भ्रष्टाचार विरोधी दिवस को सफल बनाने की अपील - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 19 जुलाई 2015

भ्रष्टाचार विरोधी दिवस को सफल बनाने की अपील

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पटना, 19 जुलाई। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की बिहार राज्य परिषद के सचिव सत्य नारायण सिंह ने वाम दलों के संयुक्त तत्वाधान में 20 जुलाई को अखिला भारतीय पैमाने पर आयोजित हो रहे भ्रष्टाचार विरोधी दिवस और 21 जुलाई के बिहार बंद को सफल बनाने के लिए निम्नलिखित अपील जारी की है.

बिहार के विविध जनसंगठनों, ट्रेड यूनियनों, खेत मजदूर यूनियनों, किसान संगठनों, छात्र-युवा संगठनों, असंगठित एवं नियोजित क्षेत्रों में कार्यरत संघों /महासंघों के साथ-साथ कतिपय लोकतांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष दलों और व्यक्तियों ने 20 जुलाई के राष्ट्रव्यापी भ्रष्टाचार विरोधी दिवस और 21 जुलाई के बिहार बंद को समर्थन दने का एलान किया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और संयुक्त वामपक्ष वैसे तमाम संगठनों, दलों और व्यक्तियों के समर्थन व सहयोग की पेषकष का स्वागत करता है। 
ज्ञातव्य है कि देष के छः वामपंथी दलों:- सी॰पी॰आई॰, सी॰पी॰आई॰ (एम॰), सी॰पी॰आई॰ (एमएल-लिबरेषन), फारवर्ड ब्लाॅक, आर॰एस॰पी॰ और एस॰यू॰सी॰आई॰ (सी॰) ने भाजपा-नीत केन्द्र सरकार के मंत्रियों और राजस्थान, मध्य प्रदेष, जैसे भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की दैत्याकार वित्तीय घोटालों (मोदी गेट-व्यापम घोटाला आदि) व भ्रष्टाचार में संलिप्तता के विरोध में 20 जुलाई को अखिल भारतीय ‘भ्रष्टाचार विरोधी दिवस’ मनाने का निर्णय लिया है। इस अवसर पर बड़े पैमाने पर नुक्कड़ एवं ग्राम सभाओं, मषाल जुलूस आदि के आयोजन कर नरेन्द्र मोदी, सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे, षिवराज सिंह चैहान और धर्मेन्द्र प्रधान के पुतले जलाये जाएंगे। 
अगले दिन 21 जुलाई को उक्त वामपंथी दलों की ओर से बिहार बंद का आयोजन किया जायेगा जिसका मुख्य उद्देष्य केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा गांव व किसान विरोधी भूमिका अधिग्रहण अध्यादेष समेत केन्द्र व राज्य सरकारों की जनविरोधी नीतियों कृषि और मजदूरी से जुड़ी समस्याओं, बंद्योपाध्याय आयोग की वास भूमि एवं बटाईदारों के अनिवार्य पंजीयन एवं अन्य अनुषंसाओं को लागू करने, भोजन की गारंटी व सार्वजनीन जनवितरण प्रणाली लागू करने और सांप्रदायिकता व जातीयता के दलदल से बिहार को मुक्त कर राज्य के विकास को वामोन्मुखी, जनपक्षी व सही अर्थों में समावेषी बनाना है। 
वामदलों के कार्यकत्र्ता सभी स्तरों पर व्यापक जनसंवाद स्थापित कर व्यापक अभियान चलाने में लगातार जुटे हुए हैं जिसका परिणाम यह है कि अनेक लोकतांत्रिक दलांे व संगठनों का समर्थन इस अभियान को मिल रहा है और अभूतपूर्व बिहार बंद की संभावना बढ़ती जा रही है। 

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