करते हुए सेवाकर एवं ऋण पर ब्याज माफी की जाय। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पूर्व में भी अवगत कराया गया था कि वर्ष 2013 की आपदा से लोगों के व्यवसाय, पर्यटन व्यवसाय, भवन, होटल भवन, दुकान, कृषि भूमि व फसलों की व्यापक हानि से लोगों के समाप्तप्राय हुए रोजगार साधनो की पुनःस्थापना हेतु वित्तीय सहायता की नितान्त आवश्यकता के दृष्टिगत सेवाकर एवं ऋण पर ब्याज माफी दिए जाने की आवश्यकता है। उत्तराखण्ड में जून 2013 में आई भीषण आपदा से राज्य को हुई अपार हानि एवं आपदाग्रस्त क्षेत्रों, विशेषकर जनपद रूद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर एवं पिथारौगढ़ में लोगों के व्यवसाय, पर्यटन व्यवसाय, भवन, होटल भवन, दुकान, कृषि भूमि व फसलों की व्यापक हानि हुई थी। राज्य सरकार ने आपदाग्रस्त क्षेत्रों के लोगों के रोजगार सृजन हेतु अनेक उपाय किए हैं, परन्तु राज्य के वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण यह पर्याप्त नहीं हैं। भारत सरकार के सहयोग से आपदाग्रस्त क्षेत्रों में पुनर्निर्माण एवं पुनर्वास के दीर्घकालीन कार्य गतिमान हैं। यहां के लोगों को रोजगार के अवसर पुनः स्थापित हो सकें। इस हेतु हम अनेक प्रयास कर रहे हैं, परन्तु भारत सरकार की सहायता के बिना यह सफल नहीं हो सकता है। उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र में पर्यटन व्यवसाय का रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान है। पर्यटकों व यात्रियों में सुरक्षा का विश्वास जगाने की प्रबल आवश्यकता के दृष्टिगत इतनी विषम परिस्थितियों के बावजूद चारधाम यात्रा सफलतापूर्वक चल रही है। आशा है अगले दो वर्षों में उत्तराखण्ड अपनी पूर्ण क्षमता के अनुसार सुरक्षित यात्रा एवं पर्यटन की गति प्राप्त करने में सफल होगा। परन्तु आपदाग्रस्त लोगों के रोजगार को पुनःस्थापित करने में 3-4 वर्ष लगेंगे। मुख्यमंत्री श्री रावत ने केन्दीय वित्त मंत्री से अनुरोध किया है कि भारत सरकार उत्तराखण्ड के आपदाग्रस्त जिलों (जनपद रूद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर एवं पिथारौगढ़) के लोगों के पर्यटन व्यवसाय, भवन, होटल भवन, दुकान, कृषि भूमि व फसलों की व्यापक हानि से प्रभावित व्यक्तियों को इनके बैंक ऋण पर लग रहे ब्याज की अगले 3 वित्तीय वर्षों क्रमशः 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 हेतु माफी दिए जाने की स्वीकृति प्रदान करने का कष्ट करंे, ताकि यह अपने कार्यो व व्यवसाय की पुनःस्थापना कर आपदा प्रभावित लोग मूल ऋण को लौटाने में सक्षम हो सके।
राज्य आन्दोलनकारी जेपी पाण्डे उत्तराखण्ड कांगे्रेस कमेटी का प्रदेश सचिव मनोनीत
हरिद्वार 27 जून(निस)। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षा सोनिया गांधी की संस्तुति पर उत्तराखण्ड कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय द्वारा प्रख्यात राज्य आंदोलनकारी जेपी पाण्डे को उत्तराखण्ड कांगे्रेस कमेटी का प्रदेश सचिव मनोनीत किये जाने पर उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप ने स्वागत किया। उत्तराखण्ड कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव पर पर जेपी पाण्डे के मनोनीत होने पर हर्ष व्यक्त करते हुए धीरेन्द्र प्रताप ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने पाण्डे को प्रदेश सचिव पर नियुक्त समस्त राज्य अंादोलनकारियों को सम्मान किया है। प्रताप ने कहा कि कांगे्रस पार्टी के प्रति जेपी पाण्डे की निष्ठा व लम्बे समय से संगठनात्मक अनुभव एवं जमीन से जुड़े होने पर पार्टी अध्यक्षा सोनिया गांधी एवं उपाध्यक्ष राहुल गांधी की संस्तुति पर उनको कांगे्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने प्रदेश सचिव नियुक्त किया है। प्रताप ने आशा व्यक्त की है कि जो दायित्व पाण्डे को सौंपा गया है वह उसका निष्ठा पूर्वक निर्वहन करते हुए सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी की भावना तथा कांगे्रेस की गौरवशाली परम्पराओं के अनुरूप उत्तराखण्ड में पार्टी संगठन को मजबूती प्रदान करेंगे। प्रताप ने जेपी पाण्डे की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह एक कर्मठ, ईमानदार व जमीन से जुड़े हुए नेता हैं और जनता में उनकी जबरदस्त पकड़ है। गढ़वाल विश्वविद्यालय आंदोलन से लेकर जनपद हरिद्वार को उत्तराखण्ड में सम्मिलित करने और उत्तराखण्ड राज्य प्राप्ति में पाण्डे की प्रमुख व निर्णायक भूमिका रही है। यही नहीं उनको तीन बार सिक्कों से तौलकर व जनता द्वारा एक जीप भेंट कर उनको भारी सम्मान जनता द्वारा दिया जा चुका है। जेपी पाण्डे को प्रदेश सचिव मनोनीत होने पर राज्य आंदोलनकारियों ने उनको बधाई दी। बधाई देने वालों में महेश गौड़, मीरा रतूडी, मनोज गोस्वामी, भूपेन्द्र रावत, नवीन नैथानी, अनिल रावत, अरविन्द शर्मा, राजेश रस्तोगी, डाॅ. संजय पालीवाल, रकित वालिया, सुन्दर सिंह मनवाल, मिथलेश गिल, राजेन्द्र रावत, नरेन्द्र गुसांई, चै. अपफल अल्वी, सतीश जैन, राजेश गुप्ता, रोशनी कालियान, राजेश शर्मा, डाॅ. अमर सिंह अहितान, हरीकिशन भट्ट, जब्बर सिंह पावेल, जगमोहन रावत, थामेश्वर कुकरेती, बचन सिंह नेगी, लक्ष्मी प्रसाद उनियाल, महेन्द्र रावत, विजय भंडारी आदि ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी।



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