- स्वास्थ्य कार्यकर्ता को भी होना पड़ा डाक्टरी लालफीताशाही का शिकार
- लिख डाली मुख्यमंत्री को चिट्ठी, क्या केजरीवाल से जवाब आएगा......
प्रिय,
अरविन्द केजरीवाल. मुख्यमंत्री, दिल्ली सरकार
विषयः बीमार माता जी के ईलाज में लापरवाही के संबंध में!
माननीय मैं आपका ध्यान दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था कि अव्यवस्था कि ओर आकृष्ट करना चाहता हूं। सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों को कैसे सुधारा जाए, समझ में नहीं आ रहा है। आज सुबह माता जी को नजदीक के स्वास्थ्य केन्द्र में ले गया था। मयूर विहार फेज 3 का सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र के रूम न. चार में बैठीं डॉक्टर साहिबा ने माता जी से पूछा कि क्या हुआ है...उन्होंने बताया कि बुखार रह रहा है...मैं साथ में ही था मैंने पूरी बात बताई कि, माता जी का पेट बार बार गर्म हो जा रहा है, जिसके कारण सिर में दर्द भी हो रहा है...मेरी बात सुनने का शायद मैडम के पास समय नहीं था। उन्होंने झटपट पूर्जा पर दवा घसीट दिया। मुझे अजीब लगा...65 वर्ष का मरीज एक डाक्टर के पास आया है, उसका न तो बीपी मापा गया और न ही बुखार की शिकायत पर बुखार। हद तो यह कि मैडम ने कहा कि आप थर्मामीटर से बुखार माप के कल बताइयेगा!
फिर मैं भी कुछ बोला...कहा कि पेट में गर्मी है...उनका जवाब था कि कहीं भी गर्मी हो इसे तो हम बुखार ही समझेंगे। उनकी घसीट लिपि पर जब हमने सवाल उठाया और कहा कि अब तो आपलोगों को साफ-साफ अक्षरों में दवा लिखने का निर्देश आ चुका है! उनका जवाब था-आप एक ओर की बात क्यों देख रहे हैं हमें 80 पेसेंट ही देखने होते हैं लेकिन हम 500 पेसेंट देख रहे हैं! पेट को लेकर मैंने जब ज्यादा बात की तो मैडम ने अल्ट्रासाउंड लिख दिया और कहा कि अल्ट्रासाउंड करा के ले आना। मामला यहीं शांत नहीं हुआ, मैडम ने तो यहां तक कह दिया कि आपको क्लिनिक खोलना है जो दवाइयों के बारे में पूछ रहे हैं! उनको भला मैं क्या जवाब देता। जो खुद अपने प्रोफेशन के साथ न्याय नहीं कर पा रहा हो उसको क्या कहा जाए...
सबसे बड़ी बात यह कि उन्होंने तीन दवाइयां प्रिस्क्राइव कीं...
पारासेटामल 500 एम जी
रेनिटिडिन 150 एमजी
डुल्कोलेक्स
पारासेटामल और रेनिटिडिन तो समझ में आया लेकिन डूलकोलेक्स का प्रिस्क्राइव करना समझ में नहीं आया। यहां बता दूं कि डूल्कोलेक्स अमूमन उनको दिया जाता है जिनका पैखाना बहुत कड़क होता है या कई दिनों से नहीं हुआ है। इन दोनों कि स्थिति नहीं थी माता जी को...
फिर मैं वहां से निकलर आयुर्वेदिक वैद्य के पास गया...उन्होंने ठीक से मर्ज को समझा और फिर कुछ दवाइयां दीं...एक खुराक में माता जी कि तबीयत पहले से काफी बेहतर है!
न तो थर्मामीटर की जरूरत पड़ी और न ही अल्ट्रासाउंड की और नही जरूरत पड़ी लूज मोसन करने वाली दवा डूल्कोलेक्स खाने की!
अब मुख्यमंत्री जी आप ही बताइए आपके डॉक्टर जब मरीजों पर प्राथमिक स्तर पर समय ही नहीं देंगे तो रोगियों की संख्या को बड़े अस्पतालों में कैसे रोका जा सकता है!
आप तो जनआंदोलन से निकलकर आए हैं...स्वास्थ्य को लेकर आंदोलन कब करेंगे!
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संलग्न : पुर्जा
सादर
आशुतोष कुमार सिंह
बीमार माँ का पुत्र
संपर्क-forhealthyindia@gmail.com

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