संसद का मानसून सत्र शोर-शराबा भरा हो सकता है, लिहाजा केंद्र सरकार इस सत्र में विवादास्पद भूमि विधेयक को संभवत: न लाए। यह बात रविवार को सूत्रों ने कही। सूत्रों के मुताबिक, संयुक्त संसदीय समिति सत्र के प्रथम दिन मंगलवार को भूमि विधेयक की रपट पेश करने वाली थी, लेकिन वह इसके लिए दो अतिरिक्त सप्ताह की मांग कर सकती है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता ने कहा, "रपट तत्काल नहीं आएगी। कोई भी फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि रपट कब पेश की जाती है। विधेयक पर इस सत्र में बहस हो पाने की उम्मीद नहीं है।"
19 दिवसीय सत्र में व्यापमं और ललित मोदी से संबंधित मुद्दे पर भारी शोर-शराबा होने की आशंका है। सूत्रों के मुताबिक, ऐसा माना जा रहा है कि भूमि विधेयक पेश करने से सरकार की समस्या बढ़ेगी ही। इसके पारित होने की कम संभावना के कारण सरकार इससे संबंधित अध्यादेश चौथी बार लागू कर सकती है। कांग्रेस ने रविवार को चेतावनी दी है कि सरकार यदि भूमि विधेयक पारित कराना चाहती है, तो उसे घोटाले के आरोपी मंत्रियों को हटाना होगा।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने रविवार को कहा, "आशा है कि प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) घोटाले के आरोपी मंत्रियों के इस्तीफे की घोषणा करेंगे। इससे विधेयकों को पारित करना आसान हो जाएगा।" सूत्रों के मुताबिक, संसद के इस सत्र की कार्यसूची में 35 कार्य दर्ज हैं, जिनमें राज्यसभा में लंबित नौ विधेयक और लोकसभा में लंबित चार विधेयक भी शामिल हैं। 11 नए विधेयक संसद में पेश किए जाएंगे। लोकसभा में लंबित विधेयकों में शामिल हैं भूमि विधेयक, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन विधेयक-2014, दिल्ली उच्च न्यायालय (संशोधन) विधेयक-2015 और बिजली (संशोधन) विधेयक-2014।
राज्यसभा में लंबित नौ विधेयकों में प्रमुख हैं जीएसटी विधेयक, व्हिस्ल ब्लोअर प्रोटेक्शन (संशोधन) विधेयक-2015, भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) विधेयक-2013, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) संशोधन विधेयक-2015। संसद में पेश किए जाने वाले नौ विधेयकों में हैं उपभोक्ता सुरक्षा कानून में संशोधन के लिए उपभोक्ता सुरक्षा (संशोधन) विधेयक-2015, पंचाट और सुलह (संशोधन) विधेयक-2015, उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्ते) विधेयक।

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