हफ्ते के पहले कारोबारी दिन घरेलू बाजारों में जोरदार गिरावट देखने को मिल रही है। एशियाई बाजारों में दिख रही तेज गिरावट का असर घरेलू बाजारों पर दिखा है। एशियाई बाजारों में 0.5-8 फीसदी की तेज गिरावट दिख रही है। शंघाई कम्पोजिट 9.25 फीसदी गिरकर 3725 पर आ गया है। 2007 के बाद शंघाई कम्पोजिट में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है। सालाना आधार पर जून में चीन का इंडस्ट्रियल मुनाफा 0.3 फीसदी गिरा है, जबकि चीन का पीएमआई आंकड़ा 15 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है।
सेंसेक्स और निफ्टी में 1.3 फीसदी की कमजोरी देखने को मिल रही है। कमजोरी के इस माहौल में सेंसेक्स 28000 के नीचे आ गया है, तो निफ्टी 8420 के नीचे आ गया है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का माहौल है। सीएनएक्स मिडकैप इंडेक्स 0.6 फीसदी गिरकर 13500 के नीचे आ गया है। वहीं बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 0.7 फीसदी की कमजोरी के साथ 11600 के आसपास नजर आ रहा है।
बीएसई के सभी सेक्टर इंडेक्स लाल निशान में नजर आ रहे हैं। कैपिटल गुड्स, मेटल, बैंकिंग, ऑटो और ऑयल एंड गैस में बिकवाली से बाजार पर दबाव बना है। बीएसई के कैपिटल गुड्स, मेटल, बैंकिंग, ऑटो और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 2.1-1.25 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। बैंक निफ्टी 1.5 फीसदी गिरकर 18350 के स्तर पर आ गया है। फिलहाल बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 361 अंक यानि 1.3 फीसदी की गिरावट के साथ 27752 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 108 अंक यानि 1.3 फीसदी टूटकर 8414 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
बाजार में कारोबार के इस दौरान टाटा स्टील, हिंडाल्को, टाटा मोटर्स, आइडिया सेल्यूलर, भारती एयरटेल और ओएनजीसी जैसे दिग्गज शेयरों में 4.1-2.8 फीसदी की कमजोरी आई है। हालांकि टेक महिंद्रा, ग्रासिम, सिप्ला, एशियन पेंट्स, बजाज ऑटो और एनटीपीसी जैसे दिग्गज शेयरों में 1.7-0.75 फीसदी की मजबूती आई है।
मिडकैप शेयरों में गोल्ड लाइन, आईओबी, सीसीएल इंटरनेशनल, हटसन एग्रो और ओरिएंटल बैंक सबसे ज्यादा 9.4-4.2 फीसदी तक गिरे हैं। स्मॉलकैप शेयरों में जियोजित बीएनबी, आरएस सॉफ्टवेयर, वेंकीज, एरो कोटेड और कास्टेक्स टेक सबसे ज्यादा 7-5 फीसदी तक लुढ़के हैं।
एचआरबीवी क्लाइंट सॉल्यूशंस के चीफ एक्जिक्यूटिव टी एस हरिहर का कहना है कि चीन में गिरावट का असर केवल चीन में एक्सपोजर रखने वाले शेयरों तक ही सीमित है, लेकिन घरेलू बाजारों में गिरावट पी-नोट्स में घबराहट के चलते देखने को मिल रही है। बाजार में आगे और गिरावट आ सकती है। 2016 में जीएसटी लागू हो पाना मुश्किल नजर आ रहा है। संसद में जीएसटी के पास होने को लेकर आशंका बनी हुई है जिससे बाजार पर दबाव बढ़ रहा है। टी एस हरिहर के मुताबिक भारतीय बाजारों में ग्लोबल से ज्यादा घरेलू फैक्टरों का ज्यादा असर होगा। लिहाजा बाजार में अब शेयरों को ध्यान में रखकर ही निवेश करने की रणनीति अपनाएं।

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