संसद का मॉनसून सत्र आज शुरू हो चुका है। राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही ललितगेट को लेकर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष सुषमा और वसुंधरा के इस्तीफे की मांग करने लगा, जिसके चलते सदन की कार्यवाही को थोड़ी देर के लिए स्थगित करना पड़ा। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार बहस के लिए तैयार हैं। सुषमा स्वराज सदन में जवाब देंगी। वहीं लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मंत्रियों के साथ बैठक कर रही हैं। बैठक में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरुण जेटली और संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू मौजूद हैं। इससे पूर्व वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने इस सत्र में अच्छी चर्चा और अच्छे फैसलों की उम्मीद जताई थी।
दरअसल, कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि सुषमा, वसुंधरा और शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे के बगैर वह संसद की कार्रवाई नहीं चलने देंगे, लेकिन सरकार की तरफ से भी किसी भी नेता के इस्तीफे की मांग को सिरे से खारिज कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न राजनीतिक दलों से अपील की थी कि कि वे संसद के समय का उपयोग सभी मुद्दों पर चर्चा करने में करें। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों सदनों की कार्यवाही चलाना सभी की साझी जिम्मेदारी है, साथ ही उन्होंने विवादित भूमि विधेयक को आगे बढ़ाने में सभी से सहयोग भी मांगा था।
संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री ने सभी दलों ने आग्रह किया कि वे देशहित को ध्यान में रखते हुए पिछले सत्र में चर्चा किए गए मुद्दों पर मिलकर आगे बढ़ें। संसद में भूमि विधेयक, जीएसटी विधेयक और रियल इस्टेट विधेयक जैसे महत्वपूर्ण विधायी कार्यों के लंबित होने के बीच सरकार ने सर्वदलीय बैठक में सभी दलों से इसे जल्द से जल्द पारित कराने में सहयोग मांगा।
सरकार के मुताबिक, इन नेताओं पर लगे सभी आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। पार्टी ने यह भी फैसला किया है कि वह विपक्ष के हमलों के सामने बैकफुट न जाकर आक्रामक रहेगी। बीजेपी इस बात पर भी जोर देगी कि व्यापम और राजस्थान का मामला राज्य का है और इन मुद्दों पर बहस वहां की विधानसभाओं में ही होना चाहिए। इसके लिए लोकसभा या राज्यसभा सही प्लैटफॉर्म नहीं है। इन सबके बीच ललितगेट में अपने ऊपर लगे आरोपों पर खुद विदेशमंत्री संसद में बयान देने को तैयार हैं। वहीं विपक्षी दलों के तेवर के जवाब में संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने कहा, 'यह सवाल ही नहीं उठता कि संसद चलाने के मुद्दे हम किसी से कोई अल्टीमेटम लें। कोई भी व्यक्ति संसदीय कार्यवाही में हम पर शर्तें लागू नहीं कर सकता।'
बीजेपी के शीर्षस्थ नेताओं की सोमवार रात एक बैठक हुई जिसमें सरकार ने फैसला किया कि वे विपक्ष की हर वार का करारा जवाब देंगे। सूत्रों के अनुसार, पीएम लैंड बिल के नए नियमों को लागू करने के लिए अध्यादेश या लगातार चौथे कार्यकारी आदेश का सहारा ले सकते हैं, लेकिन इन नियमों को स्थायी होने के लिए इसका संसद में पास होना बेहद जरूरी है, लेकिन विपक्ष ऐसा होने दे इसकी संभावना कम दिखती है। विपक्ष के अनुसार, ये नए नियम किसान विरोधी हैं और वे इसे हर हाल में पास होने नहीं देंगे।
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